Category: मोहल्‍ला लंदन

टेक वन। एक्‍शन। सीन। कट कट कट। वन्‍स एगेन… 16

टेक वन। एक्‍शन। सीन। कट कट कट। वन्‍स एगेन…

अविनाश ♦ पप्‍पू की चाय दुकान पर अफलातून जी ने जिन पत्रकार संत तुलसीदास से मिलाया, वे इस बात से बेहद दुखी और गमगीन थे कि वाटर में ऐसा कुछ भी नहीं था, तब तो सालों ने हंगामा कर दिया – इस फिल्‍म में शिवलिंग हटा कर कमोड लगाया जा रहा है – तब भी चुप हैं। वे झुंझलाये से थे कि कोई विरोध क्‍यों नहीं कर रहा। उससे एक दिन पहले पप्‍पू के लड़के ने डॉ काशीनाथ सिंह से शिकायत की थी कि बहुत नाइंसाफी हो रही है गुरुजी – मेरा नाम कहीं नहीं आ रहा है। काशीनाथ जी ने उससे कहा, तुम्‍हारे बाप का नाम तो आ रहा है न। इस पर पप्‍पू के लड़के ने जवाब दिया कि लेकिन सेवा तो शुरू से हम ही कर रहे हैं गुरुजी।

बदन में लोलिता से लेकर मर्लिन मुनरो और मैडोना भी है 3

बदन में लोलिता से लेकर मर्लिन मुनरो और मैडोना भी है

फ्रैंक हुजूर ♦ “पोर्न इज हार्मलेस दैन लादेन”, मिशेल ने चुलबुलाहट भरे अंदाज में कहा और मेरे मार्लबोरो लाइट सिगरेट के पैकेट की तरफ अपने मिडल फिंगर से इशारा किया। मैंने थोड़ी भी बेवफाई मिशेल के इस शौक से नहीं की और बेहद जल्दबाजी में सिगरेट का स्टिक उसके सुर्ख होठों के बीच टांग दिया। मैंने अपने लायटर जिसका नाम ‘केंट’ था, से चिंगारी निकाल मिशेल के होठों के बीच झूल रहे मार्लबोरो सिगेरेट को आग के हवाले कर दिया। मिशेल ने सिगेरेट के जलते ही एक लंबा कश खीचा और लायटर को मेरे राइट हैंड से अपने राइट हैंड में ले लिया।

मैंने मिशेल को दारू पिलायी, उससे उसकी कहानी सुनी! 6

मैंने मिशेल को दारू पिलायी, उससे उसकी कहानी सुनी!

फ्रैंक हुजूर ♦ “मेरे स्कूल के साथी आंद्रे के पापा पोर्न इंडस्ट्री के टॉप शॉट थे। एक दिन उन्होंने हम दोनों को गार्डेन में सेक्स करते देख लिया। फिर क्या था। उन्हें मेरा अंदाज इतना नशीला लगा कि उन्होंने मेरे लिए बहुत सारे लेंट चोकोलाते का बंडल ला दिया। लेंट चोकोलाते की खुशबू मेरी कमजोरी थी। आंद्रे के साथ के मेरे सेक्स रोम्प को कैमरा में कैद करने के बाद स्वीडन की पोर्न इंडस्ट्री में उसकी खूब कीमत लगी और देखते-देखते मैं काफी पैसा बनाने लगी…”

कुल तेरह महीने बाद लौटे अनामदास, एक अलबम लेकर 2

कुल तेरह महीने बाद लौटे अनामदास, एक अलबम लेकर

डेस्‍क ♦ जो हिंदी ब्‍लॉगिंग के शुरुआती-उत्‍साही दौर से परिचित हैं, वे अनामदास को जानते हैं। थोड़ा वक्‍त लेकर ही सही, अनामदास जब लिखते हैं, लगता है कि कलम की स्‍याही में कलेजा घोल कर लिखा है। हालांकि यह उपमा अब चलेगी नहीं, यह कहा जाएगा कि की-बोर्ड के तमाम अक्षरों में आत्‍मा फिट करके लिखा है। हमारी तरह अनामदास कभी जब-तब, जहां-तहां नहीं लिखते। हम ही हैं कि उनके लिखे को जब-तब, यहां-वहां उठाते-चिपकाते रहते हैं। जैसे 13 महीने बाद उन्‍होंने अपने ब्‍लॉग पर तस्‍वीरों का जो ये अलबम निकाल कर रखा है, उसे वहां से चुरा रहे हैं।

लंदन : डर्बी की पीयर-ट्री लायब्रेरी में मुशायरे की एक शाम 12

लंदन : डर्बी की पीयर-ट्री लायब्रेरी में मुशायरे की एक शाम

लंदन डेस्‍क ♦ हसन खान का मानना है कि बेशक मुशायरा मूलतः उर्दू शायरी को लेकर है मगर शायरों में मौजूद हिंदी के कवि तेजेंद्र शर्मा और श्रोताओं में मौजूद मुसलमान, सिख, हिंदू और ईसाई इस बात का सबूत है कि साहित्य का कोई मजहब नहीं होता। भाषा किसी मजहब से जुड़ी नहीं है। पीयर-ट्री लायब्रेरी की लाइब्रेरियन मारग्रेट जे ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि, “हमारी लायब्रेरी के लिए यह गर्व का विषय है कि यहां एक बहुभाषीय मुशायरा आयोजित किया जा रहा है। मार ग्रेट ने आगे कहा कि उन्हें उर्दू या हिंदी भाषा समझ नहीं आती मगर यह सच है कि साहित्य भाषाओं की दीवारें तोड़ कर अपनी बात श्रोता को समझा देता है।”

लंदन के लेखकों, कलाकारों ने साहिर को याद किया 2

लंदन के लेखकों, कलाकारों ने साहिर को याद किया

डेस्‍क ♦ यादों के झरोखों में झांकते हुए तेजेंद्र शर्मा ने साहिर के प्रेम प्रसंगों का जिक्र किया। अमृता प्रीतम की एक स्मृति को तेजेंद्र ने बहुत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। अमृता और साहिर दोनों मॉस्को गये थे, जहां साहिर को सोवियतलैंड पुरस्कार मिलना था। वहां एक अफसर की गलतफहमी से दोनों के नाम के बिल्ले बदल गये। साहिर ने अमृता से बिल्ले वापिस बदलने के लिए कहा। मगर अमृता ने कहा कि वह बिल्ला वापिस नहीं करेगी, इस तरह साहिर अमृता के दिल के करीब रहेगा। भारत वापिस आने पर साहिर की चंद ही दिनों में मृत्यु हो गयी। अमृता ये सोच कर रोती रही कि दरअसल मौत उसकी अपनी आयी थी, मगर उसके नाम का बिल्ला साहिर के सीने पर था। इसलिए मौत गलती से साहिर को ले गयी।

वंचितों के पक्ष में खड़े होना लेखक की जिम्‍मेदारी : सुलभ 4

वंचितों के पक्ष में खड़े होना लेखक की जिम्‍मेदारी : सुलभ

डेस्‍क ♦ लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में सोलहवां अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान लेने के बाद कथाकार हृषिकेश सुलभ ने कहा कि उनके लिए लिखना जीने की शर्त है। बिहार की जिस जमीन से वे आते हैं, वहां एक एक सांस के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमारी साझा संस्कृति को राजनीति की नजर लग गयी है। हम लेखक उसे बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। न्याय का सपना अभी भी अधूरा है और वंचित के पक्ष में खड़ा होना लेखक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त नलिन सूरी ने ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में हिंदी लेखक हृषिकेश सुलभ को उनके कथा संकलन ‘वसंत के हत्यारे’ के लिए ‘सोलहवां अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान’ प्रदान किया।

हिंदी लेखकों का परदेसी संसार : कनाडा में तेजेंद्र शर्मा 2

हिंदी लेखकों का परदेसी संसार : कनाडा में तेजेंद्र शर्मा

सुमन कुमार घई ♦ तेजेंद्र शर्मा ने कथा यूके की इंग्लैंड के साहित्य जगत में भूमिका की चर्चा करते हुए संस्था से पहले और बाद की अवस्था की तुलना की। भारत से बाहर रह रहे लेखकों को “प्रवासी” लेखक के संबोधन पर भी उन्होंने आपत्ति जतायी। उन्होंने विदेशों में रहने वाले लेखकों को प्रोत्साहित किया कि वह “नॉस्टेलजिया” के दलदल से बाहर आकर स्थानीय सरोकारों से अपने को जोड़ें और स्थानीय परिप्रेक्ष्य में ही साहित्य सृजन करें। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा के कैनेडियन लेखक को प्रवासी लेखक या ऑस्ट्रेलिया के लेखक को प्रवासी लेखक इसी कारण से नहीं कहा जाता क्योंकि उनके लेखन में स्थानीय सरोकारों की प्रधानता रहती है।

हृषिकेश सुलभ को इंदु शर्मा कथा सम्‍मान, लंदन जाएंगे 18

हृषिकेश सुलभ को इंदु शर्मा कथा सम्‍मान, लंदन जाएंगे

डेस्‍क ♦ कथा यूके के महासचिव एवं कथाकार तेजेंद्र शर्मा ने लंदन से सूचित किया है कि वर्ष 2010 के लिए अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान कहानीकार और नाटककार-रंगचिंतक हृषीकेश सुलभ को राजकमल प्रकाशन से 2009 में प्रकाशित उनके कहानी संग्रह वसंत के हत्यारे पर देने का निर्णय लिया गया है। इस सम्मान के अंतर्गत दिल्ली-लंदन-दिल्ली का आने-जाने का हवाई यात्रा का टिकट (एयर इंडिया द्वारा प्रायोजित) एयरपोर्ट टैक्‍स, इंगलैंड के लिए वीसा शुल्‍क, एक शील्ड, शॉल, लंदन में एक सप्ताह तक रहने की सुविधा तथा लंदन के खास-खास दर्शनीय स्थलों का भ्रमण आदि शामिल होंगे। यह सम्मान हृषीकेश सुलभ को लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में आठ जुलाई 2010 की शाम को एक भव्य आयोजन में प्रदान किया जाएगा।

लंदन में बसे भारतीयों ने एसडी बर्मन को याद किया 1

लंदन में बसे भारतीयों ने एसडी बर्मन को याद किया

दीप्ति शर्मा ♦ “आराधना में पहली बार राजेश खन्ना पर किशोर कुमार की आवाज का इस्तेमाल करके सचिन देव बर्मन ने हिंदी सिनेमा के संगीत को एक नयी राह दिखायी। इस फिल्म के बाद एक नहीं दो दो सुपर स्टारों ने जन्म लिया – राजेश खन्ना ने एक्टर के तौर पर और किशोर कुमार ने गायक के तौर पर।” यह कहना था कथा यूके के महासचिव एवं कथाकार तेजेंद्र शर्मा का। मौका था एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स, लंदन एवं कथा यूके द्वारा नेहरू सेंटर, लदन में आयोजित कार्यक्रम सचिन देव बर्मन – यादों के साये में। अपने पौने दो घंटे के पॉवर पाइंट प्रेजेंटेशन में तेजेंद्र शर्मा ने सचिन देव बर्मन द्वारा संगीतबद्ध गीतों के वीडियो भी दिखाये।