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माखनलाल में वेब पत्रकारों ने लेक्‍चर दिये, सम्‍मानित हुए



भाषण देते हुए संजीव सिन्‍हा


सम्‍मानित होते हुए संजीव सिन्‍हा

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में आयोजित एक कार्यक्रम में देश के दो पत्रकारों ने विद्यार्थियों से अपने अनुभव बांटे। ये पत्रकार थे बंगला पत्रिका ‘लेट्स गो’ एवं ‘साइबर युग’ के प्रधान संपादक जयंतो खान (कोलकाता) एवं प्रवक्ता डॉट काम के संपादक संजीव सिन्हा (दिल्ली)।

पत्रकार जयंतो खान ने विद्यार्थियों को अखबार व पत्र-पत्रिकाओं की साज-सज्जा के बारे में जानकारी दी। रंगों का विज्ञान समझाते हुए उन्होंने हर रंग की विशेष अपील एवं प्रभावों के बारे में बताया। पत्र-पत्रिकाओं और अखबारों में इस्तेमाल होने वाली छपाई तकनीक के राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य के बारे में भी जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने विजुअलाइजेशन और ग्राफिक्स के बारे में भी छात्रों को जानकारी देते कहा कि बदलते मीडिया और उसकी जरूरतों को जानना बहुत जरूरी है।

प्रवक्ता डॉट काम के संपादक संजीव सिन्हा ने वेब पत्रकारिता के बारे में जानकारी दी। अपने अनुभव बांटते हुए उन्होंने कहा कि जो तेजी इस माध्यम में है, वह मीडिया की अभी अन्य किसी विधा में नहीं है। यही तेजी इस माध्यम के लिए वरदान है। वेब मीडिया अपने आप में एक अनूठा माध्‍यम है, जिसमें मीडिया के तीनों प्रमुख माध्‍यम प्रिंट, रेडियो और टेलीविजन की विशेषताएं समाहित है।

उन्‍होंने मुख्‍यधारा के मीडिया की दशा-दिशा पर चिंता व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि मीडिया दिनोंदिन जन सरोकार की खबरों से दूर हो रहा है। इसलिए देश में वैकल्पिक मीडिया की सख्‍त जरूरत है। प्रवक्‍ता डॉट कॉम इसी दिशा में एक सक्रिय पहल है।

उन्‍होंने कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों से वेब पत्रकारिता के क्षेत्र में कॅरिअर बनाने के लिए तैयार होने का आग्रह किया। उन्‍होंने कहा कि अमेरिका जैसे देशों में वेबमाध्‍यम अन्‍य सभी मीडिया माध्‍यमों को कड़ी टक्‍कर दे रहा है और मुद्रित समाचार पत्र निकलने बंद हो रहे हैं। भारत में वेब पत्रकारिता का इतिहास लगभग 15 साल पुराना है, जब 1995 में अंग्रेजी के हिंदू अखबार ने अपना वेब संस्‍करण प्रस्‍‍तुत किया था। वहीं हिंदी की पहली वेबसाइट होने का सौभाग्‍य ‘वेबदुनिया डॉट कॉम’ को प्राप्‍त है। इसलिए वेब पत्रकारिता अपने देश में अभी प्रारंभिक अवस्‍था में है लेकिन इसका तेजी से विकास हो रहा है और इस क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ती जा रही हैं। छात्रों ने वेब पत्रकारिता से जुडी जानकारियों के अलावा इससे जुड़े विभिन्न आयामों जैसे – विश्वसनीयता, सामग्री आदि के बारे में भी प्रश्न पूछे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में विभागाध्यक्ष संजय द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर विश्वविद्यालय के प्रकाशन अधिकारी सौरभ मालवीय, राकेश ठाकुर खासतौर पर मौजूद रहे। आरंभ में अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर विभाग की छात्राओं नीतिशा कश्यप और अमृता राज ने स्वागत किया।


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4 Responses

  1. Abhay says:

    journalist should be encouraged more through this type of programs.

  2. vineet kumar says:

    अच्छा लगा कि आप भोपाल के मीडिया के स्टूडेंटस के बीच गए।.

  3. vikash anand says:

    समाचार पढ़कर प्रसन्‍नता हुई कि संजीव जी की सामाजिक सक्रियता अब दिल्‍ली के बाहर भी बढ़ रही है। आपने वाजिब चिंता प्रकट की है कि मीडिया दिनोंदिन जन सरोकार की खबरों से दूर हो रहा है। इसलिए देश में वैकल्पिक मीडिया की सख्‍त जरूरत है। संतोष की बात है कि ब्‍लॉग और वेबसाइट इस वैकल्पिक मीडिया के केंद्र बनकर उभर रहे हैं।

  4. पंकज झा. says:

    बहुत बढ़िया …बधाई संजीव जी. कामना है कि आप इस नए मीडिया के अग्रदूत के रूप में जाने जाय. देश को जन सरोकारों से जुड़े ऐसे नए माध्यम की ही ज़रूरत है. शायद आने वाला समय इसी माध्यम का है. लेकिन एक बात …पत्रकारिता में अपना कैरियर बनाने आए छात्रों को वेब मीडिया को अपनाने का सलाह देते हुए हमें यह तो सोचना ही होगा कि उनकी दाल-रोटी इस माध्यम से चल सकती है क्या? अभी तो किस तरह यह उपक्रम ‘जो घर जारे आपना चले हमारे साथ’ बना हुआ है यह आपसे बेहतर कौन जान सकता है. तो जैसे मादक सामग्रियों के पैकेट पर वैधानिक चेतावनी लिखी होती है उसी तरह इस माध्यम की मादकता, महज़ कुछ टिप्पनियों के भरोसे उसी के लत में अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले कुछ सरफिरों का उदाहरण देते हुए नए लोगों को थोड़ा भविष्य में ऐसे अवसर पर खबरदार भी कर दिया करें….खैर…आपका स्तुत्य प्रयास. ऐसे ही दिल्ली की देहरी से निकल कर भी अलख जगाते रहे….जय हो.

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