सलमान रुश्दी एक गुलाम लेखक है!

Religion, a mediaeval form of unreason, when combined with modern weaponry becomes a real threat to our freedoms. This religious totalitarianism has caused a deadly mutation in the heart of Islam and we see the tragic consequences in Paris today. I stand with Charlie Hebdo, as we all must, to defend the art of satire, which has always been a force for liberty and against tyranny, dishonesty and stupidity. ‘Respect for religion’ has become a code phrase meaning ‘fear of religion.’ Religions, like all other ideas, deserve criticism, satire, and, yes, our fearless disrespect.

Salman Rushdie

यह सलमान रुश्‍दी का बयान है, जो उन्‍होंने कल दिया। पेरिस से प्रकाशित होने वाली पत्रिका शार्ली एब्‍दो के दफ्तर पर हमले के बाद। रुश्‍दी के बयान पर हिंदी के लेखक कृष्‍ण कल्पित ने अपनी फेसबुक वॉल पर तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की। कृष्‍ण कल्पित की प्रतिक्रिया में छिपे निहितार्थ पर सामाजिक कार्यकर्ता और चिंतक समर अनार्य ने अपनी तरह से चिंता व्‍यक्‍त की। हम यहां कुछ टिप्‍पणियां हू-ब-हू चिपका रहे हैं: मॉडरेटर


कृष्‍ण कल्पित ➧ साम्राज्यवाद के सुरक्षा कवच में – डॉलर, स्कॉच और सुंदर स्त्रियों के घेरे में रहने वाले और नोबल पुरस्कार का इंतिजार करने वाले सलमान रुश्‍दी ने पेरिस के व्यंग्य-साप्ताहिक Charlie Hebdo के दफ्तर पर आक्रमण और बारह पत्रकारों की हत्या पर कहा है कि मध्यकालीन बर्बरता और आधुनिक हथियारों ने मनुष्य की स्वतंत्रता को खतरे में डाल दिया है! सलमान रुश्दी एक गुलाम लेखक है। ईसाइयत और डॉलर का गुलाम। मैं पेरिस हत्याकांड के साथ दुनिया को आधुनिकतम हथियार बेचने वाले मुल्‍क की सुरक्षा में रहने वाले सलमान रुश्दी के बयान की भी निंदा करता हूं! और खुदा से दुआ करता हूं कि इस्लाम का अपराधी सलमान रुश्दी अपनी स्वाभाविक मौत मरे और नोबल पुरस्कार पाने के बाद मरे!

समर अनार्य ➧ हिंदी के प्रख्यात लेखक कृष्‍ण कल्पित शार्ली एब्डो के पत्रकारों की निंदा के साथ साथ, साम्राज्यवाद के सुरक्षा कवच में – डॉलर, स्कॉच और सुंदर स्त्रियों के घेरे में रहने वाले और नोबल पुरस्कार का इंतिजार करने वाले सलमान रुश्‍दी की भी निंदा कर रहे हैं। वे “ईसाइयत और डॉलर” के इस गुलाम लेखक की मृत्यु कामना भी कर रहे हैं। पोस्ट के बाद की टिप्पणियों में उन्होंने बताया है कि रुश्दी ने अपनी जिंदगी में आयी हर औरत को खरीदा है। बिलकुल ठीक, स्त्रियों के पास दिमाग होता ही कहां है… चुनने की क्षमता तो और नहीं। ऐसे लोगों को पढता हूं तो हिंदी पे घिन नहीं तरस आता है! जिस भाषा के खैरख्वाह ऐसे हों, उसके हाल की क्या शिकायत!

पुनीत कोहली ➧ पहले रुश्दी की कमियों पर… 1) वो अमरीका में रहते हैं, अब ये तो कोई गुनाह नहीं है! जिसकी जहां मर्जी होगी, वहां रहेगा। आप भी भाजपा शासित राजस्थान में रहते हैं, कोई गुनाह करते हैं क्या? 2) वे सुंदर औरतों से घिरे रहते हैं… औरतें उन्हें चाहती हैं तो घिरे रहते हैं। किसी से जबरदस्ती तो संबंध नहीं बनाते? 3) उनके पास डॉलर हैं… भइया लाखों लोग उनकी किताबें खरीद कर पढ़ते हैं। रॉयल्‍टी का पैसा है। न तो ड्रग स्मगलिंग करते हैं, न किसी दमनकारी सरकार की नौकरी। वैसे हिंदी वाले अपनी दो चार हजार प्रतियां बिकने वाली किताबों की रॉयल्‍टी को लेकर कैसे कैसे सयापे करते हैं, आप बहतर जानते हैं।

हो सकता है आपको रुश्दी के उपन्यास न भाते हों, पर चर्चा उस पर होनी चाहिए न कि बेहद कमजोर पर्सनल हमले। मिलान कुंदेरा अपनी किताब “द टैस्टामेंट्स बिट्रेयड” में बार बार रुश्दी से उद्धरण लेते हैं। बड़ी लकीर को छोटा करने का ये तरीका अच्छा नहीं लगा।

कृष्‍ण कल्पित ➧ सलमान रुश्दी अमेरिका में रहता नहीं, एक तरह से नजरबंद है! औरतें रुश्दी को चाहती हैं या उनके डॉलरों को, आप बेहतर जानते होंगे! सलमान रुश्दी एक provocative लेखक है, महान नहीं! करुणा किसी भी लेखक को महान बनाती है, जिसका रुश्दी के यहां बेहद अभाव है! इस्लाम की आलोचना के लिए जब एक हिंदू नायपाल को नोबेल मिल सकता है तो रुश्दी को क्यों नहीं! रुश्दी एक पाला हुआ तोता है, ईसाईयों/साम्राज्यवादियों का! एक ऐसा बकरा, जिसे किसी आगामी बकरीद के लिए खिलापिलाकर तैयार किया जा रहा है!

समर अनार्य ➧ हाय हाय, हम रश्दी क्यों न हुए! बाकी कल्पित साहब, पद्मलक्ष्मी जैसी सुपरमॉडल औरएक्ट्रेस को ‘खरीद’ पाना किसी लेखक के बस की बात नहीं है। आप जैसे कुंठित चवन्निया लेखक को छोड़ि‍ए ही, सलमान रश्दी जैसे सेलेब्रिटी की भी नहीं। बाजार समझिए, हिंदी को तो कूड़ाघर बना ही दिया है आप जैसों ने।

पुनीत कोहली ➧ कृष्‍ण कल्पित जी, औरतें उन्होंनें खरीदी हैं, इस स्थापना के पीछे आपके पास तथ्य होंगे… मुझे तो यह बात अरुचिकर लगी। आपको उनके लेखन में कहां लगा कि वे साम्राज्यवाद का बचाव करते हैं? ईसाई और साम्राज्यवादी क्या एक ही होते हैं (जैसा आपकी टिप्पणी से प्रतीत होता है)?

समर अनार्य ➧ बाकी पुनीत कोहली के पास प्रेम के दस्तावेज न होंगे, पर आपके पास तो पूरी सेल डीड ही होगी – सलमान रुश्दी ने कितने में खरीदा किस महिला को? सौदा आप ही करवाते थे क्या कल्पित साहब?

पुनीत कोहली ➧ मेरे पास उनके प्रेम संबंधों पर संदेह करने की कोई वजह नहीं है। न मुझे उनके बेडरूम में झांकने में कोई दिलचस्पी है। मेरी राय में, वे कितनी औरतों से संबंध रखते हैं और किन शर्तों पर, यह विमर्श का हिस्सा नहीं होना चाहिए कृष्‍ण कल्पित जी।

कृष्‍ण कल्पित ➧ जी, ठीक कह रहे हैं आप पुनीत कोहली जी! नायपाल ने नोबल मिलने पर एक रेडियो साक्षात्कार में कहा था कि मैं स्वीडिश अकादमी और उन वेश्याओं का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मुझे सुकून बख्शा!

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