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रावलपिंडी में मिला फिक्सिंग का जिन्न

1 October 2012 No Comment

♦ शिवेंद्र कुमार सिंह

ब हम रावलपिंडी पहुंचे। रावलपिंडी इस्लामाबाद से काफी करीब बसा शहर। हमें इस बात का इल्म तक नहीं था कि इस शहर में इस सीरीज की सबसे सनसनीखेज खबर हमारा इंतजार कर रही है। सनसनीखेज खबरें अक्सर अर्धसत्य पर आधारित होती हैं। रावलपिंडी में भी ऐसा ही हुआ। अचानक पूर्व तेज गेंदबाज सरफराज नवाज ने मैच फिक्सिंग के भूत को जिंदा कर दिया, उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान और भारत की पूरी सीरीज फिक्स है। सरफराज नवाज ने इस खबर के प्रचार प्रसार के लिए बड़ा ही अनोखा तरीका अपनाया। जो भी पत्रकार उन्हें इंटरव्यू के लिए फोन करता, वो उसे अपने घर बुलाते। पहले शानदार मेहमान नवाजी करते – शराब पिलाते। फिर उनकी नाराजगी का सिलसिला इमरान खान की बातों से शुरू होता था। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बिग एंड यंग के नाम से मशहूर इस जोड़ी में सरफराज को बिग और इमरान को यंग कहा जाता था। सरफराज कमाल के गेंदबाज थे, लेकिन कामयाबी के लिहाज से वो हमेशा इमरान से काफी पीछे रहे। मुझे याद है कि जब हम सरफराज नवाज के घर जा रहे थे, तो हम बेहद डरे हुए थे। डर इस बात का था कि नवाज साहब रावलपिंडी से थोड़ी दूरी पर मरी नाम के एक पहाड़ी इलाके में रहते थे। हमारे पास इस्लामाबाद का वीजा तो था, पर ये नहीं पता था कि इस्लामाबाद के वीजा पर हम मरी जा सकते हैं या नहीं। फिर बस ये सोचते हुए हम उनके घर की तरफ बढ़ गये कि हमसे पहले भी तो कई हिंदुस्तानी पत्रकार उनके घर गये हैं, फिर हम क्यों नहीं।

सरफराज नवाज ने हमारा जबरदस्त इस्तेकबाल किया। नाश्ता कराने के बाद इंटरव्यू शुरू हुआ। नवाज कहने लगे कि अगर वो गेंद के साथ चोरी-छुपे छेड़छाड़ नहीं करते तो इमरान की विकेटों की संख्या आधी होती। पाकिस्तान में गेंद के साथ छेड़छाड़ करने को गेंद बनाना कहते थे। अब ये एक ऐसा आरोप था, जिसे साबित करना नामुमकिन था। इमरान से इस मुद्दे पर बातचीत किये बिना स्टोरी करना जायज नहीं था। फिर सरफराज नवाज ने अपने और इमरान के बॉलीवुड के साथ रिश्तों को लेकर यादें भी ताजा की।

फिर आये वो अपने असल मुद्दे पर, कहने लगे उनके पास दुबई से फोन आया था कि ये तो पूरी सीरीज ही फिक्स है। उन्होंने बोलना शुरू किया। खूब बोले। उनके हिसाब से ज्यादातर खिलाड़ी बिके हुए हैं। वो सब कुछ कैमरे पर बोल रहे थे, यानी बाद में ये कहने की गुंजाइश नहीं थी कि उन्होंने कहा कुछ और दिखाया कुछ और गया। बावजूद इसके ये एक ऐसी खबर थी, जिसे चलाना और न चलाना दोनों बेहद चुनौती भरा काम था। हम इंटरव्यू के बाद उनके घर से निकल गये। मेरे और अनिमेष दोनों के दिमाग में बस यही चल रहा था कि ये जिंदा बम जो हमारे हाथ में है उसे कैसे फोड़ा जाए। हमने बहुत दिमाग दौड़ाया, ऑफिस में बॉस से बातचीत की और स्टोरी होल्ड कर दी। इस इंटरव्यू के कुछ दिन बाद हम तमाम साथी पत्रकार एक साथ एक ही बड़ी कार में घूमने के लिए तक्षशिला गये थे। वहां से लौटते वक्त अचानक हमारे एक साथी पत्रकार (उनका नाम बताना ठीक नहीं होगा) के पास लगातार फोन आने शुरू हुए। फोन पर दूसरी तरफ से क्या बात हो रही थी ये तो नहीं पता चल रहा था, लेकिन ये अंदाजा लग गया था कि फोन दफ्तर से आया है और किसी स्टोरी को लेकर बातचीत हो रही थी। साथी पत्रकार बहुत खुल कर बात नहीं कर पा रहे थे। आखिर में उनकी बातचीत से ये साफ हो गया कि वो लोग सरफराज नवाज के इंटरव्यू पर कोई बड़ा कार्यक्रम करने जा रहे हैं। बड़ी बड़ी ब्रेकिंग न्यूज के साथ। जैसे ही साथी पत्रकार ने फोन रखा हम लोगों ने उन्हें समझाया कि वो इंटरव्यू हमारे पास भी है। उन्होंने पलट कर कहा कि तुम्हारे पास इंटरव्यू में वो नहीं होगा जो हमारे पास है। थोड़ा गुस्सा भी आया पर उन्हें फिर से समझाया गया कि सरफराज नवाज ने हर किसी से मैच फिक्सिंग पर जमकर बात की है। हमारे अलावा कार में मौजूद एक-दो और साथियों के पास नवाज का ये तथाकथित सनसनीखेज इंटरव्यू था। जब हम लोगों ने इस इंटरव्यू को दिखाने तक की पेशकश कर दी, तब साथी पत्रकार का माथा ठनका। टीवी की भाषा में अगर मैं लिखूं, तो परेशानी ये थी कि तब तक वो ये खबर अपने बॉसेस को बेच चुके थे। इस बेची गयी खबर को वापस लेने का मतलब था कि बॉस के गुस्से का शिकार होना। आखिरकार उन्होंने उस खबर को थोड़ा डाउनप्ले किया, और बहुत बड़ा विवाद होने से बच गया।

आज 6-7 साल के बाद पाकिस्तान की टीम पर मैच फिक्सिंग के आरोप आम तौर पर हर सीरीज के बाद लगते हैं, मुझे लगता है कि पाकिस्तान में कई सरफराज नवाज पैदा हो गये हैं। मैं ऐसा नहीं कह रहा कि पाकिस्तान की टीम मैच फिक्सिंग से अछूती है, पर ऐसा भी नहीं है कि पाकिस्तान की टीम के सारे खिलाड़ी बिके हुए हैं।

सरफराज नवाज के आरोप की सच्चाई तो अब तक जांची-परखी जाती है। लेकिन अगले ही मैच में पाकिस्तान की टीम जीत गयी। लाहौर के मैच का जिस अंदाज में अंत हुआ था, उससे ये कहना बेहद आसान हो गया था कि मैच फिक्स है। लेकिन रावलपिंडी में पाकिस्तान जीत गया, तो ये साबित हो गया कि पाकिस्तान की टीम सिर्फ हारने के लिए नहीं खेल रही। 330 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम मामूली अंतर से हार गया, सचिन की 141 रनों की बेहद शानदार पारी बर्बाद हो गयी।

यह शिवेंद्र सिंह की किताब यह जो है पाकिस्‍तान का एक अंश है
इससे पहले आपने पढ़ा था, वो ईद की ईदी… लंबी नमाजें… सेवइयों की झालर… और न “वहां” का वीजा आसानी से मिलता है, न “यहां’ काकल पढ़िए शाहरूख खान की कसम

(शिवेंद्र कुमार सिंह। वरिष्‍ठ खेल पत्रकार। एबीपी न्‍यूज (स्‍टार न्‍यूज का नया नाम) के विशेष संवाददाता। इलाहाबाद की पैदाइश और इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय से पढ़ाई-लिखाई। अमर उजाला से पत्रकारीय करियर की शुरुआत। जी न्‍यूज में भी रहे। उनसे kumarsingh.shivendra@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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