मैं सत्ता अभियान का नहीं, कर्तव्‍यों का रणनीतिकार हूं!

हमने थोड़े दिनों पहले छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक विश्‍वरंजन का एक आलेख छापा था, वे नक्‍सली हैं! उनसे सावधान रहो!! उनसे डरो!!! आलेख में माआवादियों की हिंसा और कविता के विरोधाभास को समझाने की अपनी तरह से कोशिश की गयी थी। हमारा मकसद था कि उनके लिखे पर लोग रिएक्‍ट करें, बहस हो। लेकिन चूं‍कि पिछले कुछ दिनों से मोहल्‍ला लाइव पर अपडेट्स की गति कमजोर रही, लोगों का उत्‍साह भी कम रहा। हम फिर से चलने की कोशिश कर रहे हैं : मॉडरेटर

हमने विश्‍वरंजन के परिचय में जो लिखा, उस पर उन्‍होंने एतराज जताया है। हमने लिखा था…


(विश्वरंजन। छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक। कवि भी हैं। नक्‍सलियों के खिलाफ सत्ता अभियान के रणनीतिकार, लीडर। उनसे dgp_chhattisgarh@yahoo.co.in पर संपर्क किया जा सकता है।)


विश्‍वरंजन जी ने पूरी विनम्रता से इस एतराज से हमें वाकिफ कराया…

आदरणीय भाई,

आभार कि आपने मुझे छापा। बंधुवर, आपने मेरे बारे में लिखा – नक्‍सलियों के खिलाफ सत्ता अभियान के रणनीतिकार, लीडर। भाई इसमें ‘सत्ता अभियान के रणनीतिकार’ विशेषण क्या अनुचिति का इशारा नहीं है? एक पुलिस महानिदेशक सत्ता का नहीं, अपने कर्तव्यों का रणनीतिकार होता है, जो किसी राज्य की कानून और व्यवस्था की सुव्यवस्था के लिए जिम्मेदार है। आप भी सोचें – नक्सली क्या प्रचलित तंत्र के खिलाफ अपनी सत्ता के लिए अभियान नहीं चला रहे हैं? किंतु उन्हें हम सत्ता अभियान के रणनीतिकार नहीं कहते। क्यों?

मेरा आग्रह है – कृपया इस विशेषण से मुझे मुक्त करना चाहेंगे।

हम उन्‍हें इस विशेषण मुक्‍त कर रहे हैं। साथ ही चाहते हैं कि इस मसले पर आप सुधीजनों की राय भी सामने आये।

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