जो सच सच बोलेंगे, मारे जाएंगे!

असहमत होने पर IBN7 ने पंकज श्रीवास्‍तव को निकाला

जो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे, मारे जाएंगे। कठघरे मे खड़े कर दिये जाएंगे, जो विरोध में बोलेंगे। जो सच सच बोलेंगे, मारे जाएंगे। बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि किसी की कमीज हो, उनकी कमीज से ज्यादा सफेद। कमीज पर जिनके दाग नहीं होंगे, मारे जाएंगे। धकेल दिये जाएंगे कला की दुनिया से बाहर, जो चारण नहीं होंगे। जो गुण नही गाएंगे, मारे जाएंगे। धर्म की ध्वजा उठाने जो नहीं जाएंगे जुलूस में, गोलियां भून डालेंगीं उन्हें… काफिर करार दिये जाएंगे। सबसे बड़ा अपराध है इस समय निहत्थे और निरपराधी होना। जो अपराधी नही होंगे, मारे जाएंगे।
राजेश जोशी

कल आइबीएन-7 चैनल से भाई पंकज श्रीवास्‍तव को अचानक बगैर कोई नोटिस दिए एसोसिएट संपादक के पद से सिर्फ इसलिए बर्खास्‍त कर दिया गया क्‍योंकि उन्‍होंने चैनल के संपादक सुमित अवस्‍थी को मोबाइल पर एक मैसेज भेजकर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ़ चैनल की नीति का विरोध किया था और इसके पीछे उमेश उपाध्‍याय के संपादकीय प्रभारी होने की आशंका जतायी थी जो बिजली मीटर बनाने वाले भाजपा के भ्रष्‍ट नेता सतीश उपाध्‍याय का भाई है। पत्रकारों को मनमाने ढंग से बर्खास्‍त किये जाने की इस घटना के विरोध में वृह‍स्‍पतिवार शाम 4 बजे दिल्‍ली के प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया के लॉन में एक प्रेस वार्ता रखी गयी है, जिसमें पंकज श्रीवास्‍तव घटना का पूरा विवरण रखेंगे और मित्रों को संबोधित करेंगे। अनुरोध है कि भारी संख्‍या में प्रेस क्‍लब में 4 बजे जुटें और पंकज भाई के हाथ मज़बूत करें।
अभिषेक श्रीवास्‍तव

PSपंकज श्रीवास्‍तव ♦ और मैं आईबीएन 7 के एसोसिएट एडिटर पद से बर्खास्त हुआ! सात साल बाद अचानक सच बोलना गुनाह हो गया!!

कल शाम आईबीएन 7 के डिप्टी मैनेजिंग एडिटर सुमित अवस्थी को दो मोबाइल संदेश भेजे। इरादा उन्हें बताना था कि चैनल केजरीवाल के खिलाफ पक्षपाती खबरें दिखा रहा है, जो पत्रकारिता के बुनियादी उसूलों के खिलाफ है। बतौर एसोसिएट एडिटर संपादकीय बैठकों में भी यह बात उठाता रहता था, लेकिन हर तरफ से ‘किरन का करिश्मा’ दिखाने का निर्देश था। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय पर बिजली मीटर लगाने को लेकर लगे आरोपों और उनकी कंपनी में उनके भाई उमेश उपाध्याय की भागीदारी के खुलासे के बाद हालात और खराब हो गये। उमेश उपाध्याय आईबीएन 7 के संपादकीय प्रमुख हैं। मेरी बेचैनी बढ़ रही थी। मैंने सुमित को यह सोचकर एसएमएस किया कि वे पहले इस कंपनी में बतौर रिपोर्टर काम कर चुके हैं, मेरी पीड़ा समझेंगे। लेकिन इसके डेढ़ घंटे बाद मुझे तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया। नियमत: ऐसे मामलों में एक महीने का नोटिस और ‘शो कॉज’ देना जरूरी है।

पिछले साल मुकेश अंबानी की कंपनी के नेटवर्क 18 के मालिक बनने के बाद 7 जुलाई को ‘टाउन हॉल’ आयोजित किया गया था (आईबीएन 7 और सीएनएन आईबीएन के सभी कर्मचरियों की आमसभा), तो मैंने कामकाज में आजादी का सवाल उठाया था। तब सार्वजनिक आश्वासन दिया गया था कि पत्रकारिता के पेशेगत मूल्यों को बरकरार रखा जाएगा। दुर्भाग्य से मैंने इस पर यकीन कर लिया था।

बहरहाल मेरे सामने इस्तीफा देकर चुपचाप निकल जाने का विकल्प भी रखा गया था। यह भी कहा गया कि दूसरी जगह नौकरी दिलाने में मदद की जाएगी। लेकिन मैंने कानूनी लड़ाई का मन बनाया ताकि तय हो जाए कि मीडिया कंपनियां मनमाने तरीके से पत्रकारों को नहीं निकाल सकतीं।

इस लड़ाई में मुझे आप सबका साथ चाहिए। नैतिक भी और भौतिक भी। बहुत दिनों बाद ‘मुक्ति’ को महसूस कर रहा हूं। लग रहा है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की युनिवर्सिटी रोड पर फिर मुठ्ठी ताने खड़ा हूं।


पंकज श्रीवास्तव। वरिष्ठ टेलीविजन पत्रकार। स्टार न्यूज, सहारा समय के बाद आईबीएन 7 से जुड़े। और अब नयी परिस्थितियों में नौकरी-मुक्‍त। आंदोलनी रुझान वाले पंकज एक समय में रंगकर्मी भी रहे हैं। उनसे drpankaj.samvad@gmail.com पर संपर्क करें।

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