कामों का बोझा बढ़ाने से बेहतर है एक ही चीज साधें

♦ पओलो कार्डिनी

मैं एक डिजाइनर और एक शिक्षक हूं। मैं मल्टीटास्क करता हूं, और अपने छात्रों को एक रचनात्मक और मल्टीटास्किंग डिजाइन प्रोसेस सिखाता हूं। लेकिन सच में ये मल्टीटास्किंग कितना सही और सटीक है?

हम थोड़ा मोनोटास्किंग के बारे में सोचते हैं। कुछ उदाहरण यह देखिए… (वीडियो में) यह मेरा मल्टीटास्किंग का नतीजा… (हंसी)… खाना पकाना, फोन पर बात करना और एसएमएस भेजना और कुछ तस्वीरें इंटरनेट पर डालना… इस शानदार बर्बेकुए की।

तो कोई हमें सुपरटास्कर की कहानी बताता है… दो फीसदी लोग जो मल्टीटास्किंग कर तो सकते हैं, लेकिन अपने बारे में कितने सतर्क रहते हैं? हमारा अपना सच क्‍या है? आपने पिछली बार कब अपने दोस्त की आवाज सुनी थी? यह मेरी परियोजना है और एक फ्रंट कवर की शृंखला है, अपनी सुपर हाइपर चीजों को हल्का करना… (हंसी)… (तालियां)… अपने सुपर हाइपर मोबाइल फोंस को हल्का करना उनके कार्य के तत्व तक।

एक और उदाहरण: आप कभी वेनिस गये हो? छोटी गलियों में खुद को खोना कितना खूबसूरत है उस द्वीप पर। लेकिन हमारी मल्टीटास्किंग दुनिया कुछ अलग है। हजारों सूचनाओं से भरी। ऐसे में कैसा रहेगा फिर से अपनी साहस की किशोर भावना को पाना?

मैं जानता हूं कि मोनो-टास्किंग के बारे में बात करना अजीब है, जब हमारे पास इतने सारे विकल्प हैं। लेकिन मैं फिर आपको कहता हूं केवल एक काम पर ध्यान दो या अपनी डिजिटल भावनाओं को बंद ही कर दो। ताकि आजकल, सब अपनी मोनो चीज बना सकें। क्यूं नहीं? तो अपनी मोनोटास्क वाली जगह ढूंढ लो… इस मल्टीटास्किंग दुनिया में। धन्यवाद।

पओलो कार्डिनी को जानें: www.paolocardini.com

अनुवाद : चेतना डी, संपादन : ओमप्रकाश बिसेन

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