बापू हम शर्मिंदा हैं! तेरे कातिल जिंदा हैं!!

गोडसे मंदिर निर्माण पर प्रतिक्रिया : सिधौली, सीतापुर में हुई सभा

गुजरात में सरदार पटेल की विशाल लौह प्रतिमा लगाने और पटेल जयंती को राष्‍ट्रीय एकता दिवस घोषित करने वाली मौजूदा केंद्र सरकार से यह सवाल पूछा जाना जरूरी है कि गांधी हत्या के मामले में उसका क्या नजरिया है? गोडसे अगर राष्‍ट्रभक्त है, तो गांधी जी क्या हैं? गांधी जी की हत्या में लगे लोग कौन थे? किन संगठनों से जुड़े थे, और किस जहरीली विचारधारा से पनपे थे। यह बात शनिवार को तहसील सिधौली में शहीद स्मारक स्थल पर आयोजित विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा आयोजित संगोष्‍ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कही।

सोशलिस्ट पार्टी इंडिया, नफरत एवं हिंसा के खिलाफ मानवीय एकता, जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी और अखिल भारतीय प्रबुद्ध मंच के संयुक्त प्रयास से गोष्‍ठी आयोजित की गयी, “बापू हम शर्मिंदा हैं, आपके कातिल जिंदा हैं”। गोष्‍ठी को जनमुक्ति संघर्ष वाहिनी के राष्‍ट्रीय नेता अशोक ने संबोधित करते हुए कहा गांधी जी की हत्या आजादी के केवल साढ़े पांच महीने के बाद 30 जनवरी 1948 को कर दी गयी। लेकिन इसके पहले गांधी जी की हत्या की पांच और कोशिशें हो चुकी थीं, आजादी के पहले चार बार और आजादी के बाद दो बार। गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे सहित अन्य साजिशकर्ता इन कोशिशों में लंबे समय से लगे थे। 4 फरवरी 1948 को सरदार पटेल ने अपने मन की बात लिखकर स्‍पष्‍ट की थी – “राष्‍ट्रीय स्वयं सेवक संघ की करतूतों से व्यक्तिगत हत्या आर हिंसा का वातावारण निर्माण हुआ और उसी के कारण गांधी जी की हत्या हुई।” गांधी के हत्यारे गोडसे को राष्‍ट्रभक्त बताने और उसके स्मारक मंदिर बनाने के जरिये जहरीली राष्‍ट्रविरोधी धारा ने अपने छद्म को उतार फेंका है और अपने असली राष्‍ट्र विरोधी-मानवता विरोधी चेहरे को बेनकाब किया है।

Sandeep Pandey
गोष्‍ठी में अपनी बात रखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय

गोष्‍ठी को संबोधित करते हुए सोशलिस्ट पार्टी इंडिया के राष्‍ट्रीय उपाध्यक्ष एवं रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ संदीप पांडेय ने कहा कि देश में विभाजनकारी शक्तियों के हौसले बेहद बुलंद हैं, लेकिन इन फासिस्टवादी शक्तियों के हौसले चूर-चूर किये जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि डॉलर पर जार्ज वाशिंगटन की तस्वीर और भारत के नोट पर गांधी की तस्वीर नहीं होगी, तो किसकी होगी। मोदी की होगी या गोडसे की? अगर नोट से गांधी की तस्वीर हट गयी, तो देश में भष्‍टाचार बढ़ जाएगा। देश के भष्‍टाचार पर गांधी की नजर है। लेकिन आज के भाषणों से यह भरोसा हो गया है कि गोडसे का मंदिर नहीं बनेगा।

शिक्षाविद् बाबूराम पांडेय ने कहा कि महात्मा गांधी मरकर भी नहीं मरे। गोडसे मारने के साथ ही मर गये। लेकिन जब तक दुनिया रहेगी, गांधी जिंदा रहेंगे। गोडसे का मंदिर बनाने की घोषणा करने वाले लोग किसी लायक नहीं रह जाएंगे। हमारे देश में हिंदुत्वादी उन्माद को उभारने की कोशिशें हो रही है, जो प्राचीन काल से चली आ रही भारतीय मान्यताओं और गांधी के विचारों से अनुप्राणित राष्‍ट्रीय आंदोलन की धर्म बहुलतावादी परंपरा के सामने बड़ी चुनौती है। साहित्यकार डॉ रिजवान अंसारी ने कहा कि हमारा मुल्क सदियों से यकजहती, मेल मोहब्बत में यकीन रखने वाला देश है। कोई इख्तेलाफ नहीं। हिंदुस्तान में किसी हिंदू बंदे ने अपने बेटे का नाम नाथूराम के नाम पर रखने की कोशिश नहीं की और कोई मुसलमान अपने बेटे का नाम यजीद नहीं रखता। गोडसे ने इंसानियत पर वार किया था, हिंदुस्तान के गरीबों के हक पर हमला किया था, उसका मंदिर बनाने का मतलब जालिम का मंदिर बनाना है।

उन्नाव से आये नसीर अहमद ने गोष्‍ठी को संबोधित करते हुए कहा गांधी केवल राष्‍ट्रपिता नहीं, विचारधारा हैं। गांधी पूरे विश्‍व की हस्ती हैं। उनके हत्यारे का मंदिर बनाना कितना शर्मनाक है। अच्छाई को जिंदा रखने के लिए खून में गर्मी आनी चाहिए। सत्य के लिए आवाज उठायी जानी चाहिए। नगर पंचायत सिधौली के पूर्व अध्यक्ष डॉ अवधेश श्रीवास्तव ने कहा कि आज देश उस मुहाने की तरफ जा रहा है, जहां खतरे ही खतरे हैं। गोडसे के मंदिर बनाने के हालात पैदा हो गये हैं। उन्होंने सीतापुर में मंदिर बनाये जाने की घोषणा पर गहरा एतराज जताया।

सामाजिक कार्यकर्ता शरद जायसवाल ने कहा कि गोडसे संदर्भ में पहली प्रतिक्रिया पूरे देश में सिधौली से हो रही है। देश में जो गोडसे मंदिर बनाने के तमाशे कर रहे हैं, उनकी ताकत बढ़ गयी है। आज वे गांधी की शवयात्रा निकालने तक उतर आये हैं। सोशलिस्ट पार्टी के राष्‍ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट डॉ शुऐब ने कहा कि हमें बचपन से पढ़ाया जाता रहा कि एक था राजा। तो प्रजा भी तो होगी। हम लोग नये राजाओं की जद में आ गये हैं। गोष्‍ठी को राजवीर सिंह यादव, रिहाई मंच के राजीव यादव, रोहित सिंह, मुन्नालाल आदि ने संबोधित किया। संचालन अनुराग आग्नेय ने किया। इस मौके पर बुद्धप्रकाश, रामसागर, रामनाथ, आरडी वर्मा, रामकुमार, उमेश बाजपेयी, अंशु तिवारी सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

[अनुराग आग्नेय की रिपोर्ट]

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