राष्ट्रीय सुरक्षा कवच पहन कर खेला गया एक काला हास्य

JOLLY LLB 2

➧ अभिषेक गोस्वामी

फिल्म जॉली एल एल बी टू एक ऐसे नवोदित महत्त्वाकांक्षी वकील जगदीश्वर मिश्रा ‘जॉली’ की कहानी है, जो किसी भी कीमत पर अपने आप को नामी वकीलों की जमात में लाना चाहता है। इसी क्रम में, लखनऊ के स्थानीय कोर्ट परिसर में अपना खुद का चेंबर पाने के लिए वह मामले की पेचीदगी और गंभीरता को बिना भांपे एक गर्भवती महिला हिना सिद्दीक़ी से धोखाधड़ी कर बैठता है, जो उसकी खुदकुशी का सबब बनती है। हिना सिद्दीकी के शौहर इक़बाल के फर्जी एंकाउंटर मामले की तहें जब खुलने लगती हैं और असलियत सामने आती है, तो उसे भीतर तक हिला देती है। लिहाजा अपने भीतर की ग्लानि से मुक्त होने के लिए वह अपनी वकालती जीवन के पहले केस के रूप में मरहूम हिना सिद्दीक़ी और उसके परिवार के साथ हुए दोहरे अन्याय के खिलाफ कोर्ट में लड़ाई लड़ता है। फिल्म का अंत न्याय (सत्य) की तलाश में जॉली द्वारा किये गये तर्क और पेश किये गये प्रमाणों की जीत के साथ होता है, जिसकी वजह से वह राज्य और न्याय व्यवस्था की मिलीभगत से रचे गये दुष्चक्र को भेदने में सफल होता है।

पिछले दस साल की हिंदी फिल्मों पर यदि हम नज़र डालें तो पाएंगे कि हिंदी सिनेमा का यह दौर एक ऐसा दौर रहा है, जिसने विषयवस्तु, प्रस्तुतिकरण और दर्शकों के रसास्वादन में बदलाव के लिहाज से सबसे अधिक विविधतापूर्ण फिल्में देखी हैं। जॉली एल एल बी टू उसी कड़ी की एक ऐसी फिल्म है, जिसके मूल में एक ऐसी विषयवस्तु जो सीधे सीधे आम जनमानस से जुड़ती है। अपने हक़ के लिए सवाल उठाने पर दबंग सत्तासीनों द्वारा रौंद दिये जाने के दौर में सिनेमा के पर्दे पर ही सही, मगर न्याय को मिलते हुए देखना किसको अच्छा नहीं लगेगा?

जहां तक फिल्म के प्रस्तुतिकरण का सवाल है, इस दौर की फिल्मों में कहानी को कहने की एक खास शैली विकसित हुई है, जिसका निर्वहन कमोबेश हर आने वाली नयी फिल्म कर रही है। खासकर वे फिल्में जिनके नायक अक्षय कुमार हैं। उत्तर भारतीय भाषा/बोली में मौजूद हास्यबोध को लिये जॉली एल एल बी टू भी कहानी कहने के उसी ढांचे का अनुसरण करती है, जो ‘विशेष’ से ‘सार्वभौमिक’ या ‘व्यापक’ की तरफ आगे बढ़ता है और जिसे कहानी कहने के एक सार्वभौमिक सिद्धांत के रूप में वर्तमान हिंदी सिनेमा जगत ने अंगीकार कर लिया है।

इन्हीं पिछले दस सालों में पैदा हुए अजीब से मासूम दर्शक वर्ग के लिहाज से देखें, तो यह फिल्म दर्शकों को न्यायिक महकमे की रोज़मर्रा की दिक्कतों से रूबरू कराते हुए उनके मन में न्याय व्यवस्था के प्रति आस्था जगाती है। निस्संदेह जिसका श्रेय इस फिल्म में काम कर रहे सभी गैर सितारा अभिनेताओं को दिया जाना चाहिए। विशेष रूप से जज की भूमिका में सौरभ शुक्ला, सीनियर लाॅयर की भूमिका में अन्नू कपूर, इंस्पेक्टर की भूमिका में कुमुद मिश्रा और हिना सिद्दीक़ी की भूमिका में सयानी गुप्ता को।

फिल्म के निर्देशक सुभाष कपूर मीडिया में अनेक जगहों पर जॉली एल एल बी टू को आधिकारिक रूप से एक ब्लैक कॉमेडी बताते हैं। ब्लैक कॉमेडी में मेरी अपनी निजी दिलचस्पी और सुभाष कपूर के इस दावे के चलते जब मैं इस फिल्म को इस एंगल से देखने लगता हूं, तो मुझे विषयवस्तु और प्रस्तुतिकरण की शैली दोनों ही लिहाज से यह फिल्म ब्लैक कॉमेडी होने की शर्तों को पूरा करती हुई नहीं दिखाई पड़ती। हां, थोड़ी कोशिश करती हुई ज़रूर दिखाई पड़ती है – मगर बहुत कम और सतही स्तर पर।

जज का नाचते हुए कोर्ट में प्रवेश, वकील की फीस का मेनू कार्ड, जज की कुर्सी पर टेबल लैंप का गिरना इत्यादि दृश्यबंध प्रस्तुतिकरण के लिहाज से ब्लैक कॉमेडी की तरफ इशारा ज़रूर करते हैं, मगर ब्लैक कॉमेडी का यह भुरभुरा किला फिल्म के अंत तक आते आते तब ध्वस्त हो जाता है, जब भारतीय जनमानस की मासूमियत को संतुष्ट करने के लिए निर्देशक फिल्म को ‘उपदेशात्मक/संदेशात्मक मोड’ में ले जाते हैं। एक विशुद्ध ब्लैक कॉमेडी इस ‘उपदेशात्मक/संदेशात्मक मोड’ की परवाह नहीं करती। अतः मेरा उनसे यह कहना होगा कि यदि वे इस फिल्म कों ब्लैक कॉमेडी न भी कहें तो चलेगा।

अंत में, मेरी राय में, फिल्म जॉली एल एल बी टू कुल मिलाकर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कवच पहन कर खेला गया एक ऐसा काला हास्य’ है जो भारतीय न्यायिक व्यवस्था में निहित विद्रूपताओं को मनोरंजक तरीके से उभारने में काफी हद तक सफल होती है।



अभिषेक गोस्वामी। शिक्षा में रंगमंच और नाट्यकला एवं वंचितों के रंगमंच में विशेषज्ञता के साथ पिछले 23 वर्षों से रंगकर्म में सक्रिय। अमरीका और चीन समेत अनेक देशों में रंगमंचीय प्रवास। शौक से कवि एवं छाया चित्रकार। फिलहाल अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन में नियमित कार्य करते हुए अपनी पहली शॉर्ट फिक्शन फिल्म ‘एक गैर इरादतन हत्या’ के निर्माण की तैयारी में व्यस्त। अभिषेक से alibaba.tie@gmail.com और 7742094646 पर संपर्क कर सकते हैं। उनका पोस्टल एड्रेस है 13, गायत्री नगर, अजमेर रोड, सोडाला, जयपुर 302006 (राजस्थान)।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *