अदम जनता के कवि हैं, उन्‍हें बचाने के लिए आगे आएं

♦ कौशल किशोर

नकवि रामनाथ सिंह उर्फ अदम गोंडवी की हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। अपनी गजलों व शायरी से आम जन में नयी स्फूर्ति व चेतना भर देने वाले अदम लखनऊ के संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई) के गेस्ट्रोलॉजी विभाग (पांचवा तल, जी ब्लॉक, बेड नं 3) में भर्ती हैं। उनकी चेतना जब भी वापस आती है, वे अपने भतीजे दिलीप कुमार सिंह को सख्त हिदायत देते हैं कि मेरे इलाज के लिए अपनी तरफ से किसी से सहयोग मत मांगो। जैसे कहना चाहते हैं कि सारी जिंदगी संघर्ष किया है, अपनी बीमारी से भी लड़ेगे। उसे भी परास्त करेंगे। वे जब भी आंख खोलते हैं, चारों तरफ अपने साथियों को पाते हैं। उनके चेहरे पर नयी चमक सी आ जाती है। एक साथी उन्हें सुनाते हैं, ‘काजू भुनी पलेट में, ह्व‍िस्की ग्लास में / उतरा है रामराज्‍य विधायक निवास में’ और अदम अपना सारा दर्द पी जाते हैं और उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान फैल जाती है।

अदम गोंडवी का लीवर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। किडनी भी ठीक से काम नहीं कर रही है। पेट फूला हुआ है। मुंह से पानी का घूंट भी ले पाना उनके लिए संभव नहीं है। खून में हीमोग्लोबीन का स्तर भी नीचे आ गया है। सोमवार की रात तीन बोतल खून चढ़ाया गया। संभव है आगे और खून चढ़ाना पड़े। मंगलवार को अदम गोंडवी का इंडोस्कोपी हुआ तथा कई जांचें की गयी। इनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे के इलाज की दिशा तय होगी। पीजीआई के डाक्टरों का कहना है कि अदम गोंडवी के इलाज में करीब तीन लाख रुपये के आसपास खर्च आएगा।

लखनऊ के एक स्‍थानीय अखबार में उनकी बीमारी की खबर तथा सहयोग की अपील का अच्छा असर देखने में आया है। आज सुबह से ही लेखकों, संस्कृतिकर्मियों का पीजीआई आना शुरू हो गया। कई संगठन और व्यक्ति भी सहयोग के लिए सामने आये। जो किसी कारणवश नहीं पहुंच पाये, वे भी लगातार हालचाल पूछते रहे। पहुंचने वालों में वीरेंद्र यादव, प्रो रमेश दीक्षित, राकेश, भगवान स्वरूप कटियार, आरके सिन्हा, श्याम अंकुरम, आदियोग, संजीव सिन्हा, पीसी तिवारी, रामकिशोर आदि प्रमुख थे।

अदम गोंडवी के इलाज के लिए सहयोग जुटाने के मकसद से कई संगठन सक्रिय हो गये हैं। जसम, प्रलेस, जलेस, कलम, आवाज, ज्ञान विज्ञान समिति आदि संगठनों की ओर से राज्यपाल व मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया तथा उनसे मांग की गयी कि अदम गोंडवी के इलाज का सारा खर्च प्रदेश सरकार उठाये। ऐसा ही ज्ञापन उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान और भाषा संस्थान को भी भेजा गया है। लेखक संगठनों का कहना है कि अदम गोंडवी ने सारी जिंदगी जनता की कविताएं लिखीं, जन संघर्षों को वाणी दी। ये हमारे समाज और प्रदेश की धरोहर है। इनका जीवन बचाना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। वह आगे आये। रचना व साहित्य के लिए बनी सरकारी संस्थाओं का भी यही दायित्व है।

सोमवार 12 दिसंबर को अदम गोंडवी को गोंडा से लखनऊ के पीजीआई में लाया गया था। उनकी हालत काफी गंभीर थी। वे नीम बेहोशी की हालत में थे। कई घंटे वे बिना भर्ती व इलाज के पड़े रहे। इससे उनकी हालत और भी खराब होती गयी। बाद में पीजीआई के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हुए। सबसे बड़ी दिक्कत पैसे की थी। परिवार के पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। सबसे पहले मुलायम सिंह यादव का सहयोग सामने आया। उन्होंने पचास हजार का सहयोग दिया। एडीएम, मनकापुर ने दस हजार का सहयोग दिया। गोंडा में जिस प्राइवेट नर्सिंग होम में उनका इलाज चला, वहां के डाक्टर राजेश कुमार पांडेय ने दस हजार का सहयोग दिया।

12 तारीख से चले इलाज से इतना फर्क आया है कि उस दिन जहां वे नीम बेहोशी में थे, आज लोगों को पहचान रहे हैं। थोड़ी-बहुत बातचीत भी कर रहे हैं। लेकिन अदम गोंडवी का यह इलाज लंबा चलेगा। इसमें अच्छे-खासे धन की जरूरत होगी। इसके लिए सभी को जुटना होगा। उस समाज को तो जरूर ही आगे आना होगा जिसके लिए अदम गोंडवी ने सारी जिंदगी संघर्ष किया। कहते हैं बूंद-बूद से घड़ा भरता है। लोगों का छोटा सहयोग भी इस मौके पर बड़ा मायने रखता है। वे सहयोग के लिए आगे आ सकते हैं। इस सहयोग से हम अपने कवि का जीवन बचा सकते हैं। सहयोग के लिए दिलीप कुमार सिंह से 09958253708 पर संपर्क करें या सीधे अदम गोंडवी के एकाउंट में भी धन जमा किया जा सकता है। उनका एकाउंट स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया की परसपुर शाखा में है। एकाउंट नंबर है… 31095622283

(कौशल किशोर। सुरेमनपुर, बलिया, यूपी में जन्‍म। जनसंस्‍कृति मंच, यूपी के संयोजक। 1970 से आज तक हिन्दी की सभी प्रमुख पत्रिकाओं में कविताओं का प्रकाशन। रेगुलर ब्‍लॉगर, यूआरएल है kishorkaushal.blogspot.com। उनसे kaushalsil.2008@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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