#AAP ने पकड़ा केंद्र सरकार का झूठ

भाजपा की केंद्र सरकार दिल्ली में अनधिकृत कालोनियों को नियमित करने से संबंधित अध्यादेश के बारे में लोगों को गलत सूचना दे रही है। मीडिया ने यह गलत खबर प्रकाशित की है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अनधिकृत कालोनियों को राहत देने के लिए संबंधित अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। जबकि सच्चाई यह है कि केंद्रीय मंत्रीमंडल ने न तो किसी अध्यादेश को मंजूरी दी है और न ही किसी तरह के कानून को लागू किया है।

नरेंद्र मोदी सरकार ने भी पूर्व शीला दीक्षित सरकार के स्वांग दोहराने की कोशिश की है। मौजूदा केंद्र सरकार ने भी केवल समय सीमा की तारीख बदल कर इन कालोनियों में रहने वाले गरीब लोगों को मूर्ख बनाने की कोशिश की है।

इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी है कि वह उन सभी अनधिकृत कालोनियों की सूची को सार्वजनिक करे, जिन्हें नियमित करने की घोषणा की गयी है। साथ ही नियमित होने की तारीख की घोषणा करने की भी चुनौती दी है।

सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार ने इन अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा से पहले की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है।

अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा से पहले इन तथ्यों पर गौर करना भी जरूरी है –

1) सबसे पहले, घर के मालिकों को कानूनन मालिकाना हक देने से पहले भूमि के उपयोग से संबंधित कानून में परिवर्तन किया जाना जरूरी है।

2) दिल्ली में ज्यादातर अनधिकृत कालोनियां डीडीए और एएसआई की भूमि के अलावा कृषि भूमि व वन भूमि पर बसी हैं। इन एजेंसियों के साथ भी इनकी जमीनों से संबंधित उपनियमों में परिवर्तन किया जाना जरूरी है। केंद्र सरकार ने क्या अब तक इस दिशा में किसी तरह के कदम उठाए हैं?

3) क्या केंद्र सरकार इसकी गारंटी दे सकती है कि उसकी इस घोषणाभऱ से इन कालोनियों में बिजली पानी के अलावा दूसरी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी हो जाएगी?

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने ऐसा कोई रोडमैप भी तैयार नहीं किया है कि अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की उसकी घोषणा शीला दीक्षित सरकार से किस तरह अलग है? शीला दीक्षित सरकार ने भी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा की थी। लेकिन जिस तरह इऩ कॉलोनियों के बाशिंदों को उनके घरों के कानूनन हक दिये बगैर प्रोविजनल सर्टिफिकेट बांटे गये, वह महज एक घोटाला ही साबित हुआ।

क्या शहरी विकास राज्य मंत्रालय बता सकता है कि इन अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की दिशा में उसकी क्या पहल होगी? और क्या वह इस बात से इनकार कर सकता है कि इन कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा महज चुनाव के पहले की जनता को लुभाने की नौटंकी भर है?

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *