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कब तक केवल मुसलमान पकड़े जाते रहेंगे?

17 June 2010 16 Comments


♦ शेष नारायण सिंह

पुणे की जर्मन बेकरी के विस्फोट के मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने मुंह की खाई है। राज्य के पुलिस महानिदेशक डी शिवनंदन ने बयान दे दिया है कि जर्मन बेकरी केस में पुलिस का काम बिलकुल गलत ढर्रे पर चल रहा था और अब तक जो कुछ भी जांच हुई है, उसका केस से कोई मतलब नहीं है। जांच फिर से करनी होगी। जांच का काम एटीएस को दिया गया था। राज्य के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी ने ऐलानिया कहा है कि अब तक की जांच को कूड़ेदान के हवाले करके नये सिरे से तफ्तीश होगी। उन्होंने अखबार वालों को बताया कि एटीएस को केस का ठीक से अध्ययन करना पड़ेगा, वैज्ञानिक तरीके से सबूत हटाना पड़ेगा और तब उन लोगों के पहचान करनी पड़ेगी जो जर्मन बेकरी कांड के लिए वास्तव में जिम्मेदार हैं। यानी अब तक पुलिस ने जो भी किया, उसमें पेशागत ईमानदारी बिलकुल नहीं है। इस बात की जांच की जानी चाहिए कि जिन लोगों को भी पुलिस ने पकड़ रखा था, उनके खिलाफ केस क्यों बनाया गया।

वैसे भी महाराष्ट्र पुलिस आजकल तरह तरह के गैरकानूनी काम के सिलसिले में खबरों में है। उनके एक इंसपेक्टर को गिरफ्तार किया गया है क्योंकि उसने सुपारी लेकर एक बिल्डर को जान से मारने की कोशिश की थी। ऐसे और भी बहुत से मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें पुलिस के तथाकथित इनकाउंटर स्पेशलिस्टों ने निरीह लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। जर्मन बेकरी का मामला थोड़ा पेचीदा है। जिस आदमी के बारे में सर्वोच्च पुलिस अधिकारी ने बताया है कि उसके खिलाफ कोई मामला नहीं है, जब उसे एटीएस वालों ने पकड़ा था तो क्या माहौल था, उस पर नजर डाल लेने से पुलिस की मानसिकता ठीक से समझ में आ जाएगी।

पुणे की जर्मन बेकरी में करीब 4 महीने पहले हुए धमाके में 17 लोग मारे गये थे। पुलिस ने अब्दुल समद उर्फ भटकल नाम के एक आदमी को 24 मई को कर्नाटक से गिरफ्तार किया था। बताया गया कि समद इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य यासीन भटकल नाम के आदमी का भाई है। तो क्या पुलिस किसी प्रतिबंधित संगठन के सदस्य के भाई को बिना किसी बुनियाद के गिरफ्तार करने के लिए आजाद है? अब्दुल समद की गिरफ्तारी के बाद तो माहौल ही बदल गया। पुलिस ने दावा किया कि जर्मन बेकरी में लगे क्लोज सर्किट टीवी की तस्वीरें देखने के बाद यह गिरफ्तारी हुई थी और वास्तव में जो आदमी बेकरी के अंदर बम रख रहा था, वह भटकल ही है और उसे गिरफ्तार करके एटीएस वालों ने बड़ी वाहवाही बटोरी थी। हद तो तब हो गयी जब केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने महाराष्ट्र एटीएस को सार्वजनिक रूप से बधाई दी और कहा कि समद जर्मन बेकरी धमाके का एक प्रमुख संदिग्ध है और उसको पकड़ कर पुलिस ने बहुत बड़ा काम किया है। आज जब पुलिस ने खुद यह स्वीकार कर लिया है कि उसके खिलाफ कोई केस नहीं है, तो समद के नागरिक अधिकारों का मलीदा बनाने वालों के साथ क्या सलूक किया जाना चाहिए?

किसी भी आतंकवादी मामले में किसी भी मुसलमान को पकड़ लेने की पुलिस की मानसिकता का इलाज किये जाने की जरूरत है। समद को गलत तरीके से हिरासत में ले लेने का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। मुंबई में ही ऐसे कई नौजवान बंद हैं, जनके ऊपर पोटा का केस बनाकर पुलिस ने पकड़ लिया था लेकिन बाद में पता चला कि उन पर कोई मामला ही नहीं था। इन हालात को दुरुस्त करने की जरूरत है। जब से गुजरात में नरेंद्र मोदी का राज आया है, वहां की पुलिस अपने राजनीतिक आका को खुश करने के लिए किसी भी मुसलमान को पकड़ लेती है और उसे प्रताड़ना देकर छोड़ देती है। गुजरात पुलिस ने मुंबई की लड़की इशरत जहां को भी इसी तरह के मामले में पकड़ा था और बाद में फर्जी मुठभेड़ दिखा कर मारा डाला था। उसी मामले में पुलिस वाले आजकल जेल की हवा खा रहे हैं। लेकिन वह तब संभव हुआ, जब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पंहुचा।

जरूरत इस बात की है कि शक की बिना पर लोगों को गिरफ्तार करने की पुलिस की ताकत की कानूनी समीक्षा की जाए। वरना मुंबई और गुजरात की जेलों में ऐसे सैकड़ों मुसलमान बंद हैं, जिनके ऊपर जो दफाएं लगायी गयी हैं, उनमें कहीं तीन साल, तो कहीं सात साल की सजा होती है लेकिन ये लड़के पिछले 8-10 सालों से बंद हैं और बाद में उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया जाएगा। यह न्याय व्यवस्था की एक बड़ी कमी है और इस पर फौरन सिविल सोसाइटी, मीडिया और राजनीतिक बिरादरी की नजर पड़नी चाहिए और अंग्रेजों के वक्त की नजरबंदी की पुलिस की ताकत को कम करके देश को एक सभ्य प्रशासन देने की कोशिश करनी चाहिए।

shesh narayan singh(शेष नारायण सिंह। मूलतः इतिहास के विद्यार्थी। पत्रकार। प्रिंट, रेडियो और टेलिविज़न में काम किया। 1992 से अब तक तेज़ी से बदल रहे राजनीतिक व्यवहार पर अध्ययन करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में नौकरी की। महात्‍मा गांधी पर काम किया। अब स्‍वतंत्र रूप से लिखने-पढ़ने के काम में लगे हैं। उनसे sheshji@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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16 Comments »

  • Ratan Singh Shekhawat said:

    किसी भी आतंकवादी मामले में किसी भी मुसलमान को पकड़ लेने की पुलिस की मानसिकता का इलाज किये जाने की जरूरत है।

    @
    इलाज की तो आपकी मानसिकता को भी जरुरत है |
    कब तक आप लोग आतंकवादियों व अपराधियों को धर्म के आधार पर पहचानते रहेंगे ? आप लोगों की इसी मानसिकता के चलते कि पकड़ा गया आतंकवादी मुसलमान है तो अपने आप आपको सेकुलर साबित करने के लिए उसे बचाने के चिल्ल-पों शुरू कर दोगे या मुसलमान उसके पक्ष में सिर्फ इसलिए लामबंद हो जाये कि वो मुसलमान है |
    ठीक इसी तरह कोई आतंकी या अपराधी हिन्दू धर्म मानने वाला हो तो उसके पक्ष में वो लोग उठ खड़े होंगे जो अपने आपको हिंदुत्व का स्वयंभू ठेगेदार समझ रखा है |
    @ अरे बावली बुचौ आतंकवादी को आतंकवादी समझो ,अपराधी को अपराधी समझो | उसकी पहचान के लिए हिन्दू-मुस्लमान जैसे शब्दों का प्रयोग क्यों करते हो ?

    आप जैसे लोगो की इसी घटिया मानसिकता का फायदा उठाकर आतंकी व अपराधी बच निकलते है |
    आतंकी आतंकी है वह न हिन्दू होता है न मुसलमान |

  • अयाज़ अहमद said:

    आपने बीमारी सही पकड़ी है इलाज किए जाने की जरूरत है ।

  • vijay jha said:

    जब तक एक मुसलमान, केवल मुसलमान ही बनकर रहेंगे तब तक मुसलमान पकडे जाते ही रहेंगे. बांकी भैया शेष जी आप खुद समझदार हो, शब्दों से खेलना तो कोई आपसे सीखे . ये मुसलमान तो बेचारे है, बीमारी में भी इनको लोलीपोप पसंद है, कुनैन इनको तीता लगता है. फिर तो इनके सेहत का मालिक खुदा ही है !

  • Shahnawaz Naeer said:

    शेष जी जब बताया कि गुजरात और महाराष्ट्र की जेलों में ऐसे कई कैदी बंद है तो उधर अपना ध्यान क्यों नहीं ले जाते भाई तुम लोग
    बिना किसी वजह के तुम्हे जेल भेज दिया जाए और तुम्हारे घर का हुक्का पानी बंद हो जाए तो क्या उसके बाद भी तुम पुलिस वालों की आरती उतारोगे
    इलाज की ज़रुरत रतन और विजय जैसे बेवकूफों को है

  • ratan singh shekhawat said:

    आप तो पत्रकार हैं वह भी वरिष्ठ। साथ में इतिहास के भी जानकार। आपके लिए विचारों की ऐसी दरिद्रता शोभा नहीं देती। आप बता दीजिए कि मुसलमानों को नहीं तो फिर किसे पकड़ा जाए। संसद हमले में किसे पकड़ें। मुंबई के ताज को ध्वस्त करने में किसे पकड़ें। मुंबई ट्रेन में सिलसिलेवार हमलों में किसे पकड़ें, अक्षरधाम मंदिर हमले के आरोप में किसे पकड़ें। जयपुर में हुए मानवता के खून के लिए किसकी गरदन दबोचें। यदि एक दो मामलों में पुलिस से चूक हुई तो आप इसे साबित कर देंगे कि मुसलमानों पर अत्याचार किया जा रहा है। आप कोर्ट से भी कह दीजिए कि कसाब या अफजल गुरू को फांसी देकर उसने बहुत बड़ी चूक कर दी है। आप कब तक अपने आप को धर्मनिरपेक्ष साबित करने की इस अंधी दौड़ में शामिल रहेंगे। देश आतंकवाद से लड़ रहा है मुसलमानों से नहीं, लेकिन आप जैसे कथित विद्वान अल्पसंख्यकों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि वे ही निशाने पर हैं। यदि मुसलमान युवा राह भटककर राष्ट्रविरोधी गतिवधियों में लिप्त पाए गए तो आप उन्हें अल्लाह के नाम पर तो माफ नहीं कर सकते न। आप तो मुझसे कहीं ज्यादा समझदार नजर आते हैं। ऐसी अफवाहें फैलाना बंद कीजिए और देश को आतंकवाद से निपटने में साथ आने दीजिए। देश सबका है आतंकी सबको नुकसान पहुंचाएंगे, किसी एक को नहीं। लिखना है तो आप इस पर लिखिए।

  • आदर्श राठौर said:

    सुरक्षा एजेंसियों से मेरी खास अपील… अगली बार कोई आतंकी वारदात हो तो इस बात का खासतौर पर ख्याल रखा जाए कि मुसलमानों को जांच की जद मे न लाया जाए। इस बार सिख, बौद्ध, जैन और हिन्दू धर्म का अनुसरण करने वालों में से आरोपी ढूंढे जाएं….

    जनाब हर बार मुसलमानों को ही हिरासत में लेना मुद्दा नहीं है। मुद्दा है किसी को जांच में निर्दोष पाए जाने के बाद सम्मान सहित रिहा करने का। आतंकी वारदात होने पर उंगली मुसलमानों पर क्यों उठती है इस विषय पर बहस पहले ही बहुत हो चुकी है। सत्य है कि चन्द लोगों की वजह से पूरी कौम की छवि को धक्का लगा है लेकिन यहां बात धर्म की नहीं है। खराबी तो पूरे सिस्टम में है। कोई वारदात होगी जो जांच करने के लिए शक के आधार पर पूछताछ के लिए हिरासत में लेना ही पड़ता है। लेकिन होना ये चाहिए कि हिरासत में लिए गए शख्स का नाम पता और चेहरा उजागर नहीं किया जाना चाहिए। और अगर जांच मे वो शख्स निर्दोष पाया जाए तो उसे तुरंत रिहा करने का प्रावधान होना चाहिए।

    दुखद है कि आपने लेख के लिए शीर्षक का चुनाव करने में इतनी बड़ी ग़लती कैसे कर दी… मुद्दा मुसलमान नहीं.. मासूमों का है…

  • Dr D.K.Garg said:

    You are a journalist , plz dont try to impose allegations on Police and Judiciary /Anyone whether Hindu or Muslim , if doing any anti-national activity is Terriorist .

    You are a narrow minded person and trying to get popularity by raising unnecessary issues.

    Plz write on Corruption , Role of Media , Role of road brand journalist .

  • michal chandran said:

    u r not a journalist
    only dalal…
    DALAAAAAAAAAAAAA

  • Ashish said:

    क्यों केवल मुसलमान ही पकड़े जाते हैं?

  • sunny said:

    ap fake journalist ho

  • RAFAT ALAM said:

    Lekh mein jo sach hai us tak brain ko one way traffic rakh kar nahi pahucha ja sakta.Ki gayi comments se aur aaj ke halat se to yahi sabak milta hai.Mujhe S.N.Singh sahib ki himmat aur hosle per naaz hai ke bahav ke virudh tairne ki koshish ki hai.Sir doob na jana.Accha hai meri shapit quam ko uske haal per chod dein.Bhai ham to yoh badnaseeb hain jinka ab Khuda bhi nahi.

  • suman said:

    You leave muslims whatever they have done because they are the vote bank in India. It is well known fact that where ever muslims go they create trouble. They don’t believe in law and order.

    And Jounalist like you never write the truth about Hindus who are migrated from Kashmir. Why only Muslims are terrorist in the whole world. I am not talking about India. Muslims are creating trouble everywhere.

  • RAJESH KUMAR said:

    ratan singh sekhawat adarsh AAP ESHE HI LIKHATE RAHO HAM AAPKE SATH HAIN RAJESH SEHRAWAT 9899886642 DARYAPUR KALAN DELHI 110039

  • Kumar said:

    sorry to say but..
    Satiya gaya hai budha…
    kuch bhi likh raha hai..
    jab is ke ghar wala koi marega na Bomb blast me tab
    is ka dimag thikane aayega..
    jai hind Jai maharashtra

  • krishan pandey said:

    Jo aaj sahib-e-masnad haiN, kal nahiN hoN ge
    Kirayedar haiN zaati makan thoRi hai
    Sabhi ka khoon shamil hai yahanN ki miTTi meiN
    Kisi ke baap ka Hindustan thoRi hai

  • Akash gupta said:

    Sarm aani chahiye apko…aap jaise logo ke wajah se hi desh ka ye hal hai…aaye din bam blast ho rahe hai…ye kyo nahi soch rahe ki har bomb blast ke piche muslman hi hota hai…aur ye is liye ki unko bachpan se yahi talim di jati hai ki hindu hamare dusman hai…aur aap jaise “desh drohi” log us aag me ghee dalte rahte hai…

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