दिल्‍ली में क्‍यों बननी चाहिए आपकी सरकार?

➧ संजीव क्षितिज

दिल्‍ली में चुनावी गर्मी अपने शवाब पर है। सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। लेकिन सर्वे बता रहे हैं कि आम आदमी पार्टी तमाम विरोधी पार्टियों पर भारी पड़ रही है। आम आदमी पार्टी को लगभग प्रचंड बहुमत की तरफ सर्वे इशारा कर रहे हैं। ऐसा क्‍यों है? लोकसभा में बीजेपी को अपनी सातों सीटें देने वाली दिल्‍ली को अचानक क्‍या हो गया? इसकी तह में जाने की कोशिश की है, वरिष्‍ठ पत्रकार संजीव क्षितिज ने, अपने “मन की बात” से: मॉडरेटर

मैं क्यों चाहता हूं कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी जीते :

1) ताकि प्रधान सेवक को संदेश दे सकूं कि सेवा की विनम्रता का उनका मुखौटा दरकने लगा है और उसमें मगरूर शासक के अहंकार की लकीरें उभरती दिखाई दे रही हैं।

2) ताकि प्रधान सेवक को बता सकूं कि देश उनके ‘नसीब’ से नहीं, सवा सौ करोड़ कथित बदनसीब मेहनतकश आम लोगों के कर्म और गाढ़े पसीने से चलता है।

3) ताकि चीखकर कह सकूं कि मैं दिल्ली के चर्चों पर दो महीनों में पांच की गति से हो रहे हमलों के बारे में कम से कम एक बार श्रीमुख से ‘मन की बात’ सुनना चाहता हूं।

4) ताकि प्रधान सेवक को बता सकूं कि सर्वग्रासी भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए अगर वह अब भी ठोस और जमीनी कदम उठाते दिखाई नहीं दिए तो लोग उसी तरह एक और विकल्प तैयार कर सकते हैं जिस तरह कुछ महीने पहले कांग्रेस के विकल्प की तौर पर उन्होंने आपको गले लगाया था।

5) ताकि सिब्बलों, सिंघवियों, झाओं के घमंड, बड़बोलेपन और आत्मश्लाघा को चकनाचूर करने के बाद पात्राओं, कोहलियों, लेखियों, नटराजनों, जेटलियों सरीखे उनके स्थानापन्न सत्ताधारी नुमाइंदों को विरोधियों को बोलने नहीं देने की उनकी अलोकतांत्रिक धृष्टता, दर्प से चूर कुटिलता, बातों को जनहित-विरोधी तरीके से घुमाने की धूर्तता और लोगों को बेवकूफ समझने की मतिभ्रष्टता का जवाब दे सकूं।

6) ताकि दोनों बड़े राजनीतिक प्रतिष्ठानों की नितांत भ्रष्ट साठगांठ से चल रही कॉरपोरेट कंपनियों की लूट और निरंकुशता पर लगाम कसने की शुरुआत सबसे पहले दिल्ली में बिजली कंपनियों पर ईमानदारी और पारदर्शिता के अंकुश के साथ कर सकूं।

7) ताकि प्रधान सेवक को संदेश दे सकूं कि अपने अप्रधान मतदाता स्वामियों से राज्यों में उनकी कठपुतली सरकारें स्थापित करने की अपेक्षा करने के बजाय परिवर्तन के आकांक्षी सच्चे विरोधियों के साथ मिलकर परस्पर लोकतांत्रिक सहयोग और सहकार से विकास देश को विकास के रास्ते पर ले जाएं।

8) ताकि कुछेक वर्षों में मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान से मोहभंग के बाद कांग्रेस की 65 साल पुरानी क्रूर अकर्मण्यता और लाइलाज रिश्वतखोरी और मतलबपरस्ती की तरफ लौटने की दयनीय विडंबना से बचने के लिए एक ज्यादा रचनात्मक और संभावनाशील विकल्प तैयार कर सकूं।

9) ताकि सभी राजनीतिक पार्टियों को अपने कामकाज में संपूर्ण पारदर्शिता और चुनाव सुधारों को अपनाने के लिए विवश करने योग्य दबाव पैदा कर सकूं।

10) ताकि गांधी-वाड्राओं की सत्तालोलुप और प्रधान सेवक की व्यक्तित्व-केंद्रित राजनीति के स्थान पर देश में सुदूर भविष्य में विविध स्वस्थ राजनीतिक धाराओं को साथ लेकर चलने वाली निपुण राजनीतिक संस्कृति का विकास कर सकूं।

11) ताकि पारंपरिक राजनीति की जकड़बंदी में फंसे अपने देश में पहली बार लीक से हटकर एक जनांदोलन से निकले अपारंपरिक राजनीतिक प्रयोग को पूरी तरह खिलने से पहले ही असमय मुरझाने से बचा सकूं।

Sanjeev Kshitij
संजीव क्षितिज। वरिष्‍ठ पत्रकार। सुरेंद्र प्रताप सिंह के साथ रविवार में काम किया। फिर प्रभात खबर, अमर उजाला और दैनिक भास्‍कर जैसे अखबारों में वरिष्‍ठ पदों पर रहे। उनसे +919910059111 पर संपर्क किया जा सकता है।

You may also like...