आरक्षण के प्रोमो खिलाफ अंबिका सोनी को चिट्ठी

वरिष्‍ठ पत्रकार और राज्‍यसभा की मीडिया सलाहकार टीम के सदस्‍य अनिल चमड़‍िया ने आईबी मिनि‍स्‍टर अंबिका सोनी को एक चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उस धारावाहिक का जिक्र है, जो एनडीटीवी इमेजिन पर आने वाला है। इस धारावाहिक में बीस साल पहले हुए आरक्षण को लेकर सवर्णों के प्रतिरोध को भुनाया जा रहा है। साथ ही अनिल चमड़‍िया ने इस चैनल पर वंचितों के लिए धड़ल्‍ले से इस्‍तेमाल हो रहे अपशब्‍दों की ओर भी इशारा किया है : मॉडरेटर

श्रीमती अंबिका सोनी
सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार
नयी दिल्ली।

विषय : इमेजिन टीवी चैनल पर 29 नवंबर से आने वाले एक कार्यक्रम के संबंध में

मैं आपका ध्यान इमेजिन टीवी में 29 नवंबर 2010 से आने वाले एक कार्यक्रम के चल रहे एक प्रोमो की तरफ आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। चैनल पर अरमानों का बलिदान आरक्षण शीर्षक वाले एक कार्यक्रम का प्रचार चल रहा है। प्रोमो की यह भाषा है – बीस साल पहले इन्‍होंने आरक्षण का विरोध अपनी जान देकर किया। इसीलिए आज भी हम जैसे लोग काबिल होकर आगे नहीं बढ़ सके। पृष्ठभूमि में इस आवाज के साथ 1991 में मंडल आयोग की अनुशंसाओं को लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ एक युवक के आत्मदाह का दृश्य चल रहा है। फिर एक लड़का स्क्रीन पर आकर कहता है कि जो जल रहे थे वो मेरे भाई थे। मैं उनकी कुर्बानी को नहीं भूलने दूंगा। इसी कार्यक्रम का एक दूसरा प्रोमो भी है। इसमें लड़के की जगह लड़की है। वह मरने वाले को अपना भाई बताती है। कहती है कि जिस समय वह छोटी थी, सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्गों के लिए कोटा बढ़ाने के खिलाफ बहुत बड़ा विरोध हुआ था। क्या कोटा सिस्टम इतना बड़ा मुद्दा था कि जिसके लिए कोई अपनी जान भी दे दे? वो मेरे ताऊजी के बेटे थे। पर बीस साल बाद भी उन यादों में जीने का क्या फायदा? इस कार्यक्रम के प्रचार की भाषा और संदेश का विश्लेषण करें कि किस तरह से यह चैनल आरक्षण के मुद्दे पर समाज में झगड़े फसाद की जमीन तैयार करने की तैयारी कर रहा है।

इसी चैनल पर पिछले दिनों राखी का इंसाफ कार्यक्रम को रात के ग्यारह बजे से दिखाये जाने का निर्देश आपके मंत्रालय द्वारा दिया गया था। उक्त कार्यक्रम में भी समाज के कमजोर तबकों और उनकी भावनाओं एवं आकांक्षाओं पर चोट करने का सिलसिला चलता आ रहा हैं। इसके 23 अक्टूबर के एक कार्यक्रम के बाद झांसी के लक्ष्मण अहिरवार ने आत्महत्या कर ली। उसी 23 अक्टूबर के कार्यक्रम की प्रस्तोता राखी सावंत के कुछ वाक्य इस तरह है – वो तो मायावती नहीं…? भद्दी मुस्कुराहट के साथ यह इशारा उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की तरफ था। राखी सावंत ने लक्ष्मण से यह भी कहा था – तुमने तो मजे लेकर छोड़ दिया नापुरुष, नपुसंक। पत्नी तो फिक्स डिपोजिट होती है और उसे एटीएम की तरह बना दिया।

मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि इस समय टेलीविजन के कार्यक्रमों में समाज के कमजोर तबकों पर संवाद, वेशभूषा के जरिये हमले बढ़ रहे हैं। कमजोर वर्गों में महिलाएं भी हैं। जनसंचार माध्यमों द्वारा यह सांस्कृतिक हमला है। आपने अपने मंत्रालय के अधीन टेलीविजन चैनलों के कार्यक्रमों पर निगरानी रखने के लिए एक मॉनीटर सेल बनाया है। मैं समझता हूं कि उस मॉनीटर सेल द्वारा इस तरह के कार्यक्रमों में होने वाले कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन के मामलों की या तो रिपोर्ट नहीं की जाती होगी या फिर रिपोर्ट की जाती होगी तो संबंधित अधिकारियों द्वारा इनके विरुद्ध कार्रवाई करने के मामले में लापरवाही बरती जा रही है। आपसे अनुरोध है कि चैनलों के कार्यक्रमों के द्वारा सामाजिक उत्पीड़न के मामलों पर मंत्रालय को अपनी संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए। इस तरह से सांस्कृतिक हमलों से समाज में अशांति बढ़ेगी। अपेक्षा की जाती है कि समाज के पिछड़े वर्गों को संविधान की व्यवस्था के अनुसार जो आरक्षण दिया जा रहा है, उसके विरोध में जिस कार्यक्रम का प्रचार चल रहा है, उस पर आपके द्वारा तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

भवदीय,
अनिल चमड़िया

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