समीर दा एक जिंदादिल इंसान थे, हमेशा हंसते रहते थे

♦ पंकज‍ त्रिपाठी

क बार केरल में शूटिंग पैकअप होने के बाद अचानक तेज बारिश हुई। मुझे जिस गाड़ी में जाना था, वो कीचड़ में अटक गयी। समीर दादा ने देख लिया। कहा, मेरी गाड़ी से चल। रात के अंधेरे में हम दोनों एक गाड़ी में रबड़ के जंगलों के अंदर से गुजर रहे थे। ढेर सारी बातें हुई उस यात्रा में। अपनी कई फिल्‍मों के बारे में बात की। कहा था कि उनका कोई सहायक आर्ट डायरेक्‍टर बनता है तो बेइंतहां खुशी होती है।

समीर दादा हर वक्‍त हंसते रहते थे। मुझे याद है, शूट के बीच में अक्‍सर एक्‍टर्स के पास बैठना … मस्‍ती … मजाक …

एक बार मैं, समीर दा और एक फिल्‍म का लाइन प्रोड्यूसर साथ में यात्रा कर रहे थे। उनका टिकट बिजनेस क्‍लास का था, पर उन्‍होंने कहा कि मैं तुमलोगों के साथ ही जाऊंगा और इकोनॉमी क्‍लास में ही बैठे।

एक बहुत काव्‍यात्‍मक फिल्‍म बनायी थी उन्‍होंने, बांग्‍ला में। उसकी काफी बातें उन्‍होंने मेरे साथ की। जब से उनके नहीं होने की खबर सुनी है, बहुत बेचैन महसूस कर रहा हूं।

समीर चंदा को जानने के लिए क्लिक करें : www.samirchanda.com

(पंकज त्रिपाठी। अभिनेता। पटना रंगमंच से अभिनय की शुरुआत। राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्‍नातक। धर्म, ओंकारा, रावण, अपहरण जैसी फिल्‍मों में यादगार भूमिकाएं। टाटा टी के जागो रे वाले विज्ञापन और आइडिया की अभिषेक बच्‍चन वाली सीरीज में भी खास तौर पर नजर आते रहे हैं। उनसे tripathi.pankaj04@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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