एक बेर किलियर बेरेन से सोच लीजिए बच्चा बाबू!

दामुल के संवादों की बानगी

ये कुछ संवाद निराला ने तहलका के लिए जुटाये थे। हालांकि वहां ये प्रकाशित नहीं हो पाये थे। हम यहां उन्‍हें टाइप कर रहे हैं। इन संवादों के भीतर आप दामुल की कहानी का मर्म समझ सकते हैं : मॉडरेटर

♦ तड़प रहा है रजपूतवा। अरे एक अंडा भी आ जाये बस्ती से भोट देने त पेसाब कर दीजिएगा हमरे मोछ पर मालिक।

♦ अगर माधो पांड़े का सतरंगा खेल जानोगे तो तरवा से पसेना निकलेगा, पसेना…

♦ चमार को भोट देने के लिए कहिएगा बच्चा बाबू तो ई तो सुअर के गुलाबजल से नहवावे वाला बात हुआ न! एक बेर किलियर बेरेन से सोच लीजिए बच्चा बाबू।

♦ बेरेन तो आपलोगों का मारा गया है। अरे गोकुलवा को खड़ा कउन किया है? हम। जिताएगा कउन? हम। तो राज का करेगा चमार। आपलोग समझिए नहीं रहे हैं। बाभन के राज को खत्म करने के लिए ईहे आखिरी पोलटिस बच गया है।

♦ अब जरा परची बना द हो दामु बाबू, कउवा बोले से पहिले लउटना है।

♦ चेहरा एकदम पीयर कल्हार हुआ है। का बात है, बीमार-उमार थी का?

♦ जनावर के ब्यौपार में कउनो झंझट नहीं है।

♦ बड़ी तफलीक में है हमरा साला।

♦ बस कर रे रंडी, छू लिया तो हमरा स्नान करना पड़ेगा। अरे चलो भागो इहां से, का हो रहा है इहां, रंडी के नाच!

♦ मुंहझउंसा, अभी त लउटा है।

♦ काम तो उहां बदनफाड़ है मालिक लेकिन पइसा भी खूबे मिलता है पंजाब में। दिन भर में एक टैम भोजन अउर दस गो रुपइया।

♦ ए माधो पांड़े, छोड़ो लल्लो-चप्पो का बात। जबान का चाकू ना चलाओ। डायरेक्ट प्वाइंट पर आओ।

♦ महत्माईन बड़ा उड़ रही है रून्नू बाबू।

♦ संजीवना रे संजीवना, तू मुखियवा को काट के दामुल पर काहे नहीं चढ़ा रे संजीवना…

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