पदाम सुकडी महुआ बेचती है। सरकार यूज एंड थ्रो में व्यस्त है।

♦ याज्ञवल्क्य वशिष्ठ
नाम है पदाम सुकडी। उम्र करीब 23 बरस। दो बच्चों की मां है पदाम सुकडी। पति पदाम सुरेश एसपीओ था, जो गादीरास थाने के चिंगावरम बमब्लास्ट मारा गया। मुआवजे के तौर पर मिले पैसों का अधिकांश हिस्सा सास ससुर ले गये और आंध्रा में जा बसे। मराइगुडा थाने के पास शिविर में रहती है और इन दिनों महुआ और ताड़ी बेच कर जिंदगी गुजार रही है। पर अभी शायद मुसीबत और आनी है क्योंकि जिस जमीन पर इसकी झोंपड़ी है, वह कैंप का हिस्सा है पर जमीन सरकारी नहीं है… और जिसकी जमीन है वह अब पदाम सुकडी को कह रहा है कि जमीन खाली करो।
गोलापल्ली के पास गांव है जिनालंका। सलवा जुडूम की लहर चली तो पदाम का पति पदाम सुरेश उन कैंपों में चला आया, जिसे तब सलवा जुडूम कैंप कहा गया। वक्त गुजरा और बहुतों की तरह वह भी एसपीओ यानी विशेष पुलिस अधिकारी बन गया। पदाम सुकडी अपने पति की उस तस्वीर को बड़े गुरूर से दिखाती है, जिसमें वह पुलिस की वर्दी में मौजूद है। मरने के बाद सरकार ने उसके शव को सम्मान के साथ पदाम सुकडी के पास भिजवाया और पांच लाख की रकम भी। शहीद का शव खाक के सुपूर्द हो गया और रकम का बड़ा हिस्सा सास ससुर ले गये और आंध्रप्रदेश में जमीन खरीद कर बस गये। बची कुछ रकम बैंक में जमा करा दी गयी है।
पदाम सुकडी के दो बच्चे हैं। महेश अभी गोद में ही है, पदम आंगनबाड़ी जाता है। जिनालंका गांव, जहां इनकी जमीनें हैं, घर है, वहां अब ये जा नहीं सकते, क्योंकि माओवादियों की नजर में मरहूम पदाम सुरेश और उसका पूरा परिवार गुनहगार है। नतीजतन पदाम सुकडी कैंप में ही रहती है।
पदाम सुकडी हिंदी समझती है और दोरली में जवाब देती है। सलवम व्यंकटेश मुझे बताता है कि वह कह रही है, जिस जमीन पर उसे बसाया गया था, वह कैंप का हिस्सा बताया गया था। पर वह कैंप सरकारी नहीं निजी जमीन पर बना है। जिसकी जमीन है, वह अब उसे वापस मांग रहा है। पदाम मुझे सरकारी आदमी समझ रही थी। दनादन सवाल कर रही थी। मैं बोली नहीं समझ रहा था, पर जानता था वह गुस्से में थी।
उसका गुस्सा जायज था। बिल्कुल जायज। चलते चलते उसने मुझसे कुछ पूछा। मैने सलवम की ओर देखा। उसने कहा – वह पूछ रही थी, साहब महुआ पीएंगे क्या?
(याज्ञवल्क्य वशिष्ठ। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार। खबरनवीसी नाम की मीडिया कंपनी से जुड़े हैं। ब्लॉग अपनी बात अपनों से। yagnyawalky@gmail.com पर संपर्क करें।)










याज्ञवल्क्य जी, आप अंबिकापुर से है न?
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