पीपली लाइव पर कुछ बात, तस्वीरें और टीजर

♦ प्रकाश कुमार रे

बहुत दिनों के बाद ऐसी कोई फिल्म आ रही है, जिसका इंतजार इतनी बेसब्री से मैं कर रहा हूं। यह फिल्म है, पीपली लाइव। मुझे पक्का भरोसा है कि यही इंतजार वे सब लोग कर रहे हैं, जिन्होंने महमूद फारूकी, दानिश हुसैन और अनुषा रिजवी की दास्तानगोई सुनी है। यह इस टीम की पहली फिल्म है, जिसे अनुषा निर्देशित कर रही हैं।

जिन्होंने मैसी साहब, मुंगेरी लाल के हसीन सपने, मुल्ला नसीरुद्दीन से लेकर सलाम बॉम्बे, लगान, वाटर तक रघुबीर यादव के अभिनय का आनंद उठाया है, वे रघुवीर यादव इस फिल्‍म के अहम किरदार हैं। रघु भाई बड़े दिनों के बाद परदे पर दिखेंगे। जिन्होंने हबीब तनवीर के नया थियेटर के नाटकों में रंगमंच के अलहदा रूप का दीदार किया है, इस फिल्म के कलाकारों की बड़ी संख्या इसी मंडली से है। हबीब तनवीर की बेटी नगीन तनवीर ने इस फिल्म में एक गीत गाया है और उसे संगीतबद्ध भी किया है, जो मध्य प्रदेश के गोंड आदिवासियों के संगीत पर आधारित है।

दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय और जामिया मिलिया इस्लामिया से जुड़े लोगों के लिए खास जानकारी ये है कि अनुषा दिल्ली विश्वविद्यालय और जामिया की पढ़ी हैं और फिल्म की एक मुख्य कलाकार शालिनी वत्स जेएनयू की हैं। फिल्‍म में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के कई कलाकार हैं। पूना फिल्म इंस्टीच्‍यूट से प्रशिक्षित कई लोगों ने इस फिल्म के तकनीकी पक्ष को संभाला है।

फिल्म की खासियतों की लंबी फेहरिस्त में अहम बात ये है कि फिल्‍म का संगीत मशहूर म्‍युजिकल बैंड इंडियन ओशन ने दिया है। दुनिया भर में मशहूर मैथिअस डुप्लेसी ने पार्श्व-संगीत दिया है। लेकिन जिस गाने के कुछ सेकेंड के टीजर ने तहलका मचा दिया है, उसे रघु भाई के साथ गाया है बडवाई गांव के बाशिंदों ने – सखी सैंया तो बहुत ही कमात है… इस गाने के शब्द भी गांववालों के ही हैं।

इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह भी हैं, जिनके चाहने वालों की तादाद बहुत बड़ी है। कुछेक को छोड़ दें तो फिल्म का अनुभव लगभग सारे कलाकारों के लिए पहला था। निर्देशिका अनुषा के लिए भी। फिल्म की कहानी गरीब किसानों के दुःख और उनके प्रति सरकार तथा मीडिया के साथ-साथ शहर के लोगों की उदासीनता या नासमझी या उपेक्षा का बयान है। इस फिल्‍म के निर्माता हैं आमिर खान, किरण राव और सहनिर्माता हैं रोनी स्क्रूवाला।

पीपली लाइव इसलिए भी एक जरूरी फिल्म है कि यह हमारे समय की सबसे बड़ी त्रासदी की एक कथा कहती है। ग्रामीण भारत भयानक तकलीफ से गुजर रहा है। किसानी बरबाद है, आर्थिक तंगी से लोग शहरों की ओर पलायन के लिए मजबूर हैं। सरकार और राजनेताओं का रवैया किसी से छुपा नहीं है। मुनाफाखोर बनिये और लालची कॉरपोरेट सब कुछ हड़प जाना चाहते हैं। मध्यवर्ग और मीडिया के अपने स्वार्थ हैं।

अनुषा कहती हैं कि फिल्म बनाने के लिए उन्हें कोई खास रिसर्च की जरूरत नहीं थी। सब कुछ सामने है हमारी आंखों के। मैं थोड़ा इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहना चाहता हूं कि इस त्रासदी को जानने-समझने के लिए मुझे या किसी को फिल्म देखने की जरूरत नहीं है। लेकिन ऐसी फिल्म बनाकर अनुषा और उनकी टीम ने बड़ा काम किया है। कहते हैं जरूरी हो तो सच को हजार बार कहो और हजार तरीकों से कहो। पर बॉलीवुड समय से कतरा कर चलता है। वह उन मुद्दों पर बात नहीं करता, जिनसे समाज दो-चार होता है। अगर फिल्में बनती भी हैं, तो बड़े सतही और अगंभीर अंदाज से। यह तो फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा कि इसमें क्या है और कैसे है लेकिन इस हिम्मत के लिए पीपली लाइव की टीम बधाई की पात्र है। यह हिम्मत बॉलीवुड के आउट साइडरों की इस टीम ने की है।

इस फिल्म से बॉलीवुड के नये युग के आरंभ की सूचना मिलती है। जिसकी झलक हालिया कुछ ऐसी ही छोटी फिल्मों में दिखी है। और यह सबसे बड़ी वजह है इस फिल्म को लेकर मेरे उत्साह की। पीपली लाइव में शहरी रंगमंच, लोक-कला, प्रशिक्षित तकनीशियन, देहाती कलाकार, अपनी पटकथा को लेकर उत्साहित लेकिन फिल्म के किसी अनुभव से अछूती निर्देशिका, फिल्म और संगीत और तकनीक को समझने वाले, फिल्म उद्योग के सबसे बड़े खिलाड़‍ियों में से एक, मनोरंजन उद्योग की बारीकियों को समझने वाली प्रोफेशनल कंपनी… इतने सारे घटक जुट सकते हैं और एक सुंदर फिल्म बन सकती है। यह फिल्म और लोगों को ऐसे जरूरी विषयों को खंगालने को उकसाएगी, रंगमंच और लोक-कलाओं में भरोसे को बल देगी, नये लोगों को हिम्मत देगी कुछ करने और नया करने की। अच्छी फिल्में बन सकती हैं और लोग उनका स्वागत करने के लिए भी तैयार हैं। इसका प्रमाण बनेगी पीपली लाइव। निःसंदेह, एक सफल फिल्म, एक सुंदर फिल्म।

फिल्म तेरह अगस्त को रिलीज हो रही है। टिकट बुक कर लें। इस फिल्म को थियेटर में ही जा कर देखें। पाइरेटेड या डाउनलोडेड फिल्म न देखें। इससे इन कलाकारों का हौसला टूटता है।

(प्रकाश कुमार रे। सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता के साथ ही पत्रकारिता और फिल्म निर्माण में सक्रिय। दूरदर्शन, यूएनआई और इंडिया टीवी में काम किया। फिलहाल जेएनयू से फिल्म पर रिसर्च। उनसे pkray11@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।)

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