अल्लाह, इन्हें समझ दो! ये पागल हैं!!

➧ नाज़िश अंसारी

ज मैं खुद “अलिफ़” से “ये” तक खंगालना चाहती हूं। ढूढना चाहती हूं ऐसी कोई भी आयत, जो यूं धडाधड़ चलती गोलियों और धमाधम गिरती लाशों का समर्थन करती है। मैं जानती हूं ऐसी सरफिरी सोच को जगह गर कुरान के किसी भी कोने में मिली होती, तो आज दुनिया का हर बच्चा मुसलमान होता या फ़िर लाशों से पट के सड़ के फट जाती ये ज़मीन। 500 ईसा पूर्व ही। उस शख्स के ज़माने में, जिसने इस्लाम का तार्रुफ़ दुनिया से कराया।

कैसे कराया?

अपनी शख्सियत से। अपनी बातों से। अपनी शाइस्‍तगी से। नर्मी से। मैंने तो कहीं नहीं पढा कि हज़रत मुहम्मद सल्लललाहू अलेही वसल्लम के एक हाथ में कुरान था और दूसरे हाथ में बंदूक (तलवार)।

एक बार उनसे अल्लाह ने (मुझे याद नहीं आ रहा) जाने किस शहर (वासियों) या मुल्क़ के रेफ्रेंस (संदर्भ) में पूछा था कि मेरे रसूल कहो तो तुम्हारे ऊपर किये ज़ुल्म की इन्हें मैं सज़ा दूं? ये दोनों पहाड़ि‍यां आपस में मिलाकर इन्हें फना कर दूं? …(जैसा कि वो शहर दो पहाड़ि‍यों के बीच बसा था और मुहम्मद (सल्ल.) को इस्लाम के प्रचार-प्रसार में यहां तमाम जुल्म का सामना करना पड़ रहा था।)

उनका जवाब था, नहीं मेरे रब इन्हें सज़ा मत दीजिए। ये नादान हैं। इन्हें माफ़ कर दीजिए और समझ दीजिए।

और आज क्या हुआ पेरिस में या कल पेशावर में? बदला। जबकि मुहम्मद (सल्ल.) का कहना था – बदला लेने से बेहतर है माफ़ कर देना।

किया माफ़? नहीं। बल्कि किया साफ़। एक कार्टून बनाये जाने से (वो भी उस शख्स का, जिसकी कोई भी तस्वीर मौजूद नहीं) इस्लाम का झंडा गिरा जा रहा था! मुहम्मद (सल्ल.) की बेइज़्ज़ती हुई जा रही थी!!

मैं पूछना चाहती हूं… यूं अपमान के बदले के नाम पर मुहम्मद (सल्ल.) की, उनके आदर्शों की इज़्ज़त दुनिया भर में बढ़ गयी क्या? यूं क़त्लेआम से मुहम्मदी अलम (झंडा) और ऊंचा हो गया क्या?

उफ्फ्फ्फफ़… मैं भी किन झक्कियों से तर्क-वितर्क की उम्मीद लिये बैठी हूं! मुझे शक़ ही नहीं, पूरा यक़ीन है कि इन पागल सनकियों का कोई (या हर गिरोह का कोई एक) सरदार खुद को नबी मान बैठा है। और मरने-मारने के 501 तरीक़े वाली कोई अवैध और ब्लैक में मिलने वाली किताब को कुरान (नउज़ूबिल्लाह) माना जा चुका है।

(ओ अल्लाह!! इन्हे समझ दो। ये नादान नहीं, पागल हैं। इनकी दिमागी हालत पर कुछ करम करो…

ओ अल्लाह सुनो ना! प्लीज़!!)

Nazish Ansari
नाज़िश अंसारी। स्‍वंतत्र पत्रकार। यूपी बोर्ड (इलाहाबाद) और डॉ आरएमएल अवध युनिवर्सिटी, फ़ैज़ाबाद से पढ़ाई-लिखाई। उनसे nazish.ansari2011@gmail.com पर संपर्क करें।

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