वंचितों के पक्ष में खड़े होना लेखक की जिम्मेदारी : सुलभ
लंदन में संपन्न हुआ सोलहवां अंतरराष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान समारोह

तस्वीर में बायें से बैरी गार्डिनर, जकिया जुबैरी, हृषिकेश सुलभ, नलिन सूरी, दीप्ति शर्मा और वीरेंद्र शर्मा
लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में सोलहवां अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान लेने के बाद कथाकार हृषिकेश सुलभ ने कहा कि उनके लिए लिखना जीने की शर्त है। बिहार की जिस जमीन से वे आते हैं, वहां एक एक सांस के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमारी साझा संस्कृति को राजनीति की नजर लग गयी है। हम लेखक उसे बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। न्याय का सपना अभी भी अधूरा है और वंचित के पक्ष में खड़ा होना लेखक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त नलिन सूरी ने ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में हिंदी लेखक हृषिकेश सुलभ को उनके कथा संकलन ‘वसंत के हत्यारे’ के लिए ‘सोलहवां अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान’ प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने ब्रिटेन में बसे हिंदी लेखक महेंद्र दवेसर और कादंबरी मेहरा को ग्यारहवां पद्मानंद साहित्य सम्मान भी प्रदान किया। ब्रिटेन में लेबर पार्टी के सांसद बैरी गार्डिनर और वीरेंद्र शर्मा ने सम्मान समारोह की मेजबानी की।
ब्रिटिश सांसद बैरी गार्डिनर ने अपने भाषण की शुरुआत हिंदी में की। उन्होंने कहा कि जिन सवालों का जवाब राजनीति नहीं दे पाती, उनका जवाब साहित्य में खोजा जा सकता है। हजारों सालों से हम लेखकों कवियों का इसलिए सम्मान करते हैं क्योंकि उनके शब्द हमेशा हमें जटिल प्रश्नों से जूझने में मदद करते हैं। वे हमारी इच्छाओं और सपनों को शब्द प्रदान करते हैं। उन्होंने रॉबर्ट बर्न्स की प्रेम के बारे में एक चर्चित कविता का जिक्र करते हुए कहा कि लेखक जो लिखता है उन शब्दों को हम समय के पार भी याद रखते हैं।
साउथहॉल के सांसद वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि ब्रिटेन की संस्थाओं और समाज में हिंदी को जो स्थान मिलना चाहिए था, वह अभी नहीं मिला। उन्होंने कहा कथा यूके यहां सभी भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बनाने का जो काम कर रही है उससे हिंदी को उसका उचित सम्मान दिलाने में बहुत मदद मिलेगी। हमें इसका राजनीतिक समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को ठीक से समझने के लिए भारतीय भाषाएं जानना जरूरी है। सांसद वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि ब्रिटेन के अधिकांश प्रवासी भारतीय हिंदी बोलते समझते हैं। भले ही उनकी मातृभाषा गुजराती, पंजाबी, उर्दू या अन्य हो।
ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त नलिन सूरी ने कहा कि कथा यूके का यह आयोजन यहां विभिन्न भाषाई समुदायों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ब्रिटेन के दूर-दराज इलाकों में हिंदी किताबों को पाठकों तक पहुंचाने के लिए भारतीय उच्चायोग हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।
मेहरा ने कहा कि इस सम्मान के बाद उनके साहित्य में पाठकों की नयी दिलचस्पी पैदा होगी।
कथा यूके के महासचिव तेजेंद्र शर्मा ने कहा कि यह समारोह ब्रिटेन में बसे एशियाई लेखकों के बीच संवाद का माध्यम बन रहा है। हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, बांग्ला, पंजाबी सहित कई भाषाओं के लेखक हमसे जुड़ रहे हैं। कथा यूके द्वारा प्रकाशित इन लेखकों की प्रतिनिधि रचनाओं से ब्रिटेन में साहित्य संस्कृति की नयी एशियाई छवि उभरी है। उन्होंने पिछले वर्ष के दौरान दुनिया भर में हुई कथा यूके कि गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि हम विभिन्न समुदायों के बीच संवाद की नयी पहल कर रहे हैं। यह इस आयोजन के इतिहास में यह महत्वपूर्ण अवसर है जब ब्रिटेन के दो सांसद – बैरी गार्डिनर, वीरेंद्र शर्मा – हाउस ऑफ कॉमन्स में इसकी मेजबानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में कथा यूके साहित्य, संस्कृति से जुड़े गंभीर विचार विमर्श आयोजित करेगा।
ब्रिटेन में लेबर पार्टी की काउंसलर जकीया जुबैरी ने कहा कि हिंदी उर्दू की साझा संस्कृति को बचाने के लिए ब्रिटेन में बहुत कुछ करने की जरूरत है। इससे हम साहित्य को उस नयी पीढ़ी तक ले जा सकेंगे, जो अपनी जड़ों से कट रही है। समारोह में ब्रिटिश सांसद लॉर्ड तरसेम किंग, महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय, बीबीसी हिंदी की पूर्व प्रमुख अचला शर्मा और कैलाश बुधवार, कलाकार दीप्ति शर्मा, कथाकार सूरज प्रकाश, पत्रकार अजित राय, जय वर्मा, निखिल कौशिक सहित साहित्य, राजनीति, मीडिया, व्यवसाय, समाज सेवा एवं अन्य क्षेत्रों से जुड़ी कई हस्तियां मौजूद थीं।









aap jaise ache sahityakar jab tak sangharsh karte rahenge…tab tak hamari sajha sanskriti ko rajniti ki nazar nahi lagegi..indu sharma katha sammaan k liye bahut bahut badhai….
हृषिकेश सुलभ जी को बिजूका लोक मंच की तरफ़ से हार्दिक बधाई… उम्मीद करते हैं कि वे उपेक्षितों के पक्ष में सदा लिखते रहेंगे और साम्राज्यवादी सत्ता की नाक पर वार करते रहेंगे.. पुनः बधाई
सत्यनारायण पटेल
हृशिकेह्स जी को अनेक बधाइयाँ.
हृषिकेश सुलभ जी को बहुत-बहुत बधाई.
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