राज, समाज और पानी पर IHC में बोलेंगे अनुपम मिश्र

इंडिया हैबिटैट सेंटर की स्थापना के 15 साल अगस्त 2013 में पूरे हो रहे हैं। इस मौके से सेंटर की तरफ से कुछ विशेष आयोजन किये जा रहे हैं, जिनमें देश के जानेमाने पर्यावरणविद अनुपम मिश्र का व्याख्यान भी शामिल है। विषय है – राज, समाज और पानी। विषय के बारे में श्री मिश्र का कहना है कि “पानी न बरसे तो मुश्किल, ठीक से बरस जाए तो मुश्किल”। इस दोतरफा मुश्किल के बीच फंसा है मनुष्य। ऐसे में राज और समाज की भूमिका क्या बनती है, पानी को लेकर भविष्य की चुनौतियां क्या हैं, इसी बारे में नये संदर्भों में अनुपम जी अपना व्याख्यान देंगे।

अनुपम मिश्र गांधीवादी पर्यावरणविद् हैं। उन्‍होंने बाढ़ के पानी के प्रबंधन और तालाबों द्वारा उसके संरक्षण की युक्ति के विकास से संबंधित महत्वपूर्ण काम किया है। अनुपम जी 2001 में दिल्ली में स्थापित हुए सेंटर फॉर एनवायरमेंट एंड फूड सिक्योरिटी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। उत्तराखंड के ‘चिपको आंदोलन’ में भी उनकी सहभागिता रही है। अनुपम जी की पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ ब्रेल लिपि सहित 13 भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है, जिसकी एक लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं। ध्यान रहे कि अनुपम जी ने इस किताब को शुरू से ही कॉपीराइट से मुक्त रखा है। वे राजेंद्र सिंह द्वारा स्थापित ‘तरूण भारत संघ’ के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे हैं। 1996 में उन्‍हें ‘इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। 2009 में उन्‍होंने टेड (टेक्नोलॉजी एंटरटेनमेंट एंड डिजाइन) द्वारा आयोजित सम्मेलन को संबोधित किया। 2011 में उन्‍हें देश के प्रतिष्ठित ‘जमनालाल बजाज पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश सरकार के ‘चंद्रशेखर आजाद राष्ट्रीय पुरस्कार’, कृष्ण बलदेव वैद पुरस्कार के अलावा भी कई अन्य सम्मानों से सम्मानित अनुपम मिश्र जी की ‘आज भी खरे हैं तालाब’, ‘राजस्थान की रजत बूंदें’, ‘साफ माथे का समाज’ समेत एक दर्जन से अधिक छोटी-बड़ी पुस्तकें प्रकाशित हैं।

आप सब अपनी जिज्ञासाओं और प्रश्नों के साथ आएं, अनुपम जी से संवाद करें।

राज, समाज और पानी

अनुपम मिश्र का विशेष व्याख्यान

शाम 7 बजे, मंगलवार, 6 अगस्त 2013

स्‍टेन ऑडीटोरियम, इंडिया हैबिटैट सेंटर, लोधी रोड, नई दिल्ली (प्रवेश गेट नंबर 3 से)

अच्छा लिखनेवालों की कीमत समाज में निर्धारित होती है!

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