कोई समझ भी रहा है, ये कैसी सियासत कर रहे हैं अन्ना?
♦ राजेश रंजन पप्पू यादव
सुबह जब अखबार देखा, तो काफी गहरा आघात पहुंचा, बड़ा झटका लगा, रोंगटे खड़े करने वाले बातें थी। बच्चों को मुस्लिम और दलित की संज्ञा देकर यह कहना कि अन्ना ने दलित और मुस्लिम बच्चों के हाथ से अनशन तोड़ा, ऐसी बातें अपने आप को बुद्धिजीवी, राष्ट्रप्रेमी होने का दावा करने वाले, रामलीला में क्रांति लाने वाले, साहित्यकार, पत्रकार, टीम अन्ना के संवेदनशील साथियों के मुंह से निकली कैसी? ऐसी क्या जरूरत पड़ गयी कि टीम अन्ना ने दुनिया को दिखाने की कोशिश की – वे दलित और मुस्लिम प्रेमी हैं? इस प्रेम को दिखाने के चक्कर में इन लोगों ने बच्चे की मासूमियत को दांव पर लगा दिया। बच्चे का सौदा कर अपने चाल और चेहरे को बचाना चाहा।
बच्चे भगवान के रूप होते हैं। इनकी मासूमियत किसी भी जाति, धर्म या संप्रदाय से परे होती है। इस मासूमियत को उन्होंने अपने लिए इस्तेमाल किया। आप बच्चे से उपवास तुड़वाते तो यह ठीक था, लेकिन यह किस सभ्यता ने आपको इजाजत दी कि मुस्लिम और दलित के बच्चे से आपने अनशन तुड़वाया?
इससे भी ज्यादा आश्चर्य मुझे तब हुआ, जब योगेंद्र यादव जैसे सैकड़ों पत्रकारों को ऐसे गंभीर बात नहीं दिखी, न बड़े विद्वानों को ही दिखी। आजादी से लेकर आज तक तो यह कहा जाता था कि राजनीति करने वाले लोग जात, धर्म और मजहब का इस्तेमाल सिर्फ चुनाव जीतने के लिए करते हैं, लेकिन अन्ना जी आपने किस फायदे के लिए किया? कम से कम राजनीति करने वाले अपनी जात का इस्तेमाल करते भी हैं, तो उसके लिए सोचते हैं, उसकी मदद करने के लिए खड़े रहते हैं और उसका सहयोग भी करते हैं। लेकिन आपको न तो वोट लेना है न ही राजनीति करनी है, तो आप जैसे संत महापुरुष, तथाकथित भगवान, नवनिर्मित आदर्श (आइकन) को दलित और मुस्लिम बच्चों के सहारे की जरूरत क्यों पड़ी?
इस तरह की गंभीर बात को सचेत और प्रबुद्ध मीडिया वालों ने मसाला-मिर्च लगाकर प्रमुख खबर बनाया। सदियों से यह पूंजीवादी व्यवस्था दलित और मुस्लिम का इस्तेमाल करते आ राइ है, उन्हें यह विचार क्यों नहीं आया कि दलित, मुस्लिम समाज के जीवन स्तर को सुंदर बनाने की भी आवश्यकता है?
अन्ना जी! अपने टीम के चेहरे को बचाने के लिए आपने अनशन तो तोड़ा ही दलित और मुस्लिम बच्चों से, अब एक कृपा और कर दें दलित, मुस्लिम समाज पर! एक नयी क्रांति रामलीला से शुरू करें, इस देश में सदियों से राजनीति, न्यायपालिका और कार्यपालिका में दलित, मुस्लिम को जो सम्मान नहीं मिला, उसे दिलवाने के जरूरत है। हम चाहते हैं, जब आप अनशन दलित, मुस्लिम हाथ से तोड़ा है, तो आपके नेतृत्व में देश का प्रधानमंत्री दलित या मुस्लिम हो! सर्वोच्च न्यायपालिका और कार्यपालिका में मजबूती से हिस्सेदारी मिले! ताकि दलित, मुस्लिम को आपके क्रांति से न्याय मिल सके!
कृपा कर आप तथाकथित बुद्धिजीवी लोग भविष्य में अपने फायदे के लिए बच्चों का इस्तेमाल नहीं करेंगे! अन्यथा आपके प्रत्येक कारनामे से राजनीतिक बू आने लगेगी।
(राजेश रंजन (पप्पू यादव)। पप्पू यादव के नाम से मशहूर। बिहार के विभिन्न लोकसभा क्षेत्रों से चार बार सांसद रहे। हत्या के एक मामले में सजा मिली। अभी बेऊर जेल में हैं। लेकिन देशकाल समाज की परिस्थितियों पर लगातार जेल डायरी लिख रहे हैं। उनकी गतिविधियों के बारे में विस्तार से राजेश रंजन पप्पू यादव पर पढ़ा जा सकता है।)










Is aadmi ki khud kya shakhsiyat hai?
PAPPU PAS HO GAYA!
(INKO JAIL MEN KAFI SUVIDHAYEN MIL RAHI HAIN)
LEKIN BANDE NE BAAD BADI ZABARDAST KAHI HAI…
BAAD ko BAAT padha jaye.
PAPPU BAHUT BADA GUNDA HAI APNE ILAKE MEN… DALIT-MUSLIM VOTE PAR KOI APNA HATH SAF KARE USE PASAND NAHI.. JAIL MEN RAHAKAR THODA SAHITIYIK BHI HO GAYA HAI. DUBARA MAT PUCHHANA USKI SHAKSHIYAT
is LaLLu ke chamche ko Anna se pahle se hi chid thi… kahin lokpal par Lallu ke sath apni bhi samat na aa jaye… bechare ko Anna ke kilaf kuchh nahin mila to Dalit-Muslim ka hi card khel liya… isko to marne par jahannum bhi naseeb na hogi
Theek bola Bheem bhai….. ye gunda hamre ilake se hi MP tha..kabhi…. isko gareebi se nahi garibon se chir hai… garib netawon ko jameen se hi utha dene men viswash hai.. kitnon ke khoon se range hain iske haath.. Haramkhore punjiwad ka sabase bada dalal hai.. dikha aise raha hai jaise ye election CPM ke ticket se lada tha… kide paden aise neta nume gunde ko.
कोई समझ भी रहा है, ये कैसी सियासत कर रहे हैं PAPPU?
badhai ho, ab hamein gundon ke vichar bhi parhwa rahe hain
Pappu,
tumhari dukaan to bahut pahle band ho chuki hai… fir se kholna chahte ho kya? lekin tumhari dukaan na khule, isiliye to Anna ne apna departmental stores khol diya hai. jis me pahla item Lokpal Bill hai… aur ab aage aur bhi item ayenge… tum to bhagwan se yahi manao ki tum jail se hi upar ka tkt katwa lo… Q ki bahar nikalne par to tumhara pata nahi kya hoga… til til kar marna to tumhe bhaari padega…
बात तो सोलह आने सही है. मुस्लिम दलित प्रेम दिखाने की गरज से अन्ना की टीम ने ये निंदनीय काम किया. इन समुदायों से बच्चे जुटाने से पहले उनकी जात और धर्म तो ज़रूर पूछा गया होगा. इससे भी अधिक शर्मनाक थी गंडे-तावीज बेचने वाले चैनलों की टीआरपी की हवस जिन्होंने न्यूज़ फ्लैश और टिकर में बार बार ये दिखाया कि “फलां बच्ची दलित है” “एक दलित बच्ची के हाथों टूटेगा अनशन” “अन्ना की महान इच्छा”. कैसा शर्मनाक अक्षम्य कृत्य था ये और इस पर देश के बुद्धिजीवी आँखें मूंदे रहे. ये पूरा ड्रामा देखकर तो यही लगता है कि इस देश की आँखों में निम्न तबकों के लिए कोई इज्जत नहीं है.
People who felt like criticizing Pappu ji, do they really know him, or they just know what they were asked to know? Anna & his team went shameless when they used caste to protect themselves…
शायद कुछ लोगों को यह नहीं पता कि पप्पू जी और लालू जी का एक-दूसरे से २० सालों से ३६ का रिश्ता रहा है| जितना संघर्ष पप्पू यादव छात्र नौजवान और गरीबों के लिए लालू सहित अन्य सरकारों से कर चुके; ये लोग ७ बार जन्म लेकर भी पप्पू जी के लायक नहीं हो सकते|
जहाँ तक क्षेत्र और अन्य जगहों का सवाल है, इन्हें नहीं पता कि पप्पू जी ४ बार निर्दलीय सांसद और एक बार निर्दलीय विधायक रह चुके हैं| और बार पति-पत्नि दोनों साथ में सांसद रह चुके हैं| सामंतवादी और पूंजीवादी ताकतों के खिलाफ इनसे पहले इनके पूर्वज भी लड़ते आये हैं|
बेहूदा कमेंट्स लिखने वाले जैसे सैकड़ों लोग इनके यहाँ खुशी-खुशी काम करने को उतारू रहते हैं| सामंतवादी, पूंजीवादी और सरकार के बेमिसाल गठजोड़ के कारण वो आज जेल में हैं| क्या कमेन्ट करने वाले को यह याद नहीं आता कि हजारों-हज़ार नरसंहार और बलात्कार करने वाले ब्रह्मेश्वर मुखिया सरकार-पूंजीपति की मदद से बाहर घूम रहे हैं| तीन महीने तक लगातार नरसंहार करवाने वाला नरेन्द्र मोदी, गुजरात का गृह मंत्री सह, बाल ठाकरे, राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे ये लोग आपको दोषी नहीं लगते?
कृपया हजारों वर्षों से कत्लेआम करने वालों का इतिहास भी पढ़ लीजिए| पप्पू यादव को जानने के लिए उनके वेबसाइट को जरुर देखिये|
http://www.rajeshranjanpappuyadav.com/
दिनेश यादव का शव जब बिहार में उसके पैतृक गांव पहुंचा तो हजारों की भीड़ ने उसका स्वागत किया और उसकी मौत को ‘बेकार नहीं जाने देने’ का प्रण किया। लेकिन टीम अन्ना की बेरुखी कइयों के मन में सवालिया निशान छोड़ गई। सवाल था कि क्या उसकी जान यूं ही चली गई या उसके ‘बलिदान’ को किसी ने कोई महत्व भी दिया?
गौरतलब है कि सशक्त लोकपाल पर अन्ना हजारे के समर्थन में पिछले सप्ताह आत्मदाह करने वाले दिनेश यादव की सोमवार को मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक यादव ने सुबह लोक नायक अस्पताल में दम तोड़ दिया। यादव के परिवारजनों को उसका शव सौंप दिया गया था जो बिहार से दिल्ली पहुंचे थे।
पुलिस के मुताबिक यादव के परिवार वाले उसके अंतिम क्रिया के लिए पटना रवाना हो चुके हैं । उधर, कुछ मीडिया रिपोर्ट की मानें तो 32 वर्षीय यादव की मौत पिछले सप्ताह ही हो चुकी थी। हालांकि पुलिस ने इन रिपोर्ट से इनकार किया है। गौरतलब है कि 23 अगस्त को दिनेश ने राजघाट के पास अन्ना के समर्थन में नारे लगाते हुए खुद पर पेट्रोल छिड़क आग लगा ली थी। 70-80 प्रतिशत जल चुके दिनेश को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जाता है कि कुछ प्रत्यक्षदर्शियों से दिनेश ने आखिरी दिन पूछा था कि क्या उससे मिलने अन्ना की टीम से कोई आया था?
दिनेश यादव का शव जब पटना के निकट दुल्हन बाजार स्थित उनके गांव सर्फुदीनपुर पहुंचा तो पूरा गांव उमड़ पड़ा था। सब ने शपथ ली है.. इस मौत को जाया नहीं जाने देंगे। एक पत्रकार ने फेसबुक पर लिखा है, ”मुझे लगता है टीम अन्ना को इस नौजवान के परिवार की पूरी मदद करनी चाहिए। उनके घर जाकर उनके परिवारवालों से दुख-दर्द को बांटना चाहिए।”
दिनेश के परिवार के लोग बेहद गरीब और बीपीएल कार्ड धारक हैं। कई पत्रकारों का भी कहना है कि सहयोग के लिए अगर कोई फोरम बनेगा तो वे भी शामिल होने को तैयार हैं। दिनेश के तीन बच्चे हैं। उसकी पत्नी का रो रो कर बुरा हाल है और वह कई बार बेहोश हो चुकी है। उसके बाद परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है।
उधर अन्ना हज़ारे अनशन टूटने के तीसरे दिन भी गुड़गांव के फाइव स्टार अस्पताल मेदांता सिटी में स्वास्थ लाभ लेते रहे।
राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव को लेकर मुझे भी कुछ कहना है
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ज्ञान-सत्ता पर पिछड़ों की भी दावेदारी बहाल हो रही है यह देख जान कर लोग परेशां है .पप्पू यादव इस लिए विद्वान नहीं हो सकते क्योंकि वह यादव कुल में पैदा हुआ ? गुआरों को बुद्धि ? इन्हें साठ साल बाद भी ज्ञान नहीं होता.यह कहना तवादी -ब्राहमणवादी शक्तियों का सनातन संस्कार रहा है .हर मेहनतकश आवाम को गाली का पर्याय बनाने का काम इन्होने किया .सारी गालियाँ तो स्त्री ,दलित और पिछड़ों से ही बनती हैं .
कर्पूरी तो चोर और अपराधी नहीं थे, पर थे वे खलनायक इन यथास्थितिवादी शक्तियों के लिए ? पप्पू यादव के कथित अपराध से ज्यादा चिंता यह है की यादव लिखने कैसे लग गया ? कर्पूरिया, ललूआ ,रमविलसा,पपुआ यह अपमानजनक शब्द इन लोगों की जुबान पर रहा है . क्योंकि इनकी ज्ञान सत्ता ,अर्थ सत्ता और राजसत्ता के सामने चुनौती खड़ा किया ?
जहाँ तक पप्पू यादव के अपराध का मामला है उन्हें अपराध की सजा मिलनी ही चाहिए . सजा ,अपराध के अनुपात में हो .पंडितों ,सामंतों ने सदियों तक जो अपराध किया उन्हें सजा क्यों नहीं मिली ? सदियों के अत्याचार का प्रतिकार करना अगर अपराध है तो अपराध करना चाहिए .अगर पप्पू यादव ने सामंतों और जमींदारों के खिलाफ में लाठी उठाई और अपराधी घोषित हुए तो उन्हें भी अपने जीवन पर गर्व करना चाहिए और हमें भी गर्व है .शर्मसार उन्हें होना चाहिए जिसके पूर्वज गलत काम कर रहे थे .
कोई क़त्ल करें तो चर्चा नहीं होती ,हम आह भी भरते है तो हो जाते हैं बदनाम …..
पप्पू यादव को दूर से जनता था .उनका खौफनाक चेहरा जो परोसा गया था ,वही सामने था.पर जब निकट आया तो पाया की यह बंदा बाहुबली नहीं ,भावबली है .. इनका जीवन तो भावना और संबंधों की अभिव्यक्ति है .मैं इनके डेल्ही आवास पर गरीब- नवाजों के लिए चलने वाले भंडारे को देखा है .आवास हमेशा छोटा मोटा अस्पताल ही बना रहा …
मैं उन तमाम मित्रों से जानना चाहता हूँ की क्या पप्पू यादव ने किसी की झोपडी उजाड़ी ,किसी असहाय की जमीन लूटी ,किसी का पैसा लूटा ,किसी अकलियत को परेशां किया .किसी अबला की इज्जत लूटी ? अगर यह सच है तो हम भी चाहेंगे की उन्हें सजा मिले ?
अगर शोषक ,जमींदार ,जमाखोरों और जातिवादी सामंतवादी ताकतों के खिलाफ जेल क्या ,सूली भी मिल जाये तो पप्पू यादव को फक्र करना चाहिए
समाज सेवा का अंतिम सम्मान है तीन गोलियां जो मोहनदास को मिली थी .
.सच यही है की वर्तमान माहौल को देखकर पप्पू यादव का भी मन डोलने लगा है .लगता है उन्हें भी मीडिया का प्रमाणपत्र चाहिए की’ पप्पू यादव कितना महान है ? सोर्ट- कट या गणेश- परिक्रमा से समाज नहीं बदलता पप्पूजी ? मीडिया तो मनुवादी शक्तियों का आधुनिक ब्रह्माश्त्र है .दुश्मनों के हथियार से मत डरिये.. .अपने ही हथियार को धारदार बनाईये और आपका वह हथियार है वंचितों की लडाई लड़ना .
९० % ब्लॉग और नेट यूजर का टाइटल तो देखा करें ? क्या उम्मीद करते है की ये आपकी महानता का गीत गाएंगें ? अंगरेजों और बाबासाहेब को थैंक यु कहिये की पिछड़ा ,दलित भी लिखने -पढ़ने लगा है .कौन प्रिंट और टी वी वाला दिखाने और छापने के लिए बैठा है ? यह भी फेसबुक और न्यू मीडिया विदेशों की ही उपकार मानिये की आप भी बोल सकते हैं .पर यहाँ भी कौन आएगा रोटी रोजगार में फंसे कितनों को यह सुविधा नसीब है ? आगे और सोचना है आपको ? आपको तो कंप्यूटर का चूहा पकड़ने भी आ गया , पर जो चूहा पकड़ने और मार कर खाने को ही अभिशप्त है .उनकी जिन्दगी का क्या होगा पप्पूजी ? बस मशाल जलाएं रखें …दो कौड़ी की टिप्पणियों से नही घबराएँ ….जिन्दावाद
वन्दे मातरम और भारत माता की जय का नारा बजरंगी और विद्यार्थी परिषद् के लोग ज्यादा लगाते हैं .अन्ना -आन्दोलन की कथित सफलता को लेकर आज मोहन भागवत और सिंघल का बयान भी आ गया है की किस प्रकार उनके स्वयंसेवक ने अन्ना आन्दोलन में अपनी भूमिका निभायी ? ये स्वयंसेवक किस जात के ज्यादा होते है ,पता है . अन्ना का पप्पू यादव विरोध करेंगें तो यह एक बड़ा अपराध होगा ही ? राष्ट्र- विरोधी और राष्ट्र -द्रोही भी होंगें ? सबको पता है की संघ का राष्ट्रवाद और ब्राहमणवाद एक ही है और इस राष्ट्रवाद का जो विरोधी होगा, वह ब्राहमण- विरोधी भी स्वतः हो जायेगा. .स्वाभाविक है की मनुवादी-शक्तियां तिल्मिलायेगी . ?
अविनाश की तो पुरानी आदत रही है शांत तालाब में पत्थर फेंकने की .बेचारे पंडितजी चुपके -२ अपने पोथी-पुराण की धुल झाड़ कर प्रासंगिक बनाने और नए तरीके से चमकाने में लगे हैं तो अविनाश को क्या जरूरत पडी पप्पू यादव सरीखे लोगों का लेख मोहल्ला लाइव पर पोस्ट करने की ?
पप्पू यादव ने अन्ना – अनशन के लिए इश्तेमाल की गयी दलित -मुस्लिम बच्चियों पर सवाल उठाया, तो क्या गलत किया ?
बलात्कारी ब्रह्मा , भोगी इंद्र ,छलिया विष्णु जो दलितों की गाढी कमाई को मोहिनी बन लूट ले जाता हो, को भी इन पंडितों ने आदर्श बना दिया ? लीलावती- कलावती की कथा सुना सुना कर टैक्स वसूलता रहा हो, वो भला अपनी आदत से आखिर कैसे बाज आयेंगें ? अन्ना हजारे को भी भगवान बना देने में इनका अपना निहितार्थ है …?.
ये संघी जब आन्दोलन करते हैं तब इसी प्रकार के पाखंडों और प्रतीकों का सहारा लेते हैं .जैसे बूट पोलिश करना और सड़क पर झाड़ू लगाना .येसा कर ये यह साबित करना चाहते है की सरकार अगर उनकी मांग नहीं मानी तो यह घटिया काम भी कर सकते है .मतलब बूट पोलिश और झाड़ू लगाना आज भी उनकी नज़र में घाटियाँ है .कभी कभी चूड़ियाँ भी अफसर पर फेंकतें हैं क्योंकि औरत को कमजोरी का प्रतीक ही मानते है इनको अगर विरोध के लिए सड़क पर आना ही है तो अपना पोथी पुराण लेकर धरना पर बैठे .वही कथा वाचन भी करे . झाड़ू और बूट पोलिश क्यों ?.इनका आन्दोलन पाखंड से शुरू होकर पाखंड पर ख़तम होता है .
पप्पूजी ,अन्ना – आन्दोलन से आप बड़ी अपेक्षा क्यों कर ली ? यह पाखंड तो होना ही था .बस चलता तो इस ईद के दिन मुस्लिम भाई जो टोपी पहनते हैं उस पर भी अन्ना लिखबा देते ? और कहते की देखो मुस्लमान भी इनके साथ हैं ? बस पप्पू जी, आप ही बचे हैं टोपी पहनने के लिए ?
जन लोक पाल पार्टी बनने जा रही है और चुनाव भी लड़ रही है ? किरण वेदी का अपना जुगाड़ हो गया है . कल हो सकता है की आपको भी इस पार्टी से समझौता करना पड़े .राजनीति में कोई स्थाई दोस्त और दुश्मन नहीं होता .थोडा स्पेस ले के तो चलिए ? हाँ जन लोक पाल पार्टी बिहार भी आ रही है .आप क्यों दलित पिछड़ा की बात उठाते रहते हैं ? इस महाअनशन के लिए भी दलितों की जरूरत पडी अन्ना को ? सभी पार्टियाँ दलितों को वोट बैंक की तरह इश्तेमाल किया तो जन लोक पाल पार्टी ने दलित कार्ड खेल ही लिया तो आप क्यों परेशां हो रहे हैं पप्पूजी ? वह दोनों दलित मुस्लिम बच्ची कपिल सिब्बल के चुनाव क्षेत्र से आती है जहाँ से किरण वेदी को भी चुनाव लड़ना है .यह सब आप जानते हुए क्यों विरोध का झंडा उठाये हुए हैं .बक्श दीजिये हूजूर ? हो सकता है की ये जयकारा पार्टी आपके क्षेत्र में जाकर भी जयकार कर दे तो क्या आप मना करेंगें ? .क्या वोट के बढ़ने की चिंता आपको नहीं होगी ? आओ अनशन -अनशन खेलें ‘ का नाटक देखें ,.ताली बजाएं .भावुक क्यों हुए जा रहे है आप पप्पू भाई ?
Are koi v kuch v kahe bt koi ye nahi soch raha hai ki kuch v ho bt itni gandi bate educated log kaise bol sakte hai,chahe koi v ho o Pappu yadav ho ya Anna hajare ki team hi keyon naa ho,bt itni cheap baten nahi bolni chahiey or Dalit or garib ,in sabhi ki bich me fark karne wale khud kitne cheap hote hai…in sab se aage we are an INDIAN hai…
Its true that media is responsible for making or ruining people’s belief & this is what happened with the masses when Anna went on hunger strike as the forces working behind the veil had already managed the media. Who cares to know the details? U were also projected as a villain when u raised voice for the oppressed. And the result is in front of us. I’m glad that u didn’t quit even after suffering so much pain. Keep it up! We all r with u!
आप जनता के लिए संघर्ष करते रहिये! भैया, हम सभी आपके साथ हैं!
They say dat politicians use caste factor to build their vote bank, so what is team Anna is doing? Before being picked up for the purpose, their caste/religion must hv been askd. So dat later this could b broadcasted or projected dat team Anna is a dalit & muslim lover.Perhaps RSS or BJP has planned to launch the team Anna members in the upcoming 2014 Loksabha Polls.
आप अन्ना जी से कह रहे हैं कि उन्हें गरीब, अल्पसंख्यक, बेरोजगार, शोषित और कमजोर के लिए आंदोलन करना चाहिए…? आपको लगता है कि अन्ना जी बेवकूफ हैं…? इनके लिए आंदोलन करने का खर्चा उन्हें कौन देगा? फ्री में अन्ना जी फालतू काम नहीं करते| इनकी उम्मीद तो आप जैसे कुछ मानस हैं| क्रांति की अलख जगाए रखिये!
Winner never quits,
& quitter never wins!
Bhai log in netan ji pe tka tipani karne se kya fayada, e khud convicted
criminal hai. inki tulna anna j kyon ki jaye, anna ji & unki team kek bare me kabhi kaha jata hai ki e samprdayik mansikta ke log hai kyonki inke team me dalit muslim nai hai agar inke samudaye ke bachon ke hath ansan tudawake unhone jata diya hai unke lie jati aur dharm koi mayene nai rakhata hai in tika tipnikarne walon ko e malum hona chahie ki vahan par har roj roja khulwane ke lie muslman bhaiyon ke lie parbandh kiya jata tha
in tatha kathit budhijivi ke bare me kuch kahana samay barbad karna hoga
jai hind jai bharat
पप्पू भाई ! हम आपकी बात से सत प्रतिशत सहमत हूँ ……….. कि जो लोग इस देस के लोगो के साथ पोलिटिक्स करते है वो तो जात धर्म का इस्तमाल करते ही है लेकिन जो इस देश की पोलिटिक्स को सुधारना चाहते है वो भी उसी ढ़र्रे पर आ जाये तो दल में जरुर कुछ काला है …………….
आपका अश्विनी
मेरे एक सीनियर ने फेसबुक पर आज एक बड़ी विचित्र बात की. मुझे नहीं पता था कि लोग इतना नीचे गिरकर भी सोच सकते हैं. उसका कहना था कि आरक्षण के कारण देश में भ्रष्टाचार बढ़ा है.नीची जाति के लोग जब आरक्षण पाकर अचानक ऊपर पहुँच जाते हैं तो वे अपनी जेबे और घर भरने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं. खैर जवाब में मैंने उन्हें हफ्ते भर की ‘इनकम टैक्स छापों’ और ‘आय से अधिक संपत्ति’ के मामले में फंसे अधिकारियों कर्मचारियों के विवरण की समाचार कटिंग देकर उनका मुह बंद करवा दिया और उनसे कहा कि सबके सरनेम देखकर सांख्यिकीय आंकड़ा तैयार कर लीजिये और देखिये इसमें रिज़र्व्ड कैटेगरी के कितने हैं,जनरल कितने हैं. एक का मुंह तो मैंने बंद करवा दिया पर आप लोग इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि लोगों की जातिवादी मानसिकता कितनी गहरी है. आप सभी से भी अनुरोध है कि इस तरह के आंकड़े रखना शुरू कर दीजिये क्योंकि इस तरह के आरोप भी इस आन्दोलन के बाद लगने शुरू होने की संभावना है.
AGAR MUSLIM AUR DALIT KO NA SHAMIL KARO, TO USME BHI SAMPRADAYIKTAA KA AAROP LAGAYENGE AUR AGAR SHAMIL KAROGE TO KAHENGE- SIYASAT KAR RAHE HAI…. YANI PAPPU YADAV AUR AISE ANEK AALOCHAK KHUD APNI SIYASAT KARNA NAHI CHODENGE….IS SE ACHCHA HAI KI
DEKHIYE , BAHUT HUA.. HAME INDIA KI YE JHOOTI EKTA(UNITY) BARDAST NAHI HO RAHI HAI… INDIA KA BATWAARAA KAR DIYA JAYE- MUSLIMO KE LIYE EK AUR DESH, DALITO KE LIYE ALAG DESH….BACKWARD KE LIYE ALAG DESH…FORWARD KE LIYE ALAG DESH…. BATWAARAA KAR HI DIYA JAYE AB.
KOI BHI SAMUDAY INDIA ME KISI BHI SAMUDAY KO , KISI BHI MUDDE PAR LAABH LETE HUE DEKHNA NAHI CHAHTA HAI…. SARE SAMUDAY , SARE WARG ,, SARI RAJNITIK , SAMAJIK PARTI EK DUSRE SE JALTE HAI….
पप्पू यादव के नाम से “मशहूर” या “कुख्यात”???? मानो देशभक्ति के जुर्म में जेल गए हों…!!!!
हां…जेल डायरी….किताब आएगी…एक अपराधी की जेल डायरी……
Even after the law was formulated for reservation $ after the orders of Apex Court, ppl continued debating on reservation. Later came the issue of creamy layer. We express it in one way or another, like the way we are doing here. There is a possibility that this would further be amended in the future. And ppl like Pappu ji who fight for the oppressed would continuously b criticised by the capitalist & so called brahmins…
बच्चों को दलित और मुस्लिम कहना बिल्कुल गलत है| लेकिन इसमें बेचारे अन्ना जी कि क्या गलाती है? वे तो शतरंज के विसात पर मात्र एक मोहरे हैं| उनकी अपनी कोई मर्जी नहीं चलती है| और पप्पू जी आप इस बात से भाली-भांति वाकिफ होंगे कि अन्ना के माध्यम से ये सब कौन करवा रहा है और कौन देश के युवाओं को पथभ्रष्ट कर रहा है|
सियासत के खेल भी अनोखा है; पर यह अन्ना जैसी सक्सियत जिन्हें संत के रूप में प्रस्तुत किया गया हो, उनसे ऐसी उम्मीद कदापि नहीं थी| धर्म और जात की समस्या ने हमारे देश और समाज को खोखला बना दिया है|
आज समाज धर्म या जाति के भंवर में ऐसा फंसा हुआ है कि उचित-अनुचित की सुध-बुध ही खो सी गयी है!
किस जाति का है वो सूरज
जो रोज सबेरा करता है
किस जाति की है वो चंदा
हर रात उजाला करती हैं
क्या है बोलो उस हवा की जाति
जीव प्राण की रक्षा करती हैं
किस जाति की हैं वो नदियाँ
हरियाली के लिए नित बहती हैं
किस जाति के हैं सुमन वो
खिल बगिया मन हर लेते हैं
क्या है बोलो उस वृक्ष की जाति
फल चाहे बिना फल देते हैं
क्या जाति से है तुम बोलो
इन सबकी अपनी पहचान
जाति नहीं, समर्पण है जो
बनाता है इन सब को महान
जाति से हैं बड़ी योग्यता
उस क्षमता को तुम पहचानो
ना बांटों ब्रह्माण, वैश्य, दलित में
इन्सां को बस इन्सां मानो
इसे कहते हैं सौ सौ chuhe खाकर बिल्ली हज को chali. पप्पू की बुरे सुनकर उसका थूक चाट कर अपने आप को धन्य समझाने वाले जंतु उसकी हकीक़त को नहीं पचा pa रहे हैं. अपने gundai से पप्पू विधायक संसद तो क्या मुख्या मंत्री भी बन जाये तो गुंडा-मवाली को गुंडा ही बोलेंगे. अपने आप को पप्पू के चमचे बताकर गौरवान्वित महसूस करने वालों, पूछो की पप्पू ne किस-किस का घर उजाडा है… किस-किस की अस्मत लुटी या लूट्वाई है.. iske अपराधों की मंजिल जेल तो कभी भी नहीं हो सकती है… ise या तो बिहार की जनता ही सबक sikha सकती है या खुदा ही.. कागजों par अच्छे सब्दों को सजा देने से पप्पू कभी साधू नहीं बन जायेगा.. दलितों और मुस्लिमों के वोटों को चुराकर अपने आप को दलित-मुस्लिमों का pratinidhi नहीं बता सकता. बाकी बिहार में किस tarah से चुनाव होते हैं… किस tarike से neta jeetate हैं … pure desh से छुपा नहीं है…
गीतांजली जी! विश्वास नहीं होता कि आप जैसे भी कुछ लोग इस धरती पर बचे हैं| आपको पता भी है कि जिनके लिए आपने इतने अच्छे शब्दों का इस्तेमाल किया है वे हैं कौन? आप जानते भी हैं पप्पू यादव को? मुझे शर्म आ रही इस बात का अहसास करते हुये कि मैं और आप इसी समाज के हैं|
पप्पू यादव पर आज तक सिर्फ एक ही कलंक लगाया गया है| सब जानते हैं कि वह कलंक क्या है| जिसका कलंक लगा, उसके परिवार वालों से पूछिए! आज भी उस परिवार के दिल में पप्पू जी के लिए इज्जत है| क्योंकि वो भी जानते हैं कि पप्पू जी और उनके परिवार को सियासी विसात का मोहरा बनाया गया था|
आप जैसे लोगों के कारण ही हमारे समाज में ऐसे अनेकों पाप फल-फूल रहे हैं, जिनका बिना मानसिकता बदले कोई ईलाज नहीं है| उम्मीद करता हूँ कि अगली बार अप्प कुछ बोलने से पहले उसके बारे में समस्त जानकारी जरुर रखेंगी|
ये गीतांजली है कौन? साली कामिनी, तेरे जैसे लोग चूहे खाकर हज करते होंगे| तेरे जैसे लोगों के कारण ही भ्रष्टाचार बढा है| डूब के मर जाय नीच! गीतांजली, नाम तो देखो कितना अच्छा रखा है, और बातें देखो इसकी! सेक्सुअल भ्रष्टाचार बढ़ाने में तेरा हाथ जरुर होगा| डूब मर जा के! दूबारा अपनी चोंच मत खोलना कामिनी!
Sahil bhai, aise logon ko gali de ke apna muh kyon kharab kar rahe ho? Marne do inko! Iske kahne se kya hota hai? Gareebon aur jaruratmandon se puchho Pappu Yadav ke baare me!
देश में एक बयार सी बही और सब उसमे बह निकले, किसी ने यह जानने की जहमत नहीं उठाई की पूरा माजरा क्या है| आवाम को सोंचना चाहिए था कि भ्रष्टाचार कभी नहीं मिटने वाला कलंक है और यह सच्चाई है, इसे नकार कर हम स्वयं को बेवकूफ बनायेंगे| इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है लेकिन कानून या अन्ना के लोकपाल से कैसे संभव है, इसके लिए हमें अपने बीमार मानसिकता से मुक्ति पाना होगा, तभी भ्रष्टाचार पर काबू पाया जा सकता है|
बिना कुछ सोंचे, विचारे सब इस अंधी में भ गए और उसके बाद एक के बाद एक तमाशा| बच्चों तक को नहीं बख्शा इन लोगों ने| किसी बुद्धिजीवी ने बोलने का साहस नहीं किया| एक अरुंधती ने बोला भी सब उसी के पीछे पड़ गए| आपने परवाह किये बगैर अपने विचार हमारा बीच रखा है, यह सराहनीय है|
Aap bhi ajib baat karte hain. Agar brhmin ya kisi dusare unchi jaat ke bachhe se anshan turwate to aap sampradayikta ka arop lagate aur dalit/muslim bachhe ko chuna to aap kahne lage siyasat ho rahi hai. Akhir aap log chahte kya hain?
इतने सारे सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के विचार जो हाल ही में मोहल्ला में प्रकाशित हुए हैं,को पढ़कर एक उम्मीद जागी है कि देश की जनसँख्या का एक महत्त्वपूर्ण भाग इस अराजक आन्दोलन के विपक्ष में है.
और जो पक्ष में हैं वो भी धीरे धीरे इस तथाकथित आन्दोलन की सच्चाई भांपकर इससे विमुख हो रहे हैं.
The above comment of mine was meant for Dr.Lenin’s article.
wah papuu camcho ki fooj yaha bhi pal rakhi hai , tumhare bihar mai yadav hi chunav jitne ki kabliyat hoti hai ye ham sabko maloom hai or sare yadavo ka sardar ‘lalu’ jo janta ese kartoon ko cunti hai usse kya aakal ki uumeed ho sakti hai, aooo ro logo ko lagliya do blog pe bhi’ or es gatiya systeem ke maje looto, wote ki takat ke sadke ‘ or loktantra ko randi bana kar nachane walo apna gireban bhi dekho, ye pappu kaise yaha pahucha , kyo ados pdos pe ahsan kar ke , jail mai rah kar chunav jitta hai, kyo ki es bajar mai ese hi satta ke dalal entry pa sakte hai, pappu jaise es desh mai kitne hi hajar neta hai, jo rat din bhale dikhane ke waste kaise hi jatan kar sakte hai….. par aanna koi paida nahi ho saka dusra, kyo ??????….. anna ki jarurat pad gai desh ko socho….? aaj gandhi bhi hote to ye neta uska bhi ejjat nilam karwa dete… hame pata hai ki team anna ki samat aane wali hai,….maine pahli bar anna ke ssath jan, gan.man, dilse gaya apne gar se gaya , us ke pahle kabhi nahi.. kyo ki pahli bar desh – apne desh jaisa laga, anna to bahana tha sadko par janta thi, koi camcho ko fooj nhi, kisi ke ahsan chukane wale log nahi ham un dino aajad the, fakat 12 dino ke liye…..dil se
ये हेमंत बाबू, अरे कहाँ-कहाँ से आप लोग चले आते हैं? ना हिन्दी लिखना आता हैं और ना ही अंग्रेजी और कमेन्ट तो ऐसे कर देते हो जैसे कि भीमराव अम्बेडकर के बाद तुम्हारा ही जन्म हुआ था| आप जैसे महापुरुष के कारण ही अंग्रेज हम पर २०० साल शासन किये| वो तो अच्छा हुआ कि उस ज़माने में पप्पू जी जैसे योद्धा थे नहीं तो आज तुम जैसे लोग अग्रेजों के तलवे चाटते रहते और नदियाँ हमारी खून की बहतीं रहतीं| अंग्रेज तो चले गए लेकिन तेरे को इधर ही छोड़ गए| तू भी उधर ही कहीं निकल ले!
Yahan discussion kis baat par ho rahi hai? Aur itna bakwas lekh maine aaj tak nahin padha, ye Anna ji par nahin balki desh par chot hai.
Pappu ji bhrashtachar ke khilaf ladai me apko hamare sath hona chahiye tha, aap ham log ka virodh karne lage. Anna ka virodh, janta ka virodh hai.
Hamen apse aisi ummid nahin thi, bahut suna tha apke baare me.
कल की बात और थी| कल और आज में ज़मीन आसमान का फर्क है| कल तक लोग अंधे थे, (आँख तो अभी भी नही खुली है) लेकिन फिर भी काफी हद तक लोग सच्चाई से वाकिफ हो गए हैं|
अन्ना के पीछे किन ताक़तों का हाथ है, यह किसी से नहीं छुपा है| उनका उद्देश्य सिर्फ लोगों को बरगला कर अपना स्वार्थ साधना ही है| कोई न कोई दावं लगाकर ये लोग देश में बहुमत चाहते हैं, इसीलिए अन्ना को ढाल बनाकर इन्होंने देश के लोकतंत्र पर हमला किया है|
Team Anna ke log es baar chunav lar rahe hain sir…
Anna ji par comment karne se pahle apne gireban me jhanko! Anna ne desh ke liye kuchh to kiya lekin apne kya kiya?
पहले अन्ना जी को हम सभी प्रतीक, आदर्श और ना जाने क्या-क्या समझते थे, लेकिन अब उनको बेचारा कहने को दिल चाहता है|
जब पहली बार उन्होंने अनशन किया था तो सभी ने समर्थन किया था और कोई विवाद नही था, लेकिन इस बार सभी से तो नही लेकिन कईयों से समर्थन करवाया गया और उसके बाद विवाद ही विवाद| अन्ना तो वही हैं, टीम भी लगभग वही है; लेकिन बाकी कुछ भी पहले जैसा नहीं है|
मीडिया बिक गई तो क्या हुआ, कोई पहली बार थोरे ना हुआ, भाजपा, आर.एस.एस, विहिप आदि के पैसा था, जालसाज तो ये लोग पहले से ही थे, बस अन्ना मिल गया बलि का बकरा और कर दिया वार| धन्य हो अन्ना जी! धन्य हो सांसद!
You are right sir… This Anna is different. Our Anna has been replaced by the Anna of RSS,VHP and BJP.
Thik kah rahe ho Ramesh bhai ye Anna garibon ke Anna nahi hain, ye to 7star hospital me ilaj karwane wala ameero ka Anna hai. Inki tulna log Gandhi ji se kar rahe the… Gandhi ji kya anshan ke baad 7star hospital me ilaj karwate the..?? Ye ab wo Anna nahi rahe…
Anna jaise devta par keechar uchhalne se pahle khud ko dekho kitne bhrasht ho tum sabke sabhi…
Anna has insulted the Prime Minister of India by questioning Manmohan Singh’s right to hoist the flag at Red Fort on August 15, and with his remarks has also insulted the Indian flag and freedom fighters who sacrified their lives to the country.
Anna has no moral right to fast against corruption as he himself faces charges of graft
Any mere support is just like a drama. Just a fruitless activity. Just a mirage. Just imagine. A leader always needs a warrior who has the same intensity he has. He needs the warrior to help him to complete the battle. And if leader finds someone who just goes by words and decorates himself with useless love for the nation, the leader equally becomes a fool at the end of the day, preparing him for a big fight; under an illusionary support. Find a leader inside you before you support another leader. The leader needs nothing more than that. Until then the leader is the biggest fool.
Anna is the biggest fool…
अन्ना हजारे द्वारा चलाये जा रहे इस तथाकथित राष्ट्रव्यापी आन्दोलन में उनकी टीम में जो लोग हैं उन्हें इस देश के कितने लोग जानते हैं? मेरा मानना है कि वे सभी उतना ही जानते हैं जितना समाचारपत्र या टीवी पर दिखाए जाते हैं या दिखाए गए हैं। दुर्भाग्य यह है कि आज समाचार पत्र या टीवी में जो भी संवाददाता इस ‘पुनीत’ कार्य में अपना सहयोग देकर देश के चप्पे-चप्पे में अन्ना और उनकी टीम की आवाज को बुलंद करने का ‘अथक प्रयास’ कर रहे है वे स्वयं इस बात से अनभिज्ञ हैं कि इन टीम मेम्बरानों की असली पहचान क्या है और वह कौन सी ताक़त है जो इनके पीछे खड़ी है?
अरविन्द केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने दो दिनों पहले साफ़ और स्पष्ट जबाब देते हुए लोकपाल बिल के दायरे में गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) को भी शामिल किए जाने की मांग को एक झटके में ख़ारिज कर दिया था। साथ ही, अन्ना की इस टीम के मेम्बरान ने विशेषकर जो NGO सरकार से पैसा नहीं लेते हैं उनको किसी भी कीमत में शामिल नहीं करने का एलान भी किया। क्यों भाई?
कुछ साल पूर्व जब लोगों को लोकपाल का नामों निशान तक याद नहीं था और सूचना अधिकार अधिनियम भी लोगों के बीच उतना ‘उत्तेजक’ नहीं बना था, अरविन्द केजरीवाल ने अपने एक संबंधी (जो उन दिनों ऑल इंडिया रेडियो में शीर्षस्थ पदाधिकारी थे और बाद में नेहरु संग्रहालय के अधिकारी बने) के पद का भरपूर लाभ उठाकर ‘प्राप्त सूचनाओं’ से खुद को और अपनी संस्था की नींव को मजबूत किया. उन दिनों अन्ना हजारे भी इतने ‘सक्रिय’ नहीं थे।
अन्ना को तो बस ये जमूरे बेवकूफ बनाकर अपना स्वार्थ साध रहे हैं|
Anna Hazare was propped up as the saint of the masses, he was not the driver of the movement.The anti-corruption movement, is actually an agenda of multi-national corporations to increase the penetration of international capital in India.Kabir, run by Arvind Kejriwal and Manish Sisodia, key figures in Team Anna, has received $400,000 from the Ford Foundation in the last three years.
There are serious concerns over the Jan Lokpal Bill because it does not talk about corporate corruption or how NGOs and corporations are taking over the traditional role of the government.
Anna Hazare’s stated enemy was corruption. It did not matter to him where the corruption was occurring or which party/organisation/ministry/department/state was corrupt.
By now, we had a belligerent Team Anna – their belligerence forgiven because they fought for you, sought nothing from you. Team Anna did nothing brilliant — except the choice of the cause. The Congress did everything to lose this battle.
Team Anna must be thinking, with an enemy like this, who needs friends?
अन्ना हजारे ‘ब्लैकमेल’ करने की कोशिश कर रहे हैं जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।’
अन्ना देश को टुकरों में बांटना चाहते हैं, उनका रवैया देशहित में सही नहीं है|
अरे तुम लोग थोड़ा तो शर्म करो, अन्ना जो हमारे लिए इतना कुछ किये, इतना कष्ट झेला उसे पूजने के बजाये निंदा कर रहे हो| आज घर-घर में अन्ना की पूजा हो रही है, उन्होंने एक उम्मीद जगाया है हमारे भीतर|
अन्ना ने क्या किया यह तो जरुर सबको दिखा लेकिन अन्ना से क्या और कैसे-कैसे करवाया गया, यह तो या आपको नहीं दिखा या पागलपन, अंधी आस्था, बेतुकी श्रधा में आपको नहीं दिखा|
अब छुपाने को रह ही क्या गया? जगजाहिर है सब कुछ| अन्ना को तो इस महायुद्ध में अभिमन्यु से भी बुरी तरह से घसीटा गया है| कल तक अन्ना या उसके जमूरों को जनता ही कौन था| पूंजीपतियों, मीडिया और देश के चरमपंथी संगठनों ने उनके जमूरों को इस्तेमाल किया और मदारी बनकर देश की जनता को नट का खेल दिखाया|
जिसे आपने सराहा और समर्थन दिया आंख मुंड कर… आंख क्या बंद करेगी जनता? जनता तो जन्मांध ही है| वही देखती है जो लोग दिखाना चाहते हैं, चंद दिनों की बात है जनाब.. इन लोगों का काम खत्म और लोग अन्ना को दूध के मक्खी की तरह निकाल फेकेंगे… और इन्तेजार करेंगे नए मसिफा की जिसके आड़ में अपनी भड़ास निकल सकें|
Samjhna kya hai Anna ko bewakuf banaya ja raha hai…
इतना बकवास लेख मोहल्ला लाइव पर आता कैसे है?
आन्दोलन का व्यक्ति केन्द्रित होना इसकी खूबी नहीं कमजोरी थी |आपातकाल में देवकांत बरुआ द्वारा इंदिरा जी की चापलूसी में कहे गए वे शब्द( इंदिरा इज इंडिया ) नए स्वरूप में दोहराए गए | संसद में जन लोकपाल के मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय सभी को इस बात की चिंता थी की अन्ना का अनशन कैसे ख़त्म किया जाय | जिन आर्थिक नीतियों के चलते हजारो किसान आत्महत्या कर रहे है,घोटालो की बाढ़ आ गई है, गैर बराबरी बढ़ी है,शिक्षा और स्वास्थ्य की दुकाने खुल गई है इस पर किसी ने कुछ कहना उचित नहीं समझा | आन्दोलन के दौर में जनता और कार्यकर्ताओ को शिक्षित करने के प्रयास होना चाहिए थे |
रामलीला मैदान में समर्थन देने आये जातीय संगठनो के बेनर हमने टी वी पर देखे |,आरक्षण के विरोध में नारे भी हमने टी वी पर सुने | कई बाबाओ को मंच पर देखा ,अभिनेताओ को देखा |सरकार की सद्बुध्दि के लिए रामलीला मैदान में हवन होते हुए देखा | हद तो जब हो गई तब आपके सहयोगी सिसोदिया जी ने पत्रकारों को बताया कि जेल कि जिस बैरक में अन्ना ठहरे थे वहाँ कैदी और जेल कर्मचारी आकर सर झुका रहे है | वो जगह तीर्थ बन गई है | आपको याद होगा कि जे पी आन्दोलन में हर तरह के अन्धविश्वास का विरोध किया गया था | वर्ण व्यवस्था के प्रतीक जनेऊ तोड़कर कई युवको ने अपने नाम से जाति सूचक शब्दों तक को हटा दिया था | गाँधी जी ने धार्मिक होते हुए भी कई अंध विश्वासों का विरोध किया था इसलिए उन्हें सनातनी हिन्दुओ का विरोध सहना पड़ा |
रामलीला मैदान में समर्थन देने आये जातीय संगठनो के बेनर हमने टी वी पर देखे |,आरक्षण के विरोध में नारे भी हमने टी वी पर सुने | कई बाबाओ को मंच पर देखा ,अभिनेताओ को देखा |सरकार की सद्बुध्दि के लिए रामलीला मैदान में हवन होते हुए देखा | हद तो जब हो गई तब आपके सहयोगी सिसोदिया जी ने पत्रकारों को बताया कि जेल कि जिस बैरक में अन्ना ठहरे थे वहाँ कैदी और जेल कर्मचारी आकर सर झुका रहे है | वो जगह तीर्थ बन गई है | आपको याद होगा कि जे पी आन्दोलन में हर तरह के अन्धविश्वास का विरोध किया गया था | वर्ण व्यवस्था के प्रतीक जनेऊ तोड़कर कई युवको ने अपने नाम से जाति सूचक शब्दों तक को हटा दिया था | गाँधी जी ने धार्मिक होते हुए भी कई अंध विश्वासों का विरोध किया था इसलिए उन्हें सनातनी हिन्दुओ का विरोध सहना पड़ा |
Rahne dijiye Pappu ji, sabko malum hai ki siyasat kaun kar raha hai..!
BJP’s gain is temporary. Here’s why. The BJP is gaining from an anti-Congress wave, not from a pro-BJP one. The anti-Congress wave is because the party is seen to be corrupt. The absurd charges – in terms of the sizes of the scams – have obviously stuck in the minds of the people. Right now, people want the Congress out. But give it a few months and the tide will change. Because the BJP has so many problems of its own. After Karnataka, there are two other states on the boil. The BJP is in deep trouble in MP – now that CBI has taken over the investigation of the Shehla Masood (RTI activist who was shot dead) case. There is a direct involvement of the BJP in this case (By the way, has anyone asked why the CBI – accused by the BJP of being called the Congress Bureau of Investigation – was called in by the BJP state government itself?!). Then there is the case of Gujarat – where the BJP may win a temporary reprieve by ousting the Lok Ayukta appointed by the Governor – where the perception of corruption is growing stronger against Modi. Why is Modi afraid of this Lok Ayukta? After all, he has had a good reputation as the Chief Justice of Gujarat in the past. The future will also see the BJP getting involved in the CWG games scam (where it runs the MCD which was responsible for several large projects) and the 2G scam (where early NDA telecom ministers have also violated the policy). If the BJP is hoping to make a long lasting proposition of being a clean party, it will have to do a lot of image building. Right now, the gains can only be temporary. No one believes the BJP is cleaner than the Congress.
अन्ना क्या पोलिटिक्स करेंगे उनसे तो करवाया जा रहा है, सुनने में आया है कि चुनाव क्षेत्रों का दौरा भी कर रहे हैं!
Sirf siyasat hi nahi, team Anna 2014 ka Loksabha chunav bhi larne ke tiyari me hai… Apni to ye apna field bana rahe hain.
Rahne dijiye Sir! Es Anna kee burai ya charcha bhi nahi karni chahiye. Ye kya itna important ho gaya jo isi ko dekhe, ye to bechara kathputli hai.
Aap bh to dalit aur muslim ki rajniti karte hain… Aap kaise bolne lage?
अरे सलोचना जी! कैसे हैं? आपको मुंह खोलने की पुरानी आदत है| कौन सी रात आपकी किसके साथ बीतेगी, आपको भी नहीं मालूम होगा| बकवास तो देखो कैसे कर रही है|
एकदम सही बात कहे हैं| अन्ना राजनीती पर उतर आया है|
Anna is not fighting against corruption but doing politics.
Who gave him (Hazare) the right to burn copies of the bill which has been tabled in Parliament? Was this constitutional? The thing is that he is not fighting against corruption but doing politics.
In one news channel i heard he (Anna) was saying “kapil sibbal kabill nahi hai, agar wo kabill hota to mera lokpal bill accept karta”. He forgot to give respect to PM also. He is saying that this is doosra SATYAGRAH, he should not compare his act with Satyagraha. this shows that ihe he just want media attention.
In one press conference Kiran Bedi and Prashant Bhushan went as far as launching a personalised attack on the prime minister, with Bedi mimicking the PM. I know he is frustrated because govement is not ready to present only their version of the Lokpal Bill in parliament.
“A physician adds years to life while a physiotherapist adds life to years”
हर जगह एक ही चर्चा है कि प्रधानमंत्री कौन? अटकलें लगायी जा रही हैं कि २०१४ में राहुल का टक्कर मोदी से होगा| भगवान ना करे कि इन दोनों में से कोई प्रधानमंत्री बने| दोनों ही स्वार्थी हैं|
एक अंग्रेज का बच्चा और दूसरा आतंकवादी| ऐसे प्रधानमंत्री होंगे तो देश तो गया| अच्छा हुआ जो अन्ना जैसे संत राजनीती में आ गए| २०१४ का चुनाव टीम अन्ना जरुर लड़ेगी और अन्ना हजारे हमारे प्रधानमंत्री होंगे|
अन्ना हजारे जिंदाबाद!
अन्ना ने पहले कांग्रेस को टोपी पहनाया और अगर देश की बदकिस्मती से और गलती से प्रधानमंत्री बन गया तो देश को टोपी पहना देगा|
Anna anshan par baith ke sarkar ko 2-4 baat kya bol diya khud ko pradhanmantri samjhne laga.. muh ke bal girega beta tab samjh me aayega… abhi tak to RSS aur BJP ke isharo pe naach raha tha.. Ye log apne logo ke kabhi huye hi nahi tere kya honge?
Tom log kitna bhi drama kar lo, Anna nahi jhukne wale hain….
Anna ki siyasat ko mariye goli…. Yahan Nitish roj naya-naya raas racha rahe hain, ihe dekhne wala koi hai ya nahi… Sabki awaz dabana chah rahe hain ye.. media to pahle se hi inke hathon biki huyi hai…
Anna ki siyasat ko mariye goli…. Yahan Nitish roj naya-naya raas racha rahe hain, inhe dekhne wala koi hai ya nahi… Sabki awaz dabana chah rahe hain ye.. media to pahle se hi inke hathon biki huyi hai…
नीतिश का जो लंगोटिया है सुशिल मोदी, बड़ी ऊँची चीज़ है| साला पहले पटना में कंप्यूटर कोचिंग चलाता था और आज बिहार चला रहा है| इससे बड़ा भ्रष्ट सियासत करने वाला कोई नहीं मिलेगा|
एक से एक कुकर्म किये एस कमीने ने और सरकार में रहने के कारण बचता गया| इतना धूर्त बिहार की धरती पर ना कोई पैदा हुआ और ना ही कोई पैदा होगा| इसकी माँ भी इसको पैदा करने पर पछता रही होगी|
Ye Pappu Yadav Bihar ka bahut bara DON hai… dekho to sharif kaise ban raha hai…
भाई साहेब! बाबू नितीश ने बिहार में शोषण की नई इबादत लिख दी है| कुछ करना होगा|
Tum log shoshan ki baat mat karo… tum jaise log hi shoshan karte hain…
ये सियासत भी अज़ीब चीज़ है| इससे कठिन और उलझा हुआ कोई खेल नहीं| कुछ भी यहाँ सुनिश्चित नहीं और किसी को आगोश में ले लेती है| संत जैसे अन्ना भी इसकी चपेट में आ गए और कोई लाख कुछ भी कहे लेकिन अन्ना के दामन पर भी दाग लग चुके हैं|
Whatever u said is absolutely right… This Anna is really doing politics.. this idiot has also got invitation from Pakistan..
Team Anna pagal ho gayi hai.. Udhar wo Prashant Bhushan bolta hai ki Kashmir se sena hatao… abe Kashmir se sena hata to Pakistani Delhi tak pahunch jayenge…. Bal Thackrey ne bhi inhe pagal bola hai.
ये अन्ना इतने से ही संतुष्ट नहीं होने जा रहा है| घूम-घूम के प्रचार करवा रहा है| अभी बिहार के कई भागों में हुड्की मार रहा है| स्टैंडिंग कमिटी के सदस्यों के क्षेत्रों में जाकर ड्रामा शुरू किया है इसने|
रोज-रोज रविवार नहीं होता| सबको समझ में आ गया है| अब इस अन्ना या मोदी के ड्रामे को देश समझने लगा है| अब इन नौटंकियों का खेल देखने कोई नहीं आ रहा है|
अरे भाइयों! सियासत तो भाजपा, विहिप और आर.एस.एस. वाले कर रहे हैं… गन्दी राजनीती पर उतर आये हैं| पहले देश में जगह पर हिन्दुवाद के नाम पर दंगा फसाद करवाया और करवा रहे हैं| उसके बाद अन्ना को मुर्गा बनाके लोकपाल-लोकपाल का खेल खेला|
और अब लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र सोशल नेटवर्किंग साइटस (फेसबुक, ट्विट्टर आदि)और लोगों के मोबाइल पर कांग्रेस का दुष्प्रचार कर रहे हैं, जिसमे रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है|
असलियत में सियासत अन्ना नहीं कर रहे, बल्कि उनके आड़ में ये कट्टरपंथी आतंकवादी सियासत कर रहे हैं| देश को इनसे सतर्क रहने की आवश्यकता है|
anna ke virodh ka matlab un muddo ka virodh hai jo unhone uthaye hain.
agar aap bhrishtachar ka virodh nhi karte to aap khud bhristachari ho…
ye baat ANNA ke samarthan ki nhi hai, BHRISTACHAR ke virodh ki hai.
shri rajesh ranjan ji, badi lambi chuppi ho gayee! apna lab kholiye…kuch boliye…
छोटो एवं बडे सभी भाईयों ने अपनी प्रतिक्रिया दी वो उनके अपने विचार थे लेकिन जहाँ तक मेरे विचारों कि बात है हम हिन्दुस्तानियों की आदत है कि कितनी भी अच्छाई की बात हो हम उसमें नकारात्मकता निकाल ही लेते हैं। हमने अन्ना के त्याग को नहीं देखा लेकिन उन बच्चों में धर्म को देख लिया। यह बात हमारे देखने के नजरिये की ओर इंगित करती है।
जय हिन्द जय भारत
ANNA KI TEAM MEIN SABHI BHRAST LOG HAIN.INKE CHARCHIT KARNAME ROZ TV PAR ATTE HAIN.INKE KHANE KE DAAT KUCH AUR DIKHANE KE KUCH AUR HAIN.YE ANDAR ANDAR KUCH PARTIYO KE HIT KE LIYE RAJNITI KAR RAHE HAIN. DESH KE SAVINDHAN SE UPAR KOI NAHIN HAIN KYONKI USE BANANE WALE LOGO KE KHOON SE HI HAME AZADI MILI HAIN AUR ANNA US SAVINDHAN SE APNE APKO UPAR SAMAJHTE HAIN.ANNA EK SWARTHI ZIDDI AUR PAGAL ADMI KA NAAM HAI.AGAR AISE KUCH LOGO KI BATTON KO SUNKAR HUM DIGBHRAMIT HONE LAGE TO YE LOG HAMARE DES KI ASMITA AUR SURAKSHA KO KHATRA PHUCHA DENGE. ANNA ARAKSHAN KA BHI VIRODH KARTE HAIN. INKE KARNAME AAP IS WEBSITE PAR DEKH SAKTE HAIN http://www.jago.in/home.php?language=english.IS LIYE ANNA JI AGAR AGAR APKO RAJNITI KARNI HAIN TO AAP CHUNAV CHINH AVANTAN KARVAKAR APNE UMIDVAR CHUNAV MEIN UTARE VISWAS SE KAHTA HOON INKE SABHI UMMIDVARO KE JAMANAT JABT HO JAIYNGE.ANNA KE JO COMMENTS SHARAD PAWAR JI KE UPAR AYE THE UNKI MEIN GHOR NINDA KARTA HOON MUJHE NAHIN LAGTA HAIN KI ANNA KO AGAR GAL PAR THAPPAD PADTA TO AISA COMMENT SHARAD PAWAR UNKE BARE MEIN KARTE JAISA ABHIMAN MEIN CHOOR ANNA NE KIYA./
Kiyaa kahu dosto? firbhi ek inshan hu to kuch to kahna padegaa,haa ek baat hum sab jaante hai woh ye ki giyaani se giyaani mile kare giyaan ki baat or ghadhe se ghadh mele kare laatmlaat.samjgaye na hum sab ko bhagvaan ne inshan banaya hai to kiyu na hum sachhe inshan bankar rahe.yahaa par bi aap rajniti laate ho kitna yogiy hai bhai?
अन्ना या अन्ना की टीम पर कीचड़ उछालने वाले सज्जनों की सेवा में —
१. ‘दूसरों को मूर्ख व स्वयं को बुद्धिमान समझने वाला वास्तव में ख़ुद मूर्ख बन जाता है !’
‘२. ‘सूरज पर थूकने की कोशिश करने वाले सूरज का कुछ नहीं बिगाड़ पाते, उलटे थूक उनके मुँह पर ही गिरता है और उनकी अपनी सूरत ही बिगड़ जाती है !’
डॉ. विमल बाबू! प्रणाम! आपके शब्दों से ज़ाहिर होता कि आप अन्ना से काफ़ी प्रभावित है या वास्तव में उसके पीछे के ताकतों से प्रभावित हैं| अगर हाल ही के मुंबई वाली भूख हड़ताल पर आपने नज़र डाला होता तो आपका नजरिया शायद ऐसा नहीं होता|
अन्ना के लिए जानता न तो मुंबई में आई ना ही उसके अपने गाँव में ही उसके पहुँचने पर उसका स्वागत किया| जानता को कब तक बेवकूफ बनाते ये सब मिलकर, आखिरकार जानता की आँख खुली और अन्ना को उसकी औकात दिखा दिया|
Anna gaya bhar me!
Apke baare me News me dekha.. Ab aap jald aa jayen!
Anna fir se drama karne Jantar-Mantar pahuch gaya hai… Koi iski noutanki bund karwao!
Anna fir se drama karne Jantar-Mantar pahuch gaya hai… Koi iski noutanki bund karwao!
dhanyvad pappu ji jo aapne bandook chhodke kalam utha li,,, ab aap nischit hi kuchh samaj ke liye behtar kar payenge. aise hi apne vicharo se samaj ko jagane ka kam kariye kuki murda ho chuke samaj ko ab marne se koi fayda nahi vicharo ki aag se jagane ka kam hi aap kariye to( HINSA PAR AHINSA KI JEET)sarthak paridam layegi aisi mai ummeed karta hu….
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