पता है, अरबपति [बिलेनियर्स] कैसे बनते हैं?

➧ शीतल प्रसाद सिंह

प्रचलित और काफी हद तक सही अवधारणा यह है कि “अपराध” या सामाजिक नियमों को तोड़कर या मजलूमों की लाश पर एंपायर तैयार होते हैं, पर तकनीक के अस्वाभाविक विकास ने और व्यापार के तौर-तरीकों के विश्लेषण और एक ज्ञान के रूप में परिवर्तित हो जाने के बाद इसके अपवाद पैदा होने शुरू हो गये। तकनीकी खोजों के चतुराईपूर्ण इस्तेमाल से नये व्यापारिक एंपायर सामने आये, जिन्होंने अपराध और पैसे के संबंध को चुनौती दी।

पर भारत जैसे देशों में अभी पहले वाले सिस्टम यानि अपराध करके सफल होने की परंपरा ही उत्तरोत्तर बढ़ रही है। इसे काफी सामाजिक स्वीकृति भी प्राप्त है। वजह यह है कि हम अभी भी बहुत हद तक एक सामंती समाज हैं, जहां जाति क्षेत्र या धर्म की पहचान समाज के कुछ को बहुतों के खिलाफ अन्याय का लाइसेंस देती है।

हम किसी रिक्शावाले को किसी दबंग द्वारा पीट दिये जाने, किसी लड़की पर फब्ती कसे जाने या किसी चाय की दुकान पर दस-बारह साल के बच्चे को बाल मजदूर पा कर डिस्‍टर्ब नहीं होते। न ही किसी को “चमार” या “चूड़े” कह दिये जाने पर! हम यह सब सहजता से लेने के आदी हैं, वैसे ही यह भी कि दिल्ली में रिलायंस को 28000 CCTV कैमरों का बिना टेंडर आर्डर मिल जाने पर (यह जानते हुए भी कि रिलायंस कैमरे नहीं बनाता, सिर्फ दलाली खाएगा) हमें “की फरक पैंदा ऐ”।

2002 की ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी की रिपोर्ट, जो शेयर बाजार के हजारों करोड़ के घोटाला नं 2 पर थी, ने सातवें नंबर पर गौतम अडानी को अपराधी दर्ज किया हुआ है। अटल जी की NDA की सरकार के जमाने में। आज वही अडानी प्रधानमंत्री के बगल के कमरे में अमेरिका/आस्ट्रेलिया में ठहरता है और दोस्तों को सेल्‍फी भेजता है और किसी को कोई फर्क नहीं!

हमारा कोई सेठ कहीं भी अपने उत्पाद से नहीं जाना जाता, जैसे स्टीव Apple से या बिल गेट्स Windows से, पर वह अपने खजाने की वजह से Forbs में दुनिया के पहले दस तक पहुंचा हुआ है, जो सरकार से मिल कर दलाली से इकट्ठा हुआ है और इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता!

Sheetal
शीतल प्र सिंह। वरिष्‍ठ पत्रकार और व्‍यवसायी। सामाजिक आंदोलनों से जुड़ाव। चौथी दुनिया की शुरुआती टीम के अहम हिस्‍सा। फिलहाल Simpex Pharma P Ltd के डायरेक्‍टर। उनसे singh.p.sheetal@icloud.com पर संपर्क किया जा सकता है।

You may also like...