क्‍या बिहार के मुखिया सांपों को दूध पिला रहे हैं?

ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंट्स फोरम, जेएनयू, नयी दिल्ली की ओर से जारी

बिहार में नीतीश सरकार द्वारा उच्च जाति आयोग के गठन के फैसले पर ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंट्स फोरम (एआईबीएसएफ), जेएनयू ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन ने इस संबंध में एक पुस्तिका ‘नीतीश के सवर्ण आयोग का सच’ जारी कर उत्तर भारत के छात्र संगठनों का आंदोलन के लिए आह्वान किया है।

संगठन द्वारा जारी पुस्तिका में संकलित लेख में जदयू के बागी विधान पार्षद व साहित्यकार प्रेमकुमार मणि ने बिहार सरकार को आडे़ हाथों लेते हुए कहा है कि ‘नीतीश सरकार बड़ी होशियारी से सामाजिक न्याय के आंदोलन और विचारघारा को हमेशा-हमेशा के लिए दफन करना चाहती है और बिहार में दक्षिणपंथी व दकियानूस राजनीति की स्थापना करना चाहती है’। पुस्तिका में प्रमोद रंजन व दिलीप मंडल के भी लेख संकलित हैं, जिनमें नीतीश कुमार की सामाजिक न्याय विरोधी गतिविघियों को विस्तार से बताया गया है। पुस्तिका को देश के प्रमुख बुद्धिजीवियों के अलावा पिछड़े व दलित तबकों के सांसदों को पहुंचाया जा रहा है।

ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंट्स फोरम (एआईबीएसएफ), के संयोजक अरुण कुमार, जितेंद्र कुमार यादव व अनूप पटेल ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय के छात्रों का एक जत्था 23 फरवरी से 5 मार्च, 2011 तक बिहार का दौरा करेगा। इस दौरान संगठन के सदस्य विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिघियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा आयोग के गठन के विरोघ में पटना, छपरा व मुजफ्फरपुर में कॉलेजों में छात्रों की सभाएं आयोजित की जाएंगी।

उन्होंने बताया कि एआईबीएसएफ नीतीश सरकार के इस कदम की असलियत से बिहार और देश की जनता को अवगत कराएगा। संगठन का मानना है कि उच्च जाति आयोग का गठन कर बिहार की राजग सरकार ने इतिहास के चक्र को उलटने की कोशिश की है। यह राजनीतिक ही नहीं, सामाजिक प्रतिक्रांति की भी शुरुआत है। इस फैसले का प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा तथा सामाजिक न्याय की ताकतें दिग्भ्रमित होंगी। उन्होंने कहा कि फोरम नीतीश कुमार के इस कदम का विरोघ करने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *