सिनेमा रिसर्च के नाम पर जाहिलों की फैकल्‍टीज सक्रिय है!

यह पत्र मोहल्‍ला लाइव में प्रकाशन के लिए नहीं भेजा गया था बल्कि व्‍यक्तिगत रूप से प्रकाश के रे को मेल किया गया था। लेकिन प्रकाश ने इस पत्र के सार्वजनिक महत्‍व को ध्‍यान में रखते हुए इसे हमें प्रकाशित करने के लिए भेजा : मॉडरेटर

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प्रिय रे जी,

अंग्रेजी में कहावत है कि उत्सुकता ने बिल्ली की जान ले ली। शीर्षक “देवदास” अब भोजपुरी में | Preview by Mohalla Live से दिग्भ्रमित होकर मैंने आपकी टिप्पणी “पिया बिन नहिं आवत चैन” पढ़ डाली कि भोजपुरी देवदास के बारे में कुछ तथ्य मिल सकें।

अव्वल तो यदि आपका शीर्षक बरुआ के हिंदी देवदास के गीत से लिया गया है, तो वह “पिया बिन आवत नाहीं चैन” है। आपने अनायास पुराने देवदासों के गीतों के रिमेक की संभावनाएं भी उपजा दी हैं।

बरुआ ने, जो मूलतः असम के थे, एक देवदास असमिया में भी अपने नायकत्व में बनायी थी।

एक देवदास पिछले बरस पाकिस्तान में बनी थी और इस साल बांग्लादेश में या तो अभी निर्माणाधीन है या शायद बन चुकी है।

विचित्र यह है कि आप लोग जिसे लगातार भोजपुरी में “हमार देवदास” कह रहे हैं, उसका नागरी पोस्टर उसे सिर्फ “देवदास” लिख रहा है। तो यह हमार क्या Regional Patriotism के तकाजों के मद्दे-नजर आपने जोड़ दिया है?

नागरी में दे के हिज्जे में ए की मात्रा के लिए दारू की बोतल का इस्तेमाल किया गया है। नायक की तस्वीर में भी पीछे छिपे गये हाथ में दारू की बोतल ही है। पोस्टर में कहीं पारो या चंद्रमुखी का चेहरा नहीं है। क्या यह भोजपुरी निर्देशक-नायक-दर्शक की आशंकित macho दारूबाज मानसिकता की तुष्टि के लिए है?

लेकिन, खैर, इससे आपको क्या लेना-देना…

आपकी टिप्पणी निर्देशक का नाम दुहराने के अलावा फिल्म की कोई जानकारी नहीं देती। आप किया होगा, रहा होगा की भाषा में बात करते रहते हैं, क्या दरअसल है यह आपको मालूम नहीं लगता।

देवदास को लेकर आधुनिकता संबंधी आपकी अवधारणा बोगस है और शेरों का इस्तेमाल गलत और बेतुका है। इश्क-ए-नाकामयाब और शराबनोशी के रिश्तों को लेकर सैकड़ों दूसरे मौजूं शेर उर्दू में बिखरे पड़े हैं। खुद गालिब में भी होंगे।

क्या आपकी विभिन्न सक्रियताएं इसी स्तर की हैं? यह तो मुझे मालूम था कि सिनेमा पर रिसर्च के नाम पर जाहिलों की फैकल्टीज ही विभिन्न कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में सक्रिय हैं, लेकिन अब राज खुला कि जब “शोध-छात्रों” का यह स्तर है, तो उन्हें बेहतर भी क्यों होना चाहिए?

विष्णु खरे
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Vishnu Khare Image(विष्‍णु खरे। हिंदी कविता के एक बेहद संजीदा नाम। अब तक पांच कविता संग्रह। सिनेमा के गंभीर अध्‍येता-आलेचक। हिंदी के पाठकों को टिन ड्रम के लेखक गुंटर ग्रास से परिचय कराने का श्रेय। उनसे vishnukhare@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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