कौन है ये निर्मल बाबा, जो सरेआम जालसाजी कर रहा है?

पिछले कई रोज से देख रहा हूं कि लगभग टीवी चैनलों पर निर्मल बाबा बीच-बीच में घुस आते हैं। कल हद हो गयी। IBN7 पर रेल और आम बजट से जुड़ी सनसनीखेज खबरों के बीच अचानक निर्मल बाबा का दरबार लगा और आधे घंटे तक चलता रहा। न्‍यूज की प्रत्‍याशा में हम भी मुआ देखते ही रह गये। गजब की नौटंकी थी। फेसबुक स्‍टैटस दे मारा, तो लोगों ने पोल खोली। देखिए आप भी, www.facebook.com। कमेंट्स के बीच में आनंद राठौर जी ने एक लिंक दिया, जो अंग्रेजी की एक साइट का था और जिस पर निर्मल बाबा के कई रोचक खल-प्रसंग थे। वहीं से अनुवाद करने की कोशिश की गयी है। देखिए और शेयर कीजिए ताकि ऐसे बाबाओं के बादल छंटें और रोशनी से भरा आसमान साफ साफ दिख सके : मॉडरेटर

निर्मल बाबा आज किसी परिचय के मोहताज नहीं। भारत के लिए वह एक घरेलू नाम की तरह हो गये हैं। दरअसल वो एक आध्‍यात्मिक गुरु हैं, लेकिन थोड़े अलग हैं। यह थोड़ा अलग होना ही उन्‍हें संदेहास्‍पद गुरु बनाता है।

निर्मल बाबा की लोकप्रियता में अचानक आयी वृद्धि आश्‍चर्यजनक है। आज की तारीख में सिर्फ बाबा रामदेव ही लोकप्रियता में उनसे मुकाबला कर सकते हैं। उनकी लोकप्रियता के पीछे कोई ‘दिव्‍य शक्ति’ है, जो कथित तौर पर उनमें पायी जाती है। उनका कहना है कि उनकी छठी इंद्रियां सक्रिय हैं। साथ ही उनका यह भी दावा है कि बिना किसी व्‍यक्तिगत संपर्क के वे हर मर्ज की दवा कर सकते हैं। चाहे वह कैंसर हो या एड्स। वह अपने वशीकरण मंत्र के असर को लेकर इतने आश्‍वस्‍त हैं कि कहते हैं कि ब्रह्मांड के किसी भी हिस्‍से में रह रहे आदमी की सोच पर वह अधिकार जमा सकते हैं। और सबसे जरूरी और चौंकाने वाली बात कि अगर आप टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले उनके दरबार पर गौर फरमाएं, तो कई लोगों को यह कहते पाएंगे कि निर्मल बाबा के आशीर्वाद ने उनकी जिंदगी को चमत्‍कारों से भर दिया।

वह संदिग्‍ध क्‍यों हैं?

टेलीविजन चैनलों के माध्‍यम से दुनिया भर में अपने चमत्‍कार का प्रचार करने के बावजूद वो संदिग्‍ध लगते हैं। आध्‍यात्मिक गुरु के बाने में वे पक्‍के जालसाज लगते हैं। इसकी कुछ वजहें हैं…

[1] किसी ने निर्मल बाबा को वशीकरण मंत्र का प्रयोग करते नहीं देखा, लेकिन इसके असर की अफवाहों के चलते उनकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। सवाल है कि क्‍या कोई इस मंत्र के सहारे किसी को संचालित कर सकता है? सच तो यह है कि वशीकरण कोई मंत्र नहीं बल्कि एक तरह का मनोवैज्ञानिक ट्रिक है। जो इसे जानता है, वह सम्‍मोहन का भ्रम पैदा कर सकता है। लेकिन जब आदमी सामने हो। यह संभव ही नहीं है कि दूसरी जगह बैठे आदमी को इस चाल से कोई नियंत्रित कर कर पाये। निर्मल बाबा तमाम लोगों के साथ इस मंत्र का चमत्‍कार करते हैं। अगर ऐसा ही है, तो क्‍यों नही भ्रष्‍टाचार विरोधी आंदोलन के याद्धा अन्‍ना हजारे के खिलाफ मनमोहन सिंह से संपर्क करके वह इस मंत्र का उपयोग करते हैं? और, क्‍यों नहीं वह किसी बड़े व्‍यवसायी को अपने प्रतिद्वंद्वी को पराजित करने के लिए इस मंत्र का जादू चलाते हैं? ऐसा करके वे अरबों रुपये कमा सकते हैं। तो बात दरअसल ये है कि निर्मल बाबा के पास कोई मंत्र नहीं है, यह महज भोले-भाले लोगों को ठग कर पैसा बनाने की एक चाल है।

[2] आइए, थोड़ा निर्मल बाबा के इतिहास पर नजर डालते हैं। बहुत कम लोगों को उनके काम और उनके कारोबार के बारे में मालूम है। वे क्‍या करते हैं कि हर महीने उनके पास करोड़ों रुपये आ जाते हैं? उनके अनुयायी कहते हैं कि उनके पास कहीं से कोई दिव्‍य शक्ति आ गयी है। मुझे हैरानी इस बात की है कि अगर प्रकृति ने वाकई कोई दिव्‍य शक्ति इस आदमी को दी है, तो वह इसी आदमी को क्‍यों दी है, जो इस दिव्‍य शक्ति से पैसा बनाने में लगा है? निर्मल बाबा महज उन तरकीबों का इस्‍तेमाल करता है, जिसके जरिये मध्‍यकालीन भारत में ब्राह्मणों ने अपना बटुआ मोटा किया था, अपनी चमड़ी मोटी की थी। ब्राह्मणों की तरह वह कभी किसी को मुफ्त में कुछ नहीं दे सकता। यहां तक कि भूख से मरते हुए आदमी तक को भी नहीं। (यहां ब्राह्मण प्रजाति के नामोल्‍लेख को कृपया जातिवाद से जोड़ कर न देखें…)

[3] वह अपने अनुयायियों से पैसे क्‍यों ऐंठता है? अगर कोई उनके समागम में भाग लेना चाहता है, तो उसके लिए दो हजार रुपये का भुगतान अनिवार्य है। निर्मल बाबा तक यह रकम बैंक के जरिये पहुंचाना होता है। भुगतान की रसीद के जरिये ही पंजीकरण होता है। पंजीकरण की सूचना की निर्मल बाबा के दिल्‍ली दफ्तर से एसएमएस के जरिये मिलती है। आपका कुछ नहीं हो सकता, अगर आपके पास मोबाइल नहीं है। समागम के दिन भक्‍त को भुगतान की रसीद के साथ ही वैध पहचान पत्र साथ ले जाना होता है। सिर्फ यही दो दस्‍तावेज निर्मल बाबा के समागम में प्रवेश पास का काम करते हैं। यह सब कुछ बहुत झेलाऊ है। अगर निर्मल बाबा वाकई कोई आध्‍यात्मिक गुरु हैं, तो उन्‍हें भक्‍तों के प्रमाण पत्र की जरूरत क्‍यों होती है?

[4] अगर निर्मल बाबा वाकई किसी दिव्‍य शक्ति से लैस हैं और इसके जरिये वह कुछ भी कर सकते हैं, तो वे मानवता की रक्षा के लिए कुछ करने से उन्‍हें कौन रोक रहा है? क्‍योंकि उनका मुल्‍क गरीबी की खाई में लगातार गिरता जा रहा है? हां, यह सच है कि वे भारत की गरीबी के लिए जिम्‍मेदार नहीं हैं, लेकिन ऐसे लोगों की लोकप्रियता बताती है कि भारत क्‍यों गरीब और गरीब होता जा रहा है।

[5] हां, इस बात की सराहना जरूर की जानी चाहिए बाबा बैंक चालान के जरिये पैसे बना रहे हैं। मतलब यह कि अनुयायियों से होने वाली उनकी कमाई का हिसाब आधिकारिक तौर दर्ज रहता है। क्‍या यह जरूरी है? नहीं। भारत के कुछ आध्‍यात्मिक गुरु दरअसल बहुत चतुर हैं। पैसे कमाने के तरीकों के मामले में वे वारेन बुफेट से भी दो कदम आगे नजर आते हैं। आयकर से छुटकारा पाने के लिए उनके पास ढेर सारे कागजी ट्रस्‍ट और एनजीओ होते हैं। कुछ साल पहले, एक न्‍यूज चैनल ने दिखाया था कि कुछ आध्‍यात्मिक गुरु अपने ट्रस्‍ट और एनजीओ के जरिये कैसे काले धन को सफेद करने का धंधा करते हैं। इस स्‍कैंडल में एक नाम किरीट भाई का भी था। (और अगर आपको इन स्पिरिचुअल गुरुओं की ताकत का अंदाजा लगाना हो, तो आप IBN7 की वीडियो आर्काइव में से आप इस खबर से जुड़े फुटेज तलाशने की कोशिश कीजिए, वह आपको कहीं नहीं मिलेगा।)

[6] अगर निर्मल बाबा धंधा कर रहे हैं, तो फिर को उनका विरोध नहीं करना चाहिए। लेकिन वे लोगों को धोखा देकर अपने को महिमामंडित कैसे कर सकते हैं? तमाम टीवी चैनलों पर दिखाये जाने वाले समागम पर आप गौर करें, कई सारे लोगों को बाबा का गुनगान करते पाएंगे कि बाबा से पहले उनका जीवन क्‍या और बाद में क्‍या हुआ … और फिर बाबा की मुस्‍कराहट पर भी आप गौर करें। यह अपने को महान बताने-दिखाने का सबसे ओछा तरीका है।

आजतक पर नवंबर 2011 में उनके समागम का एक दृश्‍य

भक्‍त : बाबा, पिछले समागम में मैंने एक घर आपसे मांगा था और आपने मुझे एक बंगला दे दिया। अब मैं चाहता हूं कि ये … ये … और ये …

बाबा अपनी शानदार कुर्सी पर बैठे-बैठे आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ उठाते हैं।

तो बाबा ने उस भक्‍त को महज दो हजार रुपये में एक बंगला दे दिया। इंदिरा आवास योजना के बारे में आपको क्‍या खयाल है? सरकार को इस मद की सारी रकम निर्मल बाबा को सौंप देना चाहिए। भारत में छद्म अध्‍यात्‍मवाद की इस नयी लहर में शामिल सारे बाबा दरअसल बड़े अपराधी हैं। चाहे वह आसाराम बापू हों, किरीट भाई, बाबा रामदेव हों या फिर निर्मल बाबा हों। टेलीविजन चैनलों को यह जरूर बताना चाहिए कि ये जो आप देख रहे हैं, वह विज्ञापन है और इसमें बाबा अपना सामान बेच रहे हैं। सरकार को इन बाबाओं पर लगाम लगानी चाहिए और अंतत: लोगों को ये समझना होगा कि कोई बाबा उनको जीवन की मुश्किलों से, दलदल से बाहर नहीं निकाल सकते।

[7] निर्मल बाबा के चमत्‍कार की हकीकत जानने के लिए कुछ घटनाओं पर गौर करना जरूरी है। एक छात्र, जिसने पिछले पांच साल में कुछ भी नहीं पढ़ा था, निर्मल बाबा के जरिये उसे नौकरी मिल गयी। कमाल है! तो उन छात्रों का क्‍या दोष है, जो किसी निर्मल बाबा के पास नहीं गये और मेहनत-लगन से पढ़ाई करने के बाद भी नौकरी नहीं पा सके, प्रतीक्षा सूची में बने रहे? उनकी जगह उस लड़के को नौकरी मिल गयी, जो बाबागीरी में लग गया? इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि क्‍यों हम गूगल, माइक्रोसॉफ्ट या आई-पैड जैसी किसी चीज का ईजाद नहीं कर पाते?

[8] निर्मल बाबा जैसे लोग मूर्खों की वजह से पनपते हैं। कोई आदमी बिना दवा के रोगी को ठीक करने का दावा करता है और लोग विश्‍वास करते हैं, तो यह मूर्खता ही है। दस फीसदी लोगों के जीवन का संयोग नब्‍बे फीसदी लोगों की तकदीर से कभी नहीं जुड़ सकता। अगर आपको अपने ऊपर भरोसा है, आप किसी भी संकट पर हावी हो सकते हैं। ऐसे बाबाओं की थ्‍योरी ये है कि अगर आपको अपने ऊपर भरोसा नहीं है कि उन पर भरोसा करें। क्‍योंकि अंतत: आत्‍मविश्‍वास ही हर समस्‍या का समाधान है। इसे हम मैग्नेटिक थेरैपी कह सकते हैं,‍ जिसे बाबा लोग चमत्‍कार की तरह पेश करते हैं।

[9] अगर आपके पास पैसा नहीं है, निर्मल बाबा का प्‍यार आपको नहीं मिल सकता। बिना भुगतान के आपको उनका चेहरे देखने की भी अनुमति नहीं मिल सकती। मैं यहां यह बताना चाहता हूं कि निर्मल बाबा का आशीर्वाद उन्‍हीं को मिल सकता है, जो उनके समागम में मौजूद होते हैं या जिनके पास उनका प्रोग्राम देखने के लिए टेलीविजन सेट होता है।

[10] दासवंद क्‍या है? अनुयायियों से यह कहा जाता है कि वह भगवदकृपा पाने के लिए अपनी कमाई का एक हिस्‍सा दान करें। कमाई के इसी हिस्‍से को दासवंद कहा जाता है। यह बहुत आसान थ्‍योरी है। सौ लोगों से बात करें। उनकी समस्‍या के बारे में उनसे ऊल-जलूल बातें करें। उन्‍हें बीस आम खाने जैसी मूर्खतापूर्ण सलाहें दें। गीतो के कर्म सिद्धांत की बात न करें। यकीन मानिए सौ में से दस लोग आपकी सलाह पर अमल करना शुरू कर देंगे। दस में से दो दासवंद भी भेज देंगे। और आपकी कमाई शुरू हो जाएगी।

स्रोत… Is Nirmal Baba a Fraud ?

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