एक सिनेमा के आगे कांपने वाली सरकार का सच ये है…

♦ शमीमुद्दीन अंसारी

बुंदेलखंड में गरीबी और कर्ज के चलते किसान सल्फास खाकर तड़पते हुए अपनी जान दे रहे हैं। बिना यह जाने कि मुख्यमंत्री मायावती अपने लिए उनके ही पैसों से 50 करोड़ रुपये का शानदार महल बनवा रही है। तब मायावती सरकार को तनाव पैदा होने की आशंका नहीं होती। भ्रष्ट और अयोग्य बसपा सरकार के शासन में पूरे उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर अराजकता और अपराध फले-फूले हैं। मायावती सरकार को उनसे भी तनाव पैदा होने की आशंका नहीं है।

पूरे प्रदेश में अघोषित आपातकाल है। आप सरकार के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन तक नहीं कर सकते, जिसकी इजाजत संविधान का अनुच्छेद 19 देता है, बिना इस बात से डरे हुए कि कोई पुलिस अधिकारी आपको अपनी बूटों से रौंद न दे। मायावती सरकार को तब भी तनाव पैदा होने की आशंका नहीं होती।

प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं। आप कल्पना कीजिए कि सरकारी स्कूल के बच्चे बिना शिक्षकों के क्या पढ़ते होंगे? दूसरी ओर बीएड डिग्री लेकर भी नौजवान लड़के-लड़कियां ढाई हजार रुपये की मास्टरी करने पर मजबूर हैं। ढाई हजार रुपये माहवार की नौकरी से घर क्या घर का सपना भी जिंदा नहीं रह सकता।

मानवता के हत्यारे नरेंद्र मोदी को जीत दिलाने की अपील करते हुए मायावती गुजरात में चुनाव सभाओं को संबोधित करती हैं। मोदी सरकार ने अभी-अभी देश के इतिहास के सबसे भयानक दंगों में से एक में एक समुदाय का जनसंहार करवाने में प्रमुख भूमिका निभायी है।

उत्तर प्रदेश के अखबारों में रोजाना एक पेज स्त्री हिंसा और बलात्कार की खबरों से भरा रहता है। अपराधियों के मन में कानून का कोई खौफ नहीं है। वे जान चुके हैं कि यहां सब कुछ पैसे और रसूख के बल पर मैनेज हो सकता है।

इनमें से किसी भी कारण से मायावती सरकार को तनाव पैदा होने की आशंका नहीं होती है। मगर एक ढाई घंटे की हिंदी फिल्म से उसे तनाव पैदा होने की आशंका हो जाती है, जिसे अभी रिलीज होना है। और वह फिल्म के प्रदर्शन पर पाबंदी लगाने जैसा फासिस्ट काम करती है।

फासिस्ट अलग-अलग रूपों में आते हैं। कभी वह कट्टर धार्मिक होते हैं, तो कभी उदारवादी दलित। वे बहस से डरते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि बहस में उनके भोथरे तर्क नहीं टिक पाएंगे। इसलिए वो कभी किताब, कभी पेंटिंग तो कभी फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हैं।

हमारे दिलों में देख सकती हो तो देखो मायावती, तुम तब जानोगी कि अशांति क्या होती है?

(शमीमुद्दीन अंसारी। कथाकार। इलाहाबाद में जन्‍म। लखनऊ विश्‍वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी। उनसे shamimua@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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