बनारस में तीन दिनों की पुस्तक प्रदर्शनी, पुस्तक चर्चा भी
♦ गौरीनाथ
देश की सांस्कृतिक राजधानी बनारस में त्योहारों का मौसम बड़ी साहित्यिक हलचलों के साथ शुरू हो रहा है। अंतिका प्रकाशन साहित्य प्रेमियों के लिए समकालीन विषयों पर नवीनतम पुस्तकें लेकर आ रहा है। तीन दिनों तक शहर के प्रमुख विश्वविद्यालयों में पुस्तक-प्रदर्शनियों के साथ-साथ विमर्श, विमोचन और गोष्ठियों-चर्चाओं की धूम रहेगी।
गत वर्ष से बढ़-चढ़ कर इस बार अंतिका प्रकाशन ने बनारस के साहित्य प्रेमियों की इच्छाओं का सम्मान करते हुए तीन दिनों का कार्यक्रम रखा है। कार्यक्रम की शुरुआत 27 सितंबर को दोपहर एक बजे काशी विद्यापीठ से हो रही है जहां दूधनाथ चतुर्वेदी सभागार में सुपरिचित युवा पत्रकार सैयद जैगम इमाम के नवीनतम उपन्यास “मैं मुहब्बत” का लोकार्पण वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह करेंगे। चर्चा में भाग लेंगे आशुतोष शुक्ला (स्थानीय संपादक, दैनिक जागरण), अनिल भास्कर (स्थानीय संपादक, हिंदुस्तान), अनिल यादव (प्रधान संवाददाता, द पायनियर), सैयद अली नादिर (समाजशास्त्री), प्रो रवि प्रकाश पांडेय (विभागाध्यक्ष, समाज विज्ञान विभाग)।
28 सितंबर को डेढ़ बजे दोपहर चर्चित युवा कवि रामाज्ञा शशिधर की वैचारिक-आलोचनात्मक पुस्तक ‘किसान आंदोलन की साहित्यिक जमीन’ का लोकार्पण करेंगे कथाकार काशीनाथ सिंह। प्रमुख वक्ता होंगे लाल बहादुर वर्मा और चर्चा में भाग लेंगे मदन कश्यप, अवधेश प्रधान, प्रणय कृष्ण, वैभव सिंह, राजकुमार आदि। किसान कविताओं एवं गीतों का गायन और उन्हीं संदभों से जुड़ी पोस्टरों की प्रदर्शनी भी रहेगी।
29 सितंबर को दोपहर एक बजे बजे से वरिष्ठ कवि ज्ञानेंद्रपति और बलराज पांडेय के सान्निध्य में ‘पूर्वोत्तर का वर्तमान संकट’ विषय पर ‘वह भी कोई देस है महराज’ के लेखक-पत्रकार अनिल यादव का वक्तव्य और श्रोताओं से संवाद कार्यक्रम रखा गया है। फिर चाय विराम के बाद ढाई बजे से शाम पांच बजे तक वरिष्ठ कवि ज्ञानेंद्रपति की अध्यक्षता में आमंत्रित कवियों का काव्य पाठ रखा गया है, जिसमें प्रमुख अन्य कवि होंगे मदन कश्यप, बलराज पांडेय, चंद्रकला त्रिपाठी, रामाज्ञा शशिधर, सच्चिदानंद विशाख, अनुज लुगुन, व्योमेश शुक्ल, श्रीप्रकाश शुक्ल, अलिंद उपाध्याय आदि।
इसके अलावा अंतिका प्रकाशन की पुस्तकों एवं पत्रिकाओं की प्रदर्शनी तीनों दिन लगेगी, जिसमें बनारस के छात्रों-अध्यापकों और साहित्य-प्रेमी पाठकों के लिए विशेष छूट की भी व्यवस्था रहेगी। अंतिका की कोशिश है कि दूर-दराज के लोगों को सुविधा से अच्छी किताबें उपलब्ध हों।
(गौरीनाथ। मैथिली-हिंदी के सुपरिचित कथाकार। नाच के बाहर और मानुस मशहूर कहानी संग्रह। हंस से लंबे समय तक जुड़े रहे। फिलहाल हिंदी में बया और मैथिली में अंतिका पत्रिका का संपादन। साथ ही अंतिका प्रकाशन के संचालक भी हैं। उनसे antika56@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)












:-c बहुत दूर हैं हम…
Lagta hai Gaurinayh ab lekhak na hokar kitab bechane wala BANIYA ban gaya hai. Badhai.
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