आठ महीने हो गये, पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट नहीं आयी…

राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय के छात्र शशि भूषण की मौत का मामला

♦ विकास वैभव

ज्यादा दिन नहीं हुए जब राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय ने अपनी लापरवाही से बिहार के हरफनमौला रंगकर्मी शशि भूषण वर्मा को हमसे छीन लिया था। शशि राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय में प्रथम वर्ष के छात्र थे। राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय में अध्ययन के समय ही उनकी तबियत खराब हुई और विद्यालय प्रशासन की इलाज में लापरवाही के कारण पिछले चार नवंबर को उनका देहांत हो गया। आज भी उनके परिजन और पटना के रंगकर्मी शशि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं जिसे भारी दबाव के कारण आज तक तैयार नहीं किया जा सका है। यह दबाव किसका है? क्या इसमें भी राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय प्रशासन की भूमिका है? क्या इसमें नोएडा स्थित उस अस्पताल की भूमिका है, जिसमें इलाज की लापरवाही के कारण शशि जैसा प्रतिभाशाली रंगकर्मी हसमे छीन लिया? मान लिया कि इसमें राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय प्रशासन की कोई भूमिका नहीं है, तो अपने छात्र की मौत के रहस्य से पर्दा उठाने और उसके परिजनों को न्याय दिलवाने के लिए राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय क्या कर रही है? क्या राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय प्रशासन शशि की मौत के बाद उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट जल्दी पाने के लिए कोई कदम उठा रहा है?

शशि की मौत को लगभग आठ महीने होने को आये हैं, क्या इतने समय बाद भी उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के नहीं मिलने को सामान्य माना जा सकता है? खबर तो यह है कि रिपोर्ट बननी तो दूर, आज तक उसके शरीर से निकाल कर जांच के लिए भेजे गए ‘बिसरा’ की जांच तक नहीं हो पायी है।

शशि की मृत्यु और उसके बाद जो कुछ हुआ, उसमें राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय की भूमिका हमेशा ही संदिग्ध रही है। शशि की मृत्यु वाले प्रकरण में राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय ने हमेशा यही कोशिश की कि किसी भी तरह से इस प्रकरण को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए। एक तरह से उसकी भूमिका पल्ला झाड़ने वाली ही रही है क्यूंकि इस प्रकरण में अगर जांच बढ़ती, तो राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय और अस्पताल प्रशासन की सांठ-गांठ के कच्चे-चिठ्ठे सामने आने का डर था। इसके अलावा भी राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय में जिस तरह की धांधलियां निरंतर चलती रहती हैं, उसका भी बाहर आने का खतरा था। यही कारण रहा कि राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय प्रशासन और उसके निदेशक ने पूरे प्रकरण पर पानी डालने की कोशिश की और इसे सामान्य मौत बताया और पोस्टमार्टम करवाने की भी जरूरत नहीं समझी।


आगरा में शशि भूषण

वह तो शशि से जुड़े रंगकर्मी थे, जिनके दबाव में पोस्टमार्टम करवाया जा सका लेकिन इस प्रक्रिया से भी राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय ने अपने को दूर ही रखा। राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय प्रशासन ने एक कमिटी बनाकर अस्तपाल प्रशासन की भूमिका की जांच करवायी और उसे क्लीन चिट भी दे दी। छात्रों के अंदर भरे गुस्से को देखते हुए राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय ने नवंबर में ही स्कूल बंद कर दिया और छात्रों को आनन-फानन में घर भेज दिया। भारी विरोध के बाद राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय प्रशासन ने जो क्षतिपूर्ति शशि के परिवार को देने का वायदा किया, विद्यालय प्रशासन ने उसे भी ठीक से पूरा नहीं किया। राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय प्रशासन पल्ला झाड़ने की जुगत में इतना आगे बढ़ गया कि जनवरी में पटना में होने वाले भारत रंग महोत्सव के सेटेलाइट फेस्टिवल के आयोजन को भी बहाने से टाल दिया। क्योंकि इन्हें डर था कि पटना में एक बार फिर हो-हल्ला मचा तो मामला फिर से उठेगा। राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय प्रशासन तो अपनी इस कवायद में इस तरह गिर गया कि शशि की मौत के बाद पटना के उसके संगठन ने जब उसकी याद में एक रंग महोत्सव का आयोजन किया, तो उसे भी मदद करने से साफ इनकार कर दिया जबकि राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय अपने हर ऐरे-गैरे पास आउट को कई प्रकार से पैसे देकर सहयोग करता रहता है।

क्या ऐसे में राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय के अंधे-गूंगे और बहरे निदेशक व प्रशासन से यह उम्मीद की जा सकती है कि वह शशि की मौत के आठ महीने बाद भी उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को त्वरित गति से निकलावने में सहयोग करेंगे? राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय चूंकि एक राष्‍ट्रीय संस्था है और सीधे केंद्र सरकार की देख-रेख में चलता है अतः विद्यालय प्रशासन चाहे तो यह कर सकता है। लेकिन उसके रवैये से नहीं लगता कि राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय को अपने ही एक छात्र को न्याय दिलवाने में कोई रुचि है क्योंकि वह उस प्रदेश से आता था जो कि भदेस माना जाता है। अंग्रेजियत में रंगे राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय को ऐसे छात्रों से क्या लेना-देना!

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