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मुंबई में मामी आज से, सिनेमा ही सिनेमा होगा

18 October 2012 No Comment
मुंबई डायरी
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उमेश पंत
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Umesh Pant

सजग चेतना के पत्रकार, सिनेकर्मी। सिनेमा और समाज के खास कोनों पर नजर रहती है। मोहल्‍ला लाइव, नयी सोच और पिक्‍चर हॉल नाम के ब्‍लॉग पर लगातार लिखते हैं। फिलहाल मुंबई में हैं। उनसे mshpant@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

♦ उमेश पंत

णपति बप्पा ने अलविदा कह दिया है। गणेश के इस बड़े उत्सव को देखकर लगता है कि मुंबर्इ में लोग मस्त रहना जानते हैं। गणेश उत्सव के तुरंत बाद ही निर्देशक उमेश शुक्ला की फिल्म ओह मार्इ गौड देखते हुए अभी अभी बीते गणपति उत्सव के जलसे के दृश्य जैसे रिवाइंड होते हैं। कांजुरमार्ग से अंधेरी जाते हुए पहले पवर्इ लेक, फिर जुहू बीच, फिर वर्सोवा बीच की तरफ न जाने कितने हजारों लोगों की जमात गणपति को दरिया में डुबा देने पर आमादा दिखती है। लोगों के अपने अपने गणेश एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते नजर आते हैं। ट्रकों में बड़े बड़े गणपति लादे लोग, ठेलों पर अपने छोटे छोटे गणपति ले जाते लोगों को हिकारत से देखते नजर आते हैं और ठेलों के इर्द गिर्द अपने छोटू गणपति को ले जाती जनता की आंखों में हीनभावना नजर आती है। सड़कों पे बेतहाशा भीड़ नजर आती है, ट्रैफिक जाम नजर आता है। डीजे पर बजते चिकनी चमेली सरीखे आइटम नंबर्स पर सड़कों पर थिरकते पिये अनपिये औरतों और मर्दों का भौंडा नाच नजर आता है और इस सब के बीच कोर्इ श्रद्धा, कोर्इ भक्ति नजर नहीं आती। शांति सदभाव जैसा कुछ नजर नहीं आता, बस एक उन्माद नजर आता है जिसमें इस तरह के जलसों का मूल मकसद कहीं खो गया सा महसूस होता है और अंत में समंदर के किनारे गणपति के जलसे के बाद फैली गंदगी नजर आती है। गंदगी जो समंदर की लहरों और आस पास बहती हवा में लंबे समय के लिए घुल जाती है। समझ नहीं आता कि क्या गणपति अगले बरस फिर ऐसी गंदगी में आना पसंद करेंगे। पर फिर समझ आता है कि वो आएंगे जरूर, मूर्तियों का वो बाजार उन्हें जरूर वापस खींच लाएगा। ये बाजार के पैदा किये हुए गणपति हैं, बाजार से आंखिर कितने वक्त तक दूर रह सकते हैं।

खैर इस पूंजी केंद्रित कम आध्‍यात्मिक जलसे के बाद अब एक दूसरा जलसा मुंबर्इ में दस्तक देने वाला है। इस जलसे की उत्सवधर्मिता का स्वरूप बिल्कुल अलहदा है। इस जलसे में जो होगा, वो स्क्रीन पर होगा और उसका असर लोगों के दिलो-दिमाग और शायद मानसिकताओं पर होगा। सिनेमा को पालते पोसते इस शहर में सिनेमा के इस उत्सव को लेकर कितना उत्साह है, ये कल से पूरे एक हफ्ते देखने को मिलेगा।

मामी मुंबर्इ के रास्ते पर है। बस आज यह हम तक पहुंच जाएगा। इस बार मिस नहीं करना है। मन बना लिया है। पिछली बार अंधेरी में रहते हुए भी, वाकिंग डिस्टेंस पर होते हुए भी न जाने क्यों एक भी फिल्म नहीं देखी। जीविका फिल्म फेस्टिवल और ओशियान्स को मोहल्ला लाइव और दैनिक भास्कर के लिए कवर किया था कभी। अखबारों की कटिंग्स और वैब्साइट्टस के लिंक्स ने अपना काम बखूबी किया था। मामी का प्रेस कार्ड इनिफनिटी से लगे सिनेमैक्स के किसी डैस्क में मेरा इंतजार करता रहा। मुफ्त में सैकड़ों फिल्में देखने के उस अनुभव को यूं ही फिजूल जाने दिया था पिछली बार। बेवकूफी की भी एक हद होती है, नहीं?

इस बार फिर मौका मिला है। कांजुरमार्ग से सीएसटी तक सीधी ट्रेन जाती है। सीएसटी के पास ही एनसीपीए और आर्इनौक्स इस बार के मेन वैन्यू में शामिल हैं। इसके अलावा लिबर्टी, गोदरेज, सिनेमेक्स सायान और सिनेमेक्स वर्सोवा में भी फिल्में स्क्रीन की जाएंगी।

कुछ दिनों पहले मामी के प्रेस कांफ्रेंस में श्याम बेनेगल और सुधीर मिश्रा को सुना। उन्होंने बताया था कि इस बार इंडियन गोल्ड कंपीटिशन के तहत भारतीय भाषाओं में बनी अलग-अलग डेब्यू डाइरेक्टर्स की तेरह फिल्में दिखायी जाएंगी। आप अगर फ्रेंच सिनेमा में रुचि रखते हैं, तो खुश हो जाइए। कुछ खास फ्रेंच फिल्में आपके लिए मामी में आपका इंतजार कर रही हैं। इटैलियन सिनेमा के इतिहास की झलकियां दिखाती कुछ फिल्में भी स्क्रीन की जाएंगी। अगर हमारे देश में फिल्म कल्चर के शुरुआती दौर की बनी बेआवाज फिल्मों का लुत्फ लार्इव आर्केस्‍ट्रा के साथ उठाना चाहते हों तो भी आप मामी के दरवाजे पे दस्तक दे सकते हैं।

इस बार रिलायंस इंटरटेनमेंट और अमेरिकन एक्सप्रेस साझे तौर पर मुंबर्इ फिल्म फेस्टिवल को प्रायोजित कर रहे हैं, इस फेस्टिवल का आयोजक हर बार की तरह मुंबर्इ एकेडमी औफ मूविंग इमेज यानी मामी हैं। यहां बहाने से बता दें कि मामी की स्थापना 1997 में मशहूर फिल्म निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने की थी और फिलवक्त जाने माने फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल इसे संचालित कर रहे हैं। यश चोपड़ा, सुधीर मिश्रा, अनुराग कश्यप, शबाना आजमी, जया बच्चन, अमोल पालेकर और फरहान अख्तर मामी के बोर्ड के सदस्‍यों में शामिल हैं।

आज 18 अक्टूबर से शुरू होकर 25 तारीख तक चलने वाले इस फेस्टिवल में देश विदेश के 200 से अधिक बेहतरीन फिल्मों की स्क्रीनिंग की जानी है। 18 तारीख की शाम सात बजे मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी जिन्होंने लंबे वक्त बाद इंगिलश विंग्लिश से बौलिवुड में वापसी की है, फेस्टिवल का उदघाटन करेंगी। 19 तारीख से सुबह सुबह 10 बजे पहली फिल्म स्क्रीन्स पर लग जाएगी और आखिरी फिल्म रात के साढ़े आठ बजे शुरू होगी। फेस्टिवल में शामिल होना चाहते हैं, तो आपको रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा, जिसका शुल्क आप मामी की वैबसाइट पर देख सकते हैं। लंबी कतारों को रोकने के लिए इस बार डैलीगेट पास के साथ साथ हर फिल्म के लिए अलग अलग पास की व्यवस्था होनी थी और औनलाइन प्रीबुकिंग की सुविधा भी दी जा रही थी। इस बाबत मामी की ओर से एक र्इमेल भेजा गया था, पर फिर एक और र्इमेल भेजकर बताया गया कि उस र्इमेल को इग्नोर कर दिया जाए। थोड़ा सा कन्फयूजन है, जो आज क्लियर हो जाएगा।

दिल्ली के ओशियांस में देखी गयी कर्इ फिल्मों की छाप अब भी जेहन में बिल्कुल ताजा ताजा सी है। इस फिल्म फेस्टिवल से भी कुछ ऐसी ही उम्मीदें हैं कि कुछ ऐसी ही छाप छोड़ने वाली फिल्में देखने को मिलेंगी। फिल्मों को जीने वाले मुंबर्इ में बेहतरीन फिल्मों को लेकर आने वाले इस उत्सव को पहली बार मनाने के उत्साह के साथ फिर मिलने का वादा रहा।

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