कहां हो पुरातत्‍ववि‍दो? इति‍हास के गह्वर के अघ्‍येताओ?

♦ हृषिकेश सुलभ

रमागढ़। रायगढ़ (छत्तीसगढ़) का सीमांत गांव। संजय उपाध्‍याय और सत्‍यदेव त्रि‍पाठी के साथ गया। हमारे पथप्रदर्शक थे पापा भारती। रायगढ़ के मुमताज भारती, जि‍न्‍हें सारा रायगढ़ पापाजी कहता है। 74 वर्षीय पापाजी के साथ रायगढ़ से लगभग 25 किमी दूर। फि‍र लगभग 4 किमी बीहड़ वन में पैदल यात्रा। सघन वन के वृक्षों, लताओं, पशु-पक्षि‍यों और वन के मौन से बति‍याते इस दुर्गम राह पर हम सब चलते रहे। फि‍र मि‍ले ये शैलचि‍त्र। लगभग 5 हजार साल पुराने आदि‍म समाज की सांस्‍कृति‍क अभि‍व्‍यक्‍ति‍। हमारी यह धरोहर अब नष्‍ट हो रही है। पुरातत्‍व वि‍भाग को शायद मालूम भी नहीं। बस वन वि‍भाग का एक उजड़ा हुआ बोर्ड टंगा है यहां। कहां हो पुरातत्‍ववि‍दो? कहां हो इति‍हास के गह्वर के अघ्‍येताओ? संस्‍कृति‍ और राष्‍ट्र के नाम पर वोट मांगनेवाले राजनेताओ, कहां हो तुम! सुनो… अरे सुनो… कोई तो सुनो… बचा सको, तो बचा लो इन चि‍त्रों की दुर्लभ संपदा को…


नष्‍ट होते करमागढ़ के शैल चि‍त्र 1


नष्‍ट होते करमागढ़ के शैल चि‍त्र 2


नष्‍ट होते करमागढ़ के शैल चि‍त्र 3


नष्‍ट होते करमागढ़ के शैल चि‍त्र 4


नष्‍ट होते करमागढ़ के शैल चि‍त्र 5


नष्‍ट होते करमागढ़ के शैल चि‍त्र 6


नष्‍ट होते करमागढ़ के शैल चि‍त्र 7


नष्‍ट होते करमागढ़ के शैल चि‍त्र 8


74 की उम्र में पहाड़ों पर चढ़ते और घाटि‍यों में उतरते हुए पापाजी (मुमताज भारती)


मशहूर रंग निर्देशक संजय उपाध्‍याय और वरिष्‍ठ कथाकार-रंगसमीक्षक हृषिकेश सुलभ

आइडिया सौजन्‍य : अजय ब्रह्मात्‍मज

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *