किस्‍मत में बिछड़ना था! [गाना कैसे सुनें 1]

हमने पिछले दिनों एक फेसबुक सीरीज का जिक्र किया था, फोटो कैसे देखें। उस सीरीज के र‍चयिता थे, कबाड़खाना वाले अशोक पांडे। अब उसी तर्ज पर सैयद मो इरफान साहब की यह पेशकश देखें, गाना कैसे सुनें। इरफान साहब के पास टूटी हुई बिखरी हुई लय में ही सही, भरपूर खजाना है। आप खंगालेंगे तो अमीर हो जाएंगे: मॉडरेटर

प्रस्तुत गीत एक प्रश्नोत्तरी जैसा है। पुरुष स्वर में प्रश्न किये जा रहे हैं और स्त्री कातर स्वर में उत्तर दे रही है। यहां प्रयुक्त पुरुष स्वर सदा की तरह आत्मदया जगाने का प्रयास कर रहा है, किंतु स्त्री स्वर की कातरता उसकी दृढ़ता द्वारा आच्छादित हो जा रही है। गीतकार का नाम है, ओमप्रकाश भंडारी जो कि कमर जलालाबादी के नाम से ही जाने जाते हैं। इस गीत में अन्य गीतों जैसी सारगर्भिता का अभाव है, अर्थात एक ही भाव अंत तक बना रहता है। साधारण गीत की साधारण सी धुन और इसका साधारण सा ही पिक्चराइजेशन पता नहीं क्यों भला भला सा लग रहा है। इस गीत को यहां प्रस्तुत करते हुए ‘मुलाकात’ की ओर ध्यान जाना अनिवार्य था। संभवतः इसे धुन का दोष माना जाए कि गायक को ‘मूलाकात’ कहना पड़ रहा है लेकिन संगीत से अलग भी इसका पाठ करने पर यह लाइन मीटर में तभी बैठेगी जब ‘मूलाकात’ पढ़ा जाए। इस प्रकार के शब्द-प्रयोग से नव भाषा प्रेमी भ्रम में पड़ जाते हैं। उधर विछोह का कारण पुरुष के अनुसार किस्मत है। जबकि स्त्री उसे रूठकर जाता हुआ कह रही है। आगे भी वह जोर देकर कहती है, किस्मत ने मेरा साथ भले छोड़ दिया हो परंतु तू मेरा साथ न छोड़। पुरुष आगे स्त्री से यह भी कह रहा है कि वह अपने यादरूपी बैरियर से उसका रास्ता न रोके और ‘मुझे जाने दे, मुझे जाने दे’… लेकिन स्त्री उससे वापस आकर अपना हाथ पकड़ने को कह रही है। प्रश्न किसी चलते हुए इक्के या तांगे में हिलते हुए किये जा रहे हैं तथा उत्तर देने के लिए स्त्री जलती हुई आग के किनारे बैठी है।

रेटिंग ★★★ : इस गीत को 5 में से 3 स्टार देता हूं। जिसमें 1 स्टार तो ‘मूलाकात’ के लिए बनता ही है।

प्रस्‍तुति ➧ इरफान©, राम-रोटी-आलू वाले ➧ [गाना कैसे सुनें – 1, सस्ता संस्करण]

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