आप उद्यमी बनना चाहते हैं, तो बदतमीजी मत कीजिए

♦ नंदिनी वैद्यनाथन

नंदिनी वैद्यनाथन का यह लेख मासिक पत्रिका Entrepreneur में अक्टूबर अंक में छपा था। नंदिनी दुनिया भर के आइवी-लीग स्कूलों में उद्यमिता के बारे में क्‍लासेज लेती हैं। उनके द्वारा स्थापित कंपनी कर्मा उभरते उद्यमियों – शुरुआती, पारिवारिक बिजनेस और बड़े बिजनेस – सभी को मेंटर करती है। उनकी लिखी किताब Entrepedia – Step-by-Step Guide to Becoming an Entrepreneur in India दुनिया भर में मशहूर है : मॉडरेटर

किसी से मेंटरशिप के रूप में मदद मांगते समय, ध्यान रखिए कि आपका बर्ताव और आपकी अनुशासनहीनता भारी गड़बड़ी कर सकती है। मैं लगभग मान चुकी हूं कि भारत के उभरते उद्यमी बिगड़ैल शहजादों की जमात के हैं। इससे पहले कि ये कहने के लिए आप मुझे सूली पर लटका दें, मुझे ये समझाने का मौका दीजिए कि मैं ऐसा क्यों मानती हूं।

आपमें से कई मुझे मेल लिखते है, और खुद को मेंटर करने के लिए कहते हैं। मैं जवाब में अपना मोबाइल नंबर देती हूं, और ये बताती हूं कि आप कब मुझसे बात कर सकते हैं – सच मानिए आप में से 99.9 प्रतिशत लोग निश्चित समय पर मुझे कॉल नहीं करते हैं। फिर दो दिन के बाद आपका फोन आता है ये बताने के लिए कि आप या तो बहुत बिजी थे, या फिर आपने अपना मेल नहीं चेक किया था! आप शिष्टाचार की हद को दो-दो बार कैसे तोड़ सकते हैं। एक बार तो सही समय पर फोन न करके, और फिर बिना समय लिये ताबडतोड़ कॉल कर के।

और अगर किसी तरह से हम फोन पर बात कर पाने में सफल हो ही गये, तो आप मुझसे पूछते हैं कि मैं करती क्या हूं! ठीक है, हो सकता है कि किसी और ने आपको मेरा परिचय दिया था, मगर क्या आपको मुझे मेल लिखने के पहले मेरे बारे में पता नहीं करना चाहिए?

न जाने कितनी बार तो ऐसा भी हुआ है कि मैंने खुद सुनिश्चित समय पर आपको फोन किया है और आपने फोन उठाया तक नहीं। मैंने एसएमएस भेजा कि भाई, ये हमारे बात करने का समय है, फोन उठा लीजिए। मगर आपकी तरफ से कोई जवाब नहीं आता। फिर कई हफ्ते के बाद, मेरे पास एक ई-मेल या फोन आता है कि : “ओह, मैं भूल गया था / गयी थी, क्योंकि वो बहुत दिन पहले सेट किया था।” सरासर झूठ! आपके फोन में कैलेंडर की सुविधा तो होगी! आपमें से कई एक मुझे मेल करते समय मेरे नाम की स्पेलिंग तक गलत लिखते हैं। आखिर कितना कठिन है गूगल पर मेरा नाम देखना या फिर मेरे मेल आईडी में ही मेरा नाम देखना?

आपमें से कुछ तो मुझे मिस्टर कह कर बुलाते हैं। मैं समझ सकती हूं अगर आप विदेशी हैं, और भारतीय नामों के लिंग नहीं समझते हैं। लकिन अगर आप हिंदुस्तानी हैं तो ये गलती क्षमा लायक नहीं है। ऊपर से, मेरा नाम तो ऐसा है ही नहीं कि कोई संदेह हो (उदाहरण के तौर पर गुरप्रीत)।

मेल भेजने का बटन दबाने के पहले क्या आपको एक बार अपना लिखा चेक नहीं करना चाहिए कि कहीं कोई गलती तो नहीं है। एक तो हमारी अंग्रेजी पहले ही माशा-अल्लाह है, उसमें भी ऐसी गलतियां कि लिखना था list और लिख रहे हैं lust…

मेरी सबसे बड़ी शिकायत तो ये है कि आप अपने ईमेल का जवाब समय पर नहीं देते! आज के जमाने में, क्या आपको लगता है कि आप ये बहाना मार सकते हैं कि ‘ओह मैंने मेल नहीं चेक किया’। ये बात किसी को भी आपसे नाराज करने में सक्षम है, खासकर मेरे जैसी व्यक्ति जो कि लगभग उसी सेकेंड जवाब भेजती है, जिस सेकेंड आप मेल भेजते हैं।

चलिए इन सारी चीजों से भी हम आगे बढ़ गये और मिलने का समय भी निश्चित हो गया – कल सुबह 11 बजे, मेरे ऑफिस में, पता मेरी वेबसाइट पर है। आपको कोई हक नहीं है कि आप मुझे सुबह 11 बजे फोन करें और कहें कि आपको बुखार है, और आप मीटिंग कैंसिल करना चाहते हैं। न ही आप ये कह सकते हैं, ”मैं घर से निकल रहा हूं, आपका पता क्या है मैडम?” चलिए मान लेते हैं कि आपने ये भी नहीं किया और आश्चर्यजनक रूप से आप मेरे ऑफिस में सही समय पर पहुंच भी गये। अब आप आये तो हैं मुझसे अपने आइडिया पर विमर्श करने के लिए, लेकिन लैपटॉप तो लाये ही नहीं हैं। फिर आप जादू की छड़ी की तरह से एक पेन-ड्राइव प्रकट करते हैं और कहते हैं, “कृपया इसे अपने लैपटॉप में लगा लीजिए।” मुझे आप एक बात बताइए कि मैं क्‍यों न चीखूं कि कहीं आपका दिमाग तो खराब नहीं है? हमारी कोई जान-पहचान नहीं है, न ही मुझे पता है आपकी पेन-ड्राइव कहां-कहां कितने कंप्‍यूटरों में लगती रही है? भगवान जाने आप कैसे ये सोचते हैं कि मैं उस पेन-ड्राइव को अपने लैप-टॉप में लगा लूंगी?

चलिए मान लिया कि आप लैप-टॉप ले कर भी आये, सही समय पर पहुंच भी गये, और आपने मुझे अपना प्रेजेंटेशन दे भी दिया। क्या आप मुझे दोषी ठहराएंगे अगर मैं आपकी बात ध्यान से नहीं सुन पायी क्योंकि आपने मेरा पूरा कमरा ही महका दिया – या तो डियोड्रेंट की गंगा बहा कर, या फिर इतनी कंजूसी से डियोड्रेंट लगा कर कि मैं कीटाणु-नाशकों की कंपनियों के नाम सोचती रहूं। मैं यह नहीं कह रही हूं कि आप सूट-बूट में सजे-संवरे आएं, मगर इतना तो मैं चाहूंगी कि आपकी टी-शर्ट पर ‘I love sucking’ न लिखा हो। मुझे आपकी फटी हुई फर्श पर लिथड़ती हुई जींस नहीं अच्छी लगती है, और मैं नहीं चाहती हूं कि आपकी खास प्रेजेंटेशन-चिंगम के मैं दर्शन करूं। और सच मानिए, मैने अभी सिर्फ कहानी का कोना भर बताया है।

(अनुवादक के बारे में : स्वप्निल कांत दीक्षित। आईआईटी से स्नातक होने के बाद, कोर्पोरेट सेक्टर में दो साल काम किया। फिर साथियों के साथ जागृति यात्रा की शुरुआत की। यह एक वार्षिक रेल यात्रा है, और 400 युवाओं को देश में होने वाले बेहतरीन सामाजिक एवं व्यावसायिक उद्यमों से अवगत कराती है। इसका उद्देश्य युवाओं में उद्यमिता की भावना को जगाना, और उद्यम-जनित-विकास की एक लहर को भारत में चालू करना है। इस यात्रा में ये युवक जगह-जगह से नये सृजन के लिए उत्‍साह बटोरते चलते हैं। स्वप्निल उन युवकों में से हैं, जो बनी-बनायी लीक पर चलने में यकीन नहीं रखते। यात्रा की एक झलक यहां देखें।)

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *