श्‍यामानंद जालान : वे नींव की ईंट की तरह बने रहेंगे

स्‍मरण : नाट्य-नि‍र्देशक श्‍यामानंद जालान

♦ हृषीकेश सुलभ




एक रंगदर्शक या रंगकर्मी के रूप में जो लोग सातवें और आठवें दशक की रंग-सक्रि‍यता का गवाह रहे हैं, उन्‍हें मोहन राकेश के नाटक ‘लहरों के राजहंस’ के जटि‍ल कथानक में उलझे नंद, सुंदरी, श्‍यामांग, श्‍वेतांक और अलका जैसे पात्र याद होंगे। ‘लहरों के राजहंस’ के पहले मंचन की तैयारी में लगे नि‍र्देशक श्‍यामानंद जालान ने मोहन राकेश से कई सवाल पूछे थे। वे लहरों और राजहंस जैसे प्रतीकों के भीतर छि‍पी भावनाओं का रंगावि‍ष्‍कार करना चाहते थे। सुंदरी के के मर्म को उकेरते हुए नंद से उसके संबंधों की नयी व्‍याख्‍या ही नहीं बल्‍कि‍, सुंदरी के माध्‍यम से सौंदर्य का विरल संसार रचना चाहते थे वे। मृग की मृत्‍यु के वृत्तांत के साथ-साथ नंद और बुद्ध के मि‍लन के रहस्‍य को अपने चाक्षुष-काव्‍य में संप्रेषि‍‍त करना चाहते थे। मोहन राकेश से इस संबंध में हुए पत्राचार ने हिंदी के रचना संसार और रंगजगत को एक बौद्धि‍क गरि‍मा दी थी और इसे आज भी उदाहरण के रूप में प्रस्‍तुत कि‍या जाता है।

गुजरे सोमवार की देर रात श्‍यामानंद जालान का देहावसान हो गया। लंबी बीमारी के बाद वे वि‍दा हुए। आजादी के बाद के हिंदी रंगमंच को जि‍न थोड़े से लोगों ने अपनी प्रति‍भा, नि‍ष्‍ठा और समर्पण के बल पर संवारा, श्‍यामानंद जालान उनमें शामि‍ल थे। उन्‍होंने अपनी सक्रि‍यता और रचनात्‍मकता से कोलकाता जैसे अहिंदीभाषी महानगर को हिंदी रंगमंच का सर्वाधि‍क सक्रि‍य और स्‍पंदित केंद्र बनाया। उन्‍होंने दि‍ल्‍ली के बर-अक्‍स हिंदी रंगमंच को इस तरह प्राणवान बनाया कि‍ आज भी कोलकाता और श्‍यामानंद के बि‍ना हिंदी रंगमंच पर बातचीत संभव नहीं।

श्‍यामानंद जालान का जन्‍म 13 जनवरी सन 1932 को कोलकाता में हुआ। उन्‍होंने कानून की पढ़ाई की। रंगकर्म की दुनि‍या में नाट्यनि‍र्देशक ललि‍त कुमार सिंह नटवर उनके गुरु थे। उनके ही नि‍र्देशन में सन 1949 में ‘नया समाज’ और सन 1950 में ‘वि‍वाह का बंधन’ नामक दो एकांकि‍यों में श्‍यामानंद ने अभि‍नय कि‍या। इसके बाद तरुण राय के नाटक ‘समस्‍या’ और उपेंद्रनाथ अश्‍क के नाटक ‘अलग-अलग रास्‍ते’ में अभि‍नय कि‍या। एक नि‍र्देशक के रूप में उनकी यात्रा सन 1952 में बच्‍चों के नाटक ‘एक थी राजकुमारी’ से आरंभ हुई। फि‍र उन्‍होंने जगदीश चंद्र माथुर के नाटक ‘कोणार्क’ को मंचि‍त कि‍या। ‘कोणार्क’ को आजादी के बाद आकार लेनेवाले आधुनि‍क हिंदी रंगमंच के श्रेष्‍ठ नाटकों में गि‍ना जाता है।

श्‍यामानंद जालान ने सन 1955 में कोलकाता की प्रसि‍द्ध नाट्यसंस्‍था ‘अनामि‍का’ की स्‍थापना की। उन्‍होंने ‘अनामि‍का’ के लि‍ए ‘हम हिंदुस्‍तानी’, ‘जनता का शत्रु’, ‘आषाढ़ का एक दि‍न’, ‘घर और बाहर’, ‘छपते-छपते’, ‘मादा कैक्‍टस’, ‘लहरों के राजहंस’, ‘शुतुरमुर्ग’ आदि‍ नाटकों को नि‍र्देशि‍त कि‍या। प्रति‍भा अग्रवाल द्वारा अनूदि‍त बादल सरकार के नाटकों ‘एवम् इंद्रजीत’ और ‘पगला घोड़ा’ को मंचि‍त कि‍या। हिंदी रंगमंच पर बादल बाबू को इन मंचनों से पर्याप्‍त ख्‍याति‍ मि‍ली। ‘आधे-अधूरे’, ‘शेष-रक्षा’ और ‘पंछी ऐसे आते हैं’ के बाद श्‍यामानंद जालान ‘अनामि‍का’ से अलग हो गये। इस अलगाव ने हिंदी रंगमंच की इस प्रमुख नाट्य-संस्‍था की सक्रि‍यता पर असर डाला।

सन 1972 में श्‍यामानंद जालान ने ‘पदाति‍क’ नामक नाट्य-संस्‍था का गठन कि‍या। उन्‍होंने वि‍जय तेंदुलकर के नाटकों ‘गि‍द्ध’ और ‘सखाराम बाइंडर’ के मंचन से एक नयी शुरुआत की। इसी साल एक बंगला नाट्यदल के लि‍ए बंगला में गि‍रीश करनाड के नाटक ‘तुगलक’ को मंचि‍त कि‍या और स्‍वर्ण चौधरी के नि‍र्देशन में ‘आस्‍कर’ नाट्यदल के लि‍ए मोहन राकेश के नाटक ‘आधे-अधूरे’ के अंग्रेजी अनुवाद ‘हाफ़ वे हाउस’ तथा वि‍जय तेंदुलकर के नाटक ‘शांतता कोर्ट चालू आहे’ के अंग्रेजी अनुवाद ‘साइलेंस, द कोर्ट इज इन सेशन’ में अभि‍नय कि‍या। जि‍न अन्‍य नाटकों से वे नि‍र्देशक, अभि‍नेता, रूपांतरकार आदि‍ के रूप में जुड़े रहे वे हैं – ‘सेत्‍जुआन की भली औरत’, ‘हजार चौरासी की मां’, ‘शकुंतला’, ‘कौवा चला हंस की चाल’, ‘बीवि‍यों का मदरसा’, ‘उध्‍वस्‍त धर्मशाला’, ‘अंधार यात्रा’, ‘कन्‍यादान’, ‘राजा लि‍यर’ आदि‍। श्‍यामानंद जालान को सन 1973 में संगीत नाटक अकादमी का सम्‍मान मि‍ला और वे सन 1999 से सन 2004 तक अकादमी के उपाध्‍यक्ष भी रहे।

श्‍यामानंद जालान की गि‍नती आधुनि‍क हिंदी रंगमंच के आरंभि‍क और श्रेष्‍ठ स्‍थपति‍यों में की जाएगी। वे नींव की ईंट की तरह बने रहेंगे।

Hrishikesh Sulabhहृषीकेश सुलभ। कथाकार, नाटककार और नाट्यचिंतक। पथरकट, वधस्‍थल से छलांग, बंधा है काल, तूती की आवाज़, वसंत के हत्‍यारे – कथा-संग्रहों, अमली, बटोही और धरती आबा नाटकों, माटीगाड़ी और मैला आंचल नाट्यरूपांतरों के रचनाकार। नाट्यचिंतन की पुस्‍तक रंगमंच का जनतंत्र हाल ही में प्रकाशि‍त। उनसे hrishikesh.sulabh@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *