महिलाओं को नंगा करना यौन अपराध नहीं!

♦ नवेन्दु कुमार

sexual-harassment-at-workमहिलाओं की सुरक्षा और रेप जैसे घिनौने अपराध के लिए कानूनी सख्ती किए जाने की मांग तेज हो रही है। लेकिन गृह मंत्रालय की नजर में किसी लड़की या महिला का पीछा करना और कपड़े उतारना यौन अपराध की श्रेणी में नहीं आते हैं।

मंत्रालय का तर्क है कि इन्हें कोर्ट में परिभाषित करना और साबित करना कठिन होता है। इसलिए सरकार ने नए ‘आपराधिक कानून संशोधन बिल-2012’ में पीछा करने, कपड़े उतारने, नग्न परेड कराने और बाल मुंडवाने को यौन अपराध की अलग श्रेणी में नहीं रखने का फैसला किया है। मंत्रालय का कहना है कि पीछा करने, कपड़े उतारने जैसे कृत्यों पर उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी में विचार किया गया, जिसमें यह राय बनी कि ऐसे अपराधों को साबित करना मुश्किल है, इसलिए नए बिल में इसे शामिल न किया जाए। प्रताडना इत्यादि को परिभाषित करना कठिन और अदालत में स्थापित करना मुश्किल है, इसलिए इन्हें शामिल नहीं किया जा सकता।

नए बिल में महिला संगठनों की इस सिफारिश को भी दरकिनार कर दिया गया है कि यदि महिलाओं के प्रति अपराध सरकारी अधिकारियों द्वारा किया गया हो तो उच्च अधिकारियों और संस्थान को उत्तरदायी ठहराया जाये।

(वरिष्ठ पत्रकार नवेन्दु कुमार मौर्य टीवी के राजनीतिक संपादक एवं समाचार प्रमुख हैं)

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