इसमें कोई शक नहीं कि न्‍याय पैसेवालों की लौंडी है!

आज जब सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल का मामला खींचने से मना कर दिया, तो भोपाल के वरिष्‍ठ पत्रकार राजकुमार केसवानी ने टीवी पर कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट खुद को समझती क्‍या है। वह न्‍याय को मजाक क्‍यों बना रही है। वह भोपाल की जनता को कभी इस पाले में तो कभी इस पाले में क्‍यों उछाल रही है। अगर गलती सीबीआई या सरकार कर रही है, तो भोपाल की जनता का क्‍या दोष है। कुल मिला कर कह दिया कि न्‍याय पैसे वालों की लौंडिया है। हालांकि ठीक यही शब्‍द उनके नहीं थे : मॉडरेटर

भोपाल गैस कांड में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका खारिज कर दी। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ही 14 साल पहले के एक फैसले को वापस लेने की मांग की गयी थी, जिसके तहत आरोपियों के खिलाफ आरोप कमतर हो गये थे।

चीफ जस्टिस एसएच कपाड़िया की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले में 27 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सीबीआई ने अपील की थी कि गैस त्रासदी के आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या की धारा लगाने का आदेश दिया जाए, जिससे अधिकतम 10 वर्ष कैद की सजा सुनायी जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के 14 साल बाद याचिका दायर करने के लिए सीबीआई की निंदा की और कहा कि अर्जी में संतुष्ट करने लायक तथ्य का भी अभाव है।

गौरतलब है कि दिसंबर 1984 में भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड संयंत्र से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। रिसाव की वजह से हजारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। गैस प्रभावित हजारों लोगों ने बाद में भी दम तोड़ा।

इसके बाद 1999 में डाउ केमिकल कंपनी ने यूनियन कार्बाइड को खरीद लिया, जो 1984 की दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी के लिए जिम्मेदार थी। इस वर्ष एक अदालत ने सात भारतीय मैनेजरों को दो वर्ष कारावास की सजा सुनाई। इसके बाद जनाक्रोश भड़क उठा क्योंकि लोगों ने महसूस किया कि सजा पर्याप्त नहीं है।

[ शीर्षक सौजन्‍य : पराग दत्त ]

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