अरुंधती और मेधा के ख़िलाफ भूमिका बना रही है पुलिस

अगर यह खबर सही है तो छत्तीसगढ़ पुलिस एक बेहद खतरनाक साजिश रच रही है। यह साजिश है मानवाधिकार की आवाज उठाने वाले लोगों की ईमानदारी और नीयत पर सवाल उठा कर उन्हें फंसाने की। इंडियन एक्सप्रेस की खबर और पीटीआई की तरफ से जारी रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इस प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि छह जुलाई को बस्तर में कांग्रेस नेता के घर पर हुए हमले की साजिश रचने वाले शख्स का अरुंधती रॉय, मेधा पाटकर और गांधीवादी तरीके में यकीन रखने वाले एनजीओ वनवासी चेतना आश्रम के हिमांशु कुमार से रिश्ता है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पुलिस की तरफ से भेजे गये बिना हस्ताक्षर वाली प्रेस रिलीज में दावा किया गया है कि कांग्रेस नेता अवधेश गौतम के घर पर हमले की साजिश लिंगाराम को़डोपी में रची थी। को़डोपी दिल्ली और गुजरात में आतंकी गतिविधियों की ट्रेनिंग ले चुका है। माओवादी नेता चेरुकरी राजकुमार उर्फ आजाद के मारे जाने के बाद को़डोपी को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बना दिया गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने पुलिस के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में बहुत से लिंगाराम हैं और वो नहीं जानती की पुलिस किसकी बात कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस के आरोप फर्जी हैं और उनमें कोई दम नहीं है।

यह पहला मौका नहीं है जब छत्तीसगढ़ पुलिस ने मानवाधिकार की आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं पर निशाना साधा है। इससे पहले भी पुलिस के आला अधिकारी अरुंधती रॉय और हिमांशु कुमार पर नक्सलियों से साठगांठ के आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन अब उन्होंने मेधा पाटकर को भी इसमें लपेट लिया है। मतलब साफ है… जो भी नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में पुलिस और प्रशासन के साथ नहीं है, बारी-बारी उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की भूमिका तैयार की जा रही है।

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