‘मुक्तिपर्व’ रंगमंच पर स्त्रियों के संघर्ष की समग्र गाथा है

पौराणिक कथाओं में आमतौर पर चमत्‍कार मिलते हैं। उन चमत्‍कारों से जुड़ी तार्किकता की कहानी बहुत कम बांची जाती है। कृष्‍ण की बेटी सामा की मुक्ति के लिए संघर्ष की कहानी ऐसी ही छुपी हुई कहानी है। आमतौर पर लोग नहीं जानते कि कृष्‍ण की बेटी सामा थी और वह एक मुनिकुमार से प्रेम करती थी। नगरसामंत चूरक सामा को हासिल करना चाहता था और असफल रहने पर उसके खिलाफ षड्यंत्र करता है। कृष्‍ण को यह समझाने में कामयाब हो जाता है कि उनकी बेटी सामा कुछ ज्‍यादा ही चंचल है और उसकी चंचलता से नगर की दूसरी कन्‍याओं पर गैरपरंपरागत असर डाल रहा है। कृष्‍ण अपनी बेटी को पंछी बन जाने का शाप देते हैं। सामा को बहुत प्‍यार करने वाले उसके भाई सांब को अपने पिता का यह फैसला कचोटता है। वह पिता पर तंज कसता है। कृष्‍ण कहते हैं कि वह इस फैसले से जनता की नजरों में इतने ऊपर उठ चुके हैं कि अब उसे पलट नहीं सकते।

निराश सांब अपनी बहन की मुक्ति के लिए विष्‍णु की तपस्‍या करते हैं। विष्‍णु प्रसन्‍न होते हैं, लेकिन कहते हैं कि अगर उन्‍होंने सामा को शापमुक्‍त कर भी दिया, तो भी उस पर लगे दोष से वह मुक्‍त नहीं हो पाएगी। समाज उसे सहज नजरों से नहीं देखेगा। बेहतर है कि वह समाज को मनाये। घर घर जाकर लोगों के सामने चूरक के षड्यंत्र का पर्दाफाश करे। चूरक के खिलाफ एक जनांदोलन खड़ा करे, तभी सामा पुन: मनुष्‍य योनि में वापस आ पाएगी। इसके बाद सांब नगर नगर, गांव गांव घूमता है और चूरक के खिलाफ नागरिकों को गोलबंद करता है। लोग चूरक के पुतले जला कर उसका विरोध करते हैं।

मिथिला में सामा चकेवा की कहानी तब से प्रचलित है और स्त्रियां इसे पर्व के रूप में मनाती हैं। लेकिन इस कहानी में धार्मिकता उतनी नहीं है, जितनी सामाजिकता। इस कहानी में राजनीतिक संघर्ष भी है और स्‍त्रीमुक्ति से जुड़े विमर्श भी।

प्रख्‍यात नाटककार अविनाश चंद्र मिश्र के इस लोकप्रिय नाटक का मैथिली में रूपांतर करके इसे दिल्‍ली की रंगसंस्‍था मैलोरंग ने युवा रंग निर्देशक प्रकाश झा के निर्देशन में 29 अगस्‍त की शाम श्रीराम कला केंद्र के मुख्‍य सभागार में मंचित किया। मैथिली रंगमंच के समृद्ध वर्तमान का संचालन करने वाले मैलोरंग की इस प्रस्‍तुति को लोगों ने खूब सराहा। मोहल्‍ला लाइव का आग्रह है कि जिन जिन लोगों ने इस नाटक को देखा है, वे अपनी प्रतिक्रिया हमें भेज सकते हैं। प्रतिक्रियाएं प्रशंसा और आलोचना, दोनों ही स्‍वरों में की जा सकती हैं। हमारा पता है mohallalive@gmail.com

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