दूरदर्शन के भ्रष्‍ट तंत्र ने रचा चरित्रहनन का चक्रव्‍यूह

न दिनों अखबारों में दूरदर्शन के ए‍क अधिकारी के खिलाफ ये खबरें लगातार छप रही हैं कि उन्‍होंने अपनी एक महिला कर्मी के साथ यौन दुर्व्‍यवहार किया है। यह भी कि प्रथमदृष्‍टया उन पर आरोप साबित हो चुका है और सजा के तौर पर उन्‍हें दूरदर्शन से हटा कर आकाशवाणी भेज दिया गया है। मूलत: भाषा (पीटीआई) से जारी की गयी इन खबरों में न तो पीड़िता का बयान है, न आरोपी का पक्ष है, न ही किसी जांच अधिकारी की दलील है। हमने इस पूरे मसले को अपनी तरह से देखने की कोशिश की तो जो तथ्‍य सामने आये, वे कई भयानक समीकरणों और साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं। तफसील में जाने से पहले हम मूल शिकायत से बात शुरू करते हैं, जो दूरदर्शन की एक कैजुअल महिला अधिकारी ने उक्‍त अधिकारी के खिलाफ की। सबसे पहले शिकायत पत्र की प्रतिलिपि देखें…

इस शिकायत पत्र में लिखा गया है कि राजशेखर व्‍यास दफ्तर में गाली-गलौज करते हैं और उनके दफ्तर का माहौल स्त्रियों के काम करने के लिए सही नहीं है। दूरदर्शन के महानिदेशक ने इस शिकायत को अतिशय गंभीरता से लेते हुए एक पूरी जांच टीम बिठा दी और एडीजी राजशेखर व्‍यास को बिना पूर्व सूचना दिये दफ्तर की अंतर्अदालत में खड़ा कर दिया गया। उनसे क्रॉस क्‍वेश्‍चनिंग की गयी, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी हुई। उनके सामने जो प्रश्‍नकर्ताओं के टोली बैठी, उनमें एक राजशेखर जी के रैंक का अफसर बैठा और बाकी उनके कनिष्‍ठ। उस टोली में जातीय और धार्मिक विविधता नहीं थी। इस टीम ने जो रिपोर्ट दी, उसे आगे मंत्रालय भेज दिया गया और मंत्रालय ने टिप्‍पणी की कि जांच रिपोर्ट अधूरी है और राजशेखर व्‍यास का पक्ष भी सही-सही सामने नहीं आया है। मंत्रालय ने वरीय अधिकारियों से जांच का आदेश दिया और जांच पूरी होने तक इस पूरे मसले की गोपनीयता बरततने और दिल्‍ली से बाहर उनका स्‍थानांतरण न करने की हिदायत दी। लेकिन न सिर्फ ये खबर मीडिया को लीक की गयी, उन्‍हें दूरदर्शन से निकाल कर आकाशवाणी का रास्‍ता दिखा दिया गया। आकाशवाणी में उनके बैठने की जगह भी मामूली किस्‍म की दी गयी और शौचालय की सार्वजनिक व्‍यवस्‍था के साथ उन्‍हें कॉपरेट करने को कहा गया।

बताया जाता है कि उनके खिलाफ इस पूरे मामले की जड़ दूरदर्शन में वर्षों से जमा भ्रष्‍टाचार है। जब से उन्‍हें नेशनल का प्रभार दिया गया था, निजी प्रोड्यूसरों को लेकर उनकी सतर्कता से कमीशनखोरी बाधित हो रही थी। जो राजशेखर व्‍यास को जानते हैं, उन्‍हें पता है कि पिछले 32 वर्षों के कार्यकाल में उन पर एक भी दाग नहीं है और वे भगत सिंह, विवेकानंद, पाश, उग्र जैसे व्‍यक्तित्‍वों की विरासत से खुद को जोड़ते रहे हैं। इन लोगों पर लिखी उनकी किताबें काफी चर्चित रही हैं और उनके पिता पंडित सूर्यनारायण व्‍यास आजादी के नायकों में से एक रहे हैं। इन 32 वर्षों में उनको दूरदर्शन में प्रताड़ित करने की अनेक कोशिशें हुईं, लेकिन वे हमेशा अपनी ईमानदारी से इनका मुकाबला करते रहे।

अब जबकि वे आकाशवाणी में हैं, उन्‍हें मानसिक रूप से मुश्किल में डालने वाले हालात पैदा किये जा रहे हैं। उनके चरित्रहनन की कोशिश की जा रही है। देखना ये है कि एक भ्रष्‍ट तंत्र एक ईमानदारी आदमी के खिलाफ अपनी कोशिशों में कितना कामयाब हो पाता है।

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