निरुपमा और उसके बच्चे की हत्या : झूठ-सच की परतें

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♦ रीतेश

निरुपमा पाठक की हत्या और आत्महत्या के पेंच सुलझाने में झारखंड पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। निरुपमा को न्याय अभियान का यकीन है कि यह हत्या है और दोहरी हत्या है। एक निरुपमा पाठक की और दूसरा निरुपमा पाठक और प्रियभांशु रंजन के प्यार की निशानी 10-12 सप्ताह के अजन्मे बच्चे की। हम ये भी मानते हैं कि ब्राह्मण जाति से बाहर निरुपमा की शादी की चाहत के कारण उसके परिवार ने हत्या की। निरुपमा के परिवार का कहना है कि ये खुदकुशी है और इसके लिए उसके प्रेमी प्रियभांशु रंजन ने उसे उकसाया और मजबूर किया।

शुक्रवार को हमने कहा था कि झूठ बोलने का झंझट ये है कि आपको उसे हमेशा याद रखना होता है कि किससे, कब और क्या कहा गया था। इस रिपोर्ट में आपको बार-बार इस बात का अहसास होगा कि झूठ बोलकर अपनी बेटी की हत्या का आरोप झेल रहे परिवार ने अपने चारों ओर किस तरह से कानूनी शिकंजे को और कस लिया है।

ठोस तौर पर एक तरफ हत्या के पक्ष में तकनीकी कारणों से विवाद में आए पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अलावा कई परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं तो दूसरी तरफ खुदकुशी के पक्ष में एक सुसाइड नोट है जिसके साथ छेड़छाड़ की गयी है। पुलिस इसके आगे-पीछे की कड़ी तलाश रही है। प्रियभांशु, निरुपमा और प्रियभांशु के साझे दोस्त इस तलाश में उनकी पूरी मदद कर चुके हैं और आगे भी करने के लिए तैयार हैं। निरुपमा के परिजन पहले दिन से सबूत छुपा रहे हैं, झूठ बोल रहे हैं और बयान बदल रहे हैं।

इस मामले से जुड़ी कुछ चीजें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं। पुलिस की जांच में अगर कोई ऐसी चीज सामने आई हो जिसके बारे में बाहर नहीं बताया गया है तो हम खुद को उस हिसाब से अंधेरे में मान लेंगे। हम सार्वजनिक रूप से उपलब्ध चीजों के आधार पर अपने यकीन को और मजबूत होता देखते हैं कि निरुपमा की हत्या की गयी है, न कि उसने खुदकुशी की है। घटनाक्रम को लेकर हम एक-एक कर आगे बढ़ेंगे और क्रम कुछ दिनों तक चलेगा। आप सच को कहने और समझने में हमारा साथ देंगे, ये भरोसा है।

पुलिस को किसने खबर दी, परिवार ने या प्रेमी ने

निरुपमा का परिवार निरुपमा के शव को तिलैया के पार्वती अस्पताल ले गया और मौत की पुष्टि करके वापस लौट आया। पुलिस को सूचना देना उनके एजेंडे में नहीं था। उनका एजेंडा क्या था, क्या वो रात को सारे सबूत मिटाने की साजिश रच रहे थे, ये पुलिस को पता करना है।

पुलिस वाले कह रहे हैं कि निरुपमा के शव को बोलेरो में पार्वती अस्पताल ले जाने वाले लोग पाठक परिवार के पड़ोसी थे लेकिन अस्पताल के जिस स्टाफ ने निरुपमा का नब्ज और आंख देखकर साथ गए 4-5 लोगों को यह बताया था कि लड़की में जान नहीं बची है, उसने कुछ टीवी चैनलों से ऑन कैमरा कहा है कि साथ आए लोगों को उसने शहर में पहले कभी नहीं देखा था। लेकिन पुलिस उस बात पर ज्यादा यकीन करती दिखती है जो मौत को खुदकुशी की तरफ ले जाता दिखता है।

कोडरमा के सिविल सर्जन ने भी तो यही कहा था कि इस हत्या में कम से कम तीन लोगों का हाथ रहा होगा। हमारा मानना है कि पुलिस ने पार्वती अस्पताल गए लोगों के बारे में सही से छानबीन नहीं की नहीं तो भंडाफोड़ वहीं से हो सकता था।

कोडरमा पुलिस को निरुपमा की मौत की खबर दिल्ली से प्रियभांशु और उसके करीबी दोस्तों ने दी। प्रियभांशु को यह सूचना निरुपमा और उसके एक साझी दोस्त ने दी थी। उस लड़की को यह सूचना निरुपमा के दूर के किसी रिश्तेदार ने सवालिया लहजे के साथ दी थी। निरुपमा के घर का पता कोडरमा के एसपी साहब को मांगने पर प्रियभांशु ने ही एसएमएस से भेजा था। पुलिस इसके बाद ही निरुपमा के घर तक गयी और करंट लगने से मौत और फांसी लगाकर खुदकुशी की दो विरोधाभासी सूचना के साथ लौट आयी।

पुलिस ने फौरन निरुपमा के शव को अपने कब्जे में नहीं लिया। ऐसा क्यों नहीं किया गया, ये समझ से परे है। शव को उसके घर में ही छोड़ दिया गया ताकि निरुपमा के पिता और भाई के कोडरमा पहुंचने के बाद आगे की कार्यवाही की जाए। ऐसा ही हुआ और मौत के अगले दिन पोस्टमार्टम किया जा सका।

पोस्टमार्टम ज्यादा बारीक और सटीक हो, इसके लिए मेडिकल बोर्ड के गठन की मांग भी दिल्ली से निरुपमा और प्रियभांशु के दोस्तों ने की क्योंकि उन्हें मौत की खबर मिलने के बाद से ही लग रहा था कि ये ऑनर किलिंग है।

रिपोर्ट जारी है, अगला हिस्सा कल

(रीतेश निरुपमा को न्याय अभियान से जुड़े हैं और निरुपमा पाठक जिस संस्थान में पढ़ाई के दौरान प्रियभांशु रंजन के करीब आयीं, उस संस्थान के पुराने छात्रों के संगठन आईआईएमसी एल्युमनी एसोसिएशन की ऑनलाइन गतिविधियों को संचालित करते हैं। रीतेश से riteshiimc@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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