जुलिआनो की याद में हिल्‍ले ले झकझोर दुनिया हिल्‍ले ले!

♦ प्रकाश के रे

तीस अप्रैल की शाम राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली के सम्मुख सभागार में जाने-माने फलस्तीनी-इजरायली फिल्मकार और नाटककार जुलिआनो मेर खमीस को दिल्ली के कलाकारों और कलाप्रेमियों ने श्रद्धांजलि दी। इसी साल चार अप्रैल को फलस्तीन के जेनिन में गोली मार कर जुलिआनो की हत्या कर दी गयी थी। पेश हैं उस अवसर की कुछ तस्वीरें और एक छोटा-सा विडियो…


कवि दिनेश कुमार शुक्ल फलस्तीनी कवियों की कविताएं पढ़ते हुए।


रंगकर्मी सुधन्वा देशपांडे ने जुलिआनो के जीवन और कला के बारे में बताया।


रंगकर्मी एमके रैना ने हमारे देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा से पीड़ित समाजों, खासकर बच्चों में कला के जरिये उम्मीद बनाये रखने की जरूरत को रेखांकित किया।


दास्तानगोई का पर्याय बन चुके महमूद फारूकी और दानिश हुसैन ने अपने खास अंदाज में फैज अहमद फैज की
फलस्तीन पर लिखी नज्‍म का पाठ किया।


दानिश हुसैन


इंडियन ओशन के राहुल राम ने कुछ गीत सुनाये। इस चित्र में सुधन्वा उनका माइक ठीक कर रहे हैं। सुधन्वा और राम हमारे समय के महत्वपूर्ण राजनीतिक कलाकार हैं।


राहुल राम


रंगकर्मी, समीक्षक और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की निदेशक अनुराधा कपूर ने रंगकर्मियों को जुलिआनो के काम से सीखने की सलाह दी।


दर्शको के बीच सफेद कमीज में बुजुर्ग सामिक बंदोपाध्याय। सिनेमा और नाटक के प्रमुख विद्वानों में शुमार प्रो बंदोपाध्याय ने इस कार्यक्रम में जुलिआनो के लेख और साक्षात्कारों के अंश पढ़े।

राहुल राम गोरख पांडे को गाते हुए।

(प्रकाश कुमार रे। सामाजिक-राजनीतिक सक्रियता के साथ ही पत्रकारिता और फिल्म निर्माण में सक्रिय। दूरदर्शन, यूएनआई और इंडिया टीवी में काम किया। फिलहाल जेएनयू से फिल्म पर रिसर्च। उनसे pkray11@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।)

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