सनसनी प्रेमी इस चकमक दुनिया में एक बेगानी शादी

परंपरा का निर्वाह या व्यापारिक विवाह

♦ श्याम बिहारी श्यामल

प्रिंस विलियम और केट मिडिलटन की हाई प्रोफाइल शादी के विवरणों से अधिक एक तर्क चौंकाने वाला है। वह यह कि इस विवाह के मौके पर उमड़े आम उत्साह में उपभोक्ताओं ने जो साठ करोड़ पौंड यानी करीब 45 अरब रुपये खर्च कर दिये, इससे ब्रिटेन की लड़खड़ाती अर्थ-व्यवस्था को सहारा मिल गया। पचास राष्ट्राध्यक्षों समेत 1900 मेहमानों की उपस्थिति। बकिंघम पैलेस व वेस्टमिंस्टर ऐबे चर्च के बाहर शादी देखने के लिए जनसैलाब का उमड़ पड़ना। उत्तेजना-उत्साह से भरे पांच लाख प्रशंसकों का जमावड़ा! इनमें से हजारों लोगों ने तो दो दिन पहले से आकर फुटपाथ पर डेरा डाल रखा था। इस तरह की शादी तो नहीं किंतु इसे देखने के प्रति जिज्ञासा की ऐसी बाढ़ पहली बार देखी जा रही थी।

ऐसे विवरण क्या संकेत कर रहे हैं? गौर करें तो साफ पता चलता है कि कुछ समय पहले से लोगों की उत्सुकता को सुनियोजित तरीके से उत्तेजित किया जा रहा था। करते-करते इसे चरम की हद तक पहुंचा दिया गया। कुछ इस तरह कि लोग सुध-बुध खोकर घरों से निकल पड़े। एकदम बैगपाइपर और चूहों वाली कहानी की तरह! ऐसे हजारों लोग दो दिन पहले से फुटपाथ पर आकर जम गये। पड़े रहे। जैसे-तैसे सोते-जागते, किंतु पूरी मुस्तैदी के साथ अड़े हुए। इस हसरत के साथ कि शादी का यह नजारा प्रत्यक्षतः देखने से कहीं चूक न जाएं!

अभी यह ठीक-ठीक समझ पाना कठिन है कि पश्चिमी मीडिया का किन्हीं कुशल आर्थिक कारीगरों ने सचमुच शातिराना इस्तेमाल किया है या सनसनी-प्रेमी इस चकमक-चकाचक दुनिया ने खुद ही यह हास्यास्पद कारनामा कर लिया है। जहां एक शादी देखने के लिए पांच लाख लोग उमड़ रहे हों, वहां वर्ल्ड मीडिया का ध्यान केंद्रित होना भी लाजिमी है। लिहाजा, यह अंततः दुनिया का मोस्ट हॉट मीडिया-इवेंट बन गया। 180 देशों से सीधा प्रसारण हुआ। हद तो तब हुई, जब इसने टीआरपी के सारे पिछले रिकार्ड तोड़ दिये। दुनिया भर में बाकायदा 2.4 अरब लोगों ने टीवी पर यह हाई प्रोफाइल विवाह देखा।

यह किसी से छुपा नहीं है कि विलियम-केट को लेकर काफी पहले से विभिन्न स्तरों पर माहौल तैयार किया जा रहा था। पश्चिमी मीडिया ने इस जोड़ी के प्रति पहले हौले से जिज्ञासा जगायी। तत्पश्चात मीठी आंच में पतीली गर्माने जैसा प्रयास शुरू कर दिया। फिर तो बहुत सधे हाथ से सुस्वादु व्यंजन की तरह इसे खूब रस ले-लेकर पकाया गया! विलियम-केट की तस्वीरों वाला कभी सिक्का जारी होने की खबर तो कभी उनकी वेडिंग तैयारियों पर एक से एक एंगल। इस प्रचार अभियान के संगठित परिणाम और इसके ‘रणनीतिकारों’ के आकलन की सफलता सबके सामने है।

इस तरह तो यही लगता है कि यह शादी परंपराप्रिय अंग्रेजों के परंपरा-निर्वाह का कोई आदर्श नमूना नहीं, बल्कि अर्थ-व्यवस्था के कुशल कारीगरों की शातिर कारस्तानी थी! ‘ग्रेट ब्रिटेन’ की कोई ग्रेट ट्रेडिशनल झलक नहीं, बल्कि शत-प्रतिशत ट्रेड! वह भी, ब्रिलियेंट विलेन-आइडिया के साथ।

सर्वाधिक चौंकाने वाली बात तो यह कि इक्कीसवीं सदी में दुनिया के सामने ब्रिटेन-वासियों की मानसिकता सोलहवीं शताब्दी के गुलामों जैसी उजागर होकर रह गयी है। तर्क और बुद्धि के किसी न्यूनतम पैमाने पर भी औंधे मुंह गिर पड़ने वाले लोग। जितने ही विकसित और संपन्न समझे जाने वाले, असलियत में उतने ही वैचारिक रूप से पिछड़े और बौद्धिक दरिद्र। आश्चर्य यह कि आधी दुनिया को गुलाम बनाकर लंबे समय तक उपनिवेशी शासन चलाने वाले ब्रिटेन से तमाम मुल्कों ने तो एक-एक कर आजादी कब की पा ली, किंतु उसके तथाकथित लोकतंत्र में अपनी जनता ही आज भी इस मानसिक-उपलब्धि-भाव से वंचित है। इस पर तरस ही खाया जा सकता है।

(श्‍याम बिहारी श्‍यामल। कथाकार-पत्रकार। दो उपन्‍यास प्रकाशित, धपेल और अग्निपुरुष। जयशंकर प्रसाद के जीवन को भी उन्‍होंने एक उपन्‍यास में समेटने की कोशिश की है, जिसका शीर्षक है, कंथा। यह नवनीत में धारावाहिक रूप से छप रहा है। फिलहाल दैनिक जागरण के वाराणसी संस्‍करण से जुड़े हैं। उनसे shyambiharishyamal1965@hotmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।)

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