अंग्रेजियत में रंगे बॉलीवुड को ‘राजनीति’ का करारा जवाब

abraham hindiwala

आप चाहें तो मुझे हिंदीभाषी दर्प का शिकार कह सकते हैं, लेकिन हिंदी प्रदेश के एक फिल्‍मकार की फिल्‍म ‘राजनीति’ की कामयाबी से मैं बेहद खुश हूं। हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री में बाकी सारा देश दिखता है, लेकिन हिंदी प्रदेश ही नहीं दिखते। प्रकाश झा ने हिंदी प्रदेश की खांटी कहानी कही है। इस फिल्‍म की सबसे बड़ी खूबी है कि यह हिंदी में सोची गयी है और हिंदी में ही इसके संवाद लिखे गये हैं। चौंकिए नहीं… आजकल हिंदी फिल्‍में अंग्रेजी में ही लिखी जाती हैं और उनके संवाद अंग्रेजी से हिंदी में अनूदित किये जाते हैं, जिन्‍हें रोमन लिपि में लिख कर एक्‍टर को दिया जाता है। हिंदी फिल्‍मों के ज्‍यादातर स्‍टार हिंदी नहीं पढ़ सकते और उनकी हस्‍तलिपि… किसी चौथी-पांचवीं के छात्र के जैसी अनगढ़ और बिखरी होती है। वे सिर्फ हस्‍ताक्षर करने तक ही हिंदी लिख पाते हैं। अगर नागरी लिपि में मेरा नाम पढ़ेंगे तो कुछ इस तरह आप सुनेंगे… अ… ब… ये क्‍या है… हां आधा र… ब्र… आ… ब्रा… ह म… हम… अब्राहम।


बहरहाल, ‘राजनीति’ हिट हो गयी है और बड़ी हिट हो गयी है। हिंदी फिल्‍मों से जिस प्रदेश, समूह और समाज को निकाल दिया गया है, ‘राजनीति’ उन्‍हें केंद्र में ले आयी है। लंबे समय के बाद हिंदी फिल्‍मों की परंपरा का ऐसा ड्रामा दिखा है। यहां साजिश है। शह और मात है। चालें हैं और हिंदी समाज का तेवर है। ‘राजनीति’ देश-विदेश में समान रूप से पसंद की जा रही है। ‘काइट्स’ और ‘रावण’ जैसी फिल्‍मों के बीच में आने पर भी ‘राजनीति’ का रंग जमा है और क्‍या चटखदार जमा है। सिनेमा हॉल से निकले दर्शक कभी अर्जुन रामपाल तो कभी मनोज बाजपेयी की चाल में नजर आ रहे हैं। सुना है कि ‘करारा जवाब मिलेगा…’ पूरे उत्तर भारत का प्रिय संवाद हो गया है।

‘राजनीति’ ने हिंदी फिल्‍मों में एनआरआई और शहरी विषय-वस्‍तु के ट्रेंड को करारा जवाब दिया है। ‘राजनीति’ के पोस्‍टर और विज्ञापन में ‘करारा हिट’ लिखा जा रहा है। मैं तो चाहूंगा कि प्रकाश झा और सफल हों। उन्‍होंने ‘मृत्‍युदंड’ से अलग सिनेमाई भाषा गढ़ने की यात्रा आरंभ की थी। ‘राजनीति’ उसका एक माइलस्‍टोन है। सफर लंबा है और अन्‍य फिल्‍मकारों की जरूरत है। उम्‍मीद है कि प्रकाश झा के पांव नहीं उखड़ेंगे… उनका साथ देने और भी फिल्‍मकार आएंगे।

मैं तो कहूंगा कि आप भी ‘राजनीति’ की कामयाबी के जश्‍न में शामिल हों। फिल्‍म देख ली है तो फिर से देखें। नहीं देखी हो तो जरूर देखें।

♦ अब्राहम हिंदीवाला

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