हिंसा के विरुद्ध कला के बढ़ते कदम

♦ अरुण माहेश्‍वरी

फ्रांस में जो हुआ, वह दुनिया के किसी भी कोने में कभी भी हो सकता है। भारत में जो आज जिस प्रकार धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र आदि के नाम पर संगठित रूप से तमाम असहिष्णुताएं पैदा की जा रही है, उसमें ऐसी घटनाएं तो जैसे हमारी नियति में बदा है। इन हालात में लेखकों, संस्कृतिकर्मियों के एक ऐसे व्यापक मंच की जरूरत है, जिसका एक मात्र मुद्दा होगा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा। नि:शर्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला समाज में अन्य सभी स्वतंत्रताओं को एक कोरा भ्रम बना देता है।

इस मंच की घोषित रूप से कोई राजनीतिक संबद्धता नहीं होगी। यह सरकारी-गैर-सरकारी, सत्तापक्ष और विरोधपक्ष – किसी भी कोने से लेखकों, कलाकारों की अभिव्यक्ति की आजादी पर होने वाले हमलों का विरोध और प्रतिरोध करने के लिये प्रतिबद्ध रहेगा। इसके अलावा इसकी दूसरी कोई प्रतिश्रुति नहीं होगी।

अभी इस मंच को फ़ेसबुक के एक साझा पृष्ठ के रूप में कम से कम पांच सौ सदस्यों की सहमति से शुरू किया जा सकता है। दुनिया में जहां कहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले की कोई भी वारदात हो, उसके प्रतिवाद में इस पृष्ठ पर टिप्पणियां प्रसारित की जाएगी।

इसका लक्ष्य बहुत सीमित और स्पष्ट होना होगा। इसमें अन्य राजनीतिक आर्थिक प्रसंगों को तरजीह नहीं दी जाएगी। हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के सवाल से प्रतिबद्ध होंगे, इस समझ के साथ कि स्वतंत्रता का एक रूप ठीक वैसे ही दूसरे को शासित करता है जैसे शरीर का एक अंग दूसरे को करता है। जब भी किसी एक स्वतंत्रता पर प्रश्न उठाया जाता है तो स्वतंत्रता के सामान्य रूप पर प्रश्न उठा दिया जाता है। जब स्वतंत्रता के एक रूप को खारिज किया जाता है, तो सामान्य तौर पर स्वतंत्रता को ही खारिज कर दिया जाता है। हम ऐसी ही एक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में आवाज उठाएंगे।

इस सिलसिले में अशोक कुमार पांडेय ने यह प्रस्ताव किया है कि क्यों न यह काम उनके द्वारा संचालित फेसबुक वॉल ‘हिंसा के विरुद्ध कला’ के जरिये इस काम को आगे बढ़ाया जाए। हमें उनका प्रस्ताव सकारात्मक लगता है। उनके इस सामूहिक वॉल से पहले से ही कई लेखक कलाकार जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह प्रस्ताव भी दिया है कि वे इस मंच की समझ का दस्तावेज तैयार करके उसके मसौदे को सभी मित्रों को उपलब्ध कराएंगे। हमारा उनसे आग्रह है कि इसे तमाम प्रकार की हिंसा के प्रतिवाद के मंच तक फैलाने के बजाय सिर्फ लेखकों-कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के मंच तक ही सीमित रखा जाए। वे जल्द ही अपना मसौदा हम सब तक प्रेषित करेंगे। हम सभी मित्रों से उम्मीद करते हैं कि वे भी इस मुहिम को आगे बढ़ाने में सहयोगी बनेंगे।

इसके लिए जरूरी है कि इस या ऐसे ही किसी वक्तव्य को अधिक से अधिक मित्र शेयर करके इस प्रकार के साझा पृष्ठ के लिए एक वातावरण तैयार करें और कम से कम पांच सौ सदस्यों के समूह के रूप में इसे शुरू किया जाए।

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Arun Maheshwari
(अरुण माहेश्‍वरी। मार्क्‍सवादी आलोचक। राजनीतिक टिप्‍पणीकार और स्‍तंभ लेखक। कई किताबें प्रकाशित, जैसे – साहित्‍य में यथार्थ : सिद्धांत और व्‍यवहार, पाब्‍लो नेरुदा : एक कैदी की खुली दुनिया, आरएसएस और उसकी विचारधारा, पश्चिम बंगाल में मौन क्रांति, नयी आर्थिक नीति कितनी नयी, एक और ब्रह्मांड, सिरहाने ग्राम्‍शी। उनसे arunmaheshwari1951@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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