खुले वेब मंचों के खिलाफ सरकार, विरोध करें

भारत सरकार ने 32 वेबसाइट को बंद कर दिया है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए। सरकार की दलील है कि इन वेबसाइट्स पर भारत विरोधी सामग्री परोसी जा रही थी। इन वेबसाइट्स का इस्‍तेमाल आईएसआईएस (इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया) जैसे आतंकी समूह कर रहे थे। सरकार का यह पक्ष और कार्रवाई न सिर्फ सतही है, बल्कि अभिव्‍यक्ति की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश भी है। एक खुली दीवार, जो हर आदमी के लिए उपलब्‍ध है – उस पर अच्‍छे लोग भी वॉल राइटिंग कर सकते हैं और बुरे लोग भी। उस दीवार को ढाहने से बेहतर बुरे वाक्‍यों को मिटाना होता। लेकिन हमारी सरकार ने थोड़ी बुरी आवाजों की आड़ में बहुतेरी अच्‍छी और सच्‍ची आवाजों को मार गिराया है। फेसबुक-ट्वीटर को सरकार ने फिलहाल बख्‍श दिया है क्‍योंकि इन जगहों पर सरकार खुद मौजूद है, अपने प्रचार के लिए, अपनी ‘नीतियों’ के प्रचार के लिए। सरकार की इस कार्रवाई का अगर हम आज विरोध नहीं करते हैं, तो कल हम सबकी आवाजें खत्‍म कर दी जाएंगी और हम कुछ नहीं कर सकेंगे। फेसबुक पर अभिनव आलोक ने इस तरफ हमारा ध्‍यान खींचा, तो हमारे भी कान खड़े हुए। ऐसे मित्र होने चाहिए, जो इस तरह के मामलों में हमारी नींद तोड़ें।

मूर्खताएं वाकई असीमित होती हैं! GitHub, SourceForge, Dailymotion, Internet Archive Weebly, Snipplr, Vimeo जैसी तमाम वेबसाइटों को ब्लॉक करने के फरमान को क्या समझा जाये? ये सब चाइल्ड पोर्नोग्राफी की वेबसाइटस नहीं हैं। इनमें से अधिकतर वो साइट्स हैं, जहां ओपन सोर्स सोफ्ट्वरेस, कोड, प्रोजेक्ट्स, ब्लॉग इत्यादि होस्ट किया जाता हैं। GitHub और ‪#‎SourceForge‬ तो ओपन सोर्स कम्युनिटी की रीढ़ की हड्डी हैं। इस पर हमला तो कोई जाहिल प्रशासन ही कर सकता है। अभिव्यक्ति और इंटरनेट के इस्तेमाल की आजादी को भी थोड़ी देर के लिए दरकिनार (जबकि ये बेहद मौलिक अधिकार हैं) कर दें, तो भी मुझे समझ नहीं आ रहा कि एक कम विकसित देश भला ओपन सोर्स के खिलाफ इतना बड़ा फैसला कैसे अफोर्ड कर सकता है, जबकि कोई भी ओपन सोर्स से जुड़ा इनिशिएटिव ऐसे ही देशो और इसके नागरिकों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है!

(जिन्हे ओपन सोर्स के बारे में पता नहीं. वो गूगल करें। यहां संक्षेप में यही कह सकता हूं कि यह ज्ञान और तकनिकी के लोकतंत्रीकरण और इसको पूंजीवाद से मुक्त करने का एक बड़ा हथियार है…)

[ध्यानार्थ : Avinash Das जी, आपके पास अपेक्षाकृत ज्यादा सुना जाने वाला मंच उपलब्ध है, इसे आगे बढ़ाएं…]

See these links: The Times of India 1 & The Times of India 2

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