Category: मोहल्ला भोपाल

मीडिया संस्थानों में तमाम अस्मिताओं का प्रतिनिधित्व हो 0

मीडिया संस्थानों में तमाम अस्मिताओं का प्रतिनिधित्व हो

पशुपति शर्मा ♦ सुभाष गाताडे ने कहा कि अस्मिताओं के संघर्ष का सवाल आज ज्यादा मौजूं है। 80-90 के दशक में दलित और स्त्री अस्मिता का उभार हुआ। हिंदी पट्टी के सबसे बड़े सूबे में मायावती अस्मिताओं के इस संघर्ष के बाद सत्ता पर काबिज हुईं। 90 के दशक में हिंदू अस्मिता का उभार हुआ। और अब आज के दौर में जब हम गुजरात दंगे बनाम विकास की बहस में उलझे हैं, अस्मिताओं से जुड़े ऐसे कई सवाल बार-बार सिर उठाते हैं। पत्रकारिता के ढांचे का जिक्र करते हुए सुभाष गाताडे ने कहा कि यहां अभी भी पुरुष वर्चस्व कायम है। पत्रकारिता संस्थानों में तमाम अस्मिताओं का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। इस सिलसिले में उन्होंने 2006 में हुए एक सर्वे का जिक्र किया।

कथाकार ओमा शर्मा को 2012 का स्‍पंदन कृति सम्‍मान 1

कथाकार ओमा शर्मा को 2012 का स्‍पंदन कृति सम्‍मान

प्रेस विज्ञप्ति ♦ साल 2012 के स्‍पंदन कृति सम्‍मान के लिए कथाकार ओमा शर्मा का चयन किया गया है। ललित कलाओं के लिए समर्पित भोपाल की स्‍पंदन संस्‍थान हर साल ये सम्‍मान देती है। ओमा शर्मा को उनके कथा संग्रह शुभारंभ और अन्‍य कहानियां के लिए यह सम्‍मान दिया जाएगा। उन्‍हें नं‍दकिशोर आचार्य, अर्चना वर्मा, शशांक, मधु कांकरिया और हरीश पाठक के निर्णायक मंडल ने इस सम्‍मान के लिए चुना है। सम्‍मान स्‍वरूप ओमा शर्मा को ग्‍यारह हजार रुपये की राशि और स्‍मृति चिन्‍ह दिसंबर में आयोजित स्‍पंदन के सम्‍मान समारोह कार्यक्रम में दिया जाएगा। उर्मिला शिरीष ने यह जानकारी एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिये मोहल्‍ला लाइव को दी है। ओमा शर्मा यूपी के बुलंदशहर जिले के दीघी गांव के रहने वाले हैं।

भगवत गये, अब भोपाल और तेजी से दिल्‍ली बन जाएगा 0

भगवत गये, अब भोपाल और तेजी से दिल्‍ली बन जाएगा

विष्‍णु खरे ♦ भोपाल में, जो देखते-ही-देखते दूसरी दिल्ली बन गया है, वहां भगवत एक कठिनतर होते गये समय में एक नैतिक उपस्थिति भी थे। हम कह सकते हैं कि वे एक अपेक्षाकृत छोटे राजधानी-महानगर के तमाम प्रलोभनों, आकर्षण-विकर्षणों और लगभग आधी सदी के बहुविध निजी परिचयों-संबंधों के बावजूद वहां के लेखकीय जमीर के एक पहरुए थे। सीमाओं और आलोचनाओं के बावजूद उनकी आवाज को सुना और माना जाता था। कमलाप्रसाद के बाद भगवत रावत के चले जाने से यह आशंका प्रबल हो उठी है कि भोपाल का निर्लज्ज और उच्छ्रंखल उपग्रही दिल्लीकरण अब और तीव्रतर तथा दुर्निवार हो उठेगा, जिसका दुष्प्रभाव वृहत्तर हिंदी विश्व पर पड़े बिना न रहेगा।

ग्रामीण जीवन-संस्कृति की व्याख्या करती है ये कहानियां 2

ग्रामीण जीवन-संस्कृति की व्याख्या करती है ये कहानियां

डॉ कलानाथ मिश्र ♦ आधुनिक संस्कृति ने भारतीय समाज की बुनियाद को गहरे प्रभावित किया है, जिसे कथाकार हरीश पाठक की कहानियों में देखा जा सकता है। ये कहना है जानी मानी कथा लेखिका चित्रा मुद्गल का। चर्चित कथाकार एवं पत्रकार हरीश पाठक के कथा-संकलन ‘सोलह कहानियां’ का लोकार्पण करते हुए उन्होंने ये बातें कहीं।

चकमक का शानदार सफर, 300वें अंक की तैयारी 4

चकमक का शानदार सफर, 300वें अंक की तैयारी

डेस्‍क ♦ सितंबर में चकमक का 300वां अंक प्रकाशित होगा। यह अंक असल में सितंबर-अक्‍टूबर का जुड़वां अंक होगा। 200 से ज्‍यादा पन्‍ने होंगे इसमें। चकमक से जुड़े लोगों की कोशिश है कि इस 300वें अंक में पाठकों को बेहद आत्‍मीय, रोचक, समृद्ध और सुविविध सामग्री मिले। चकमक से जुड़े सुशील ने एक पत्र के जरिये बताया है कि पढ़ने-पढ़ाने के सिलसिले को चलाये रखना शुभचिंतकों की मदद के बिना मुमकिन नहीं होता।

इसमें कोई शक नहीं कि न्‍याय पैसेवालों की लौंडी है! 2

इसमें कोई शक नहीं कि न्‍याय पैसेवालों की लौंडी है!

डेस्क ♦ आज जब सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल का मामला खींचने से मना कर दिया, तो भोपाल के वरिष्‍ठ पत्रकार राजकुमार केसवानी ने टीवी पर कह दिया कि सुप्रीम कोर्ट खुद को समझती क्‍या है। वह न्‍याय को मजाक क्‍यों बना रही है। वह भोपाल की जनता को कभी इस पाले में तो कभी इस पाले में क्‍यों उछाल रही है। अगर गलती सीबीआई या सरकार कर रही है, तो भोपाल की जनता का क्‍या दोष है। कुल मिला कर कह दिया कि न्‍याय पैसे वालों की लौंडिया है। हालांकि ठीक यही शब्‍द उनके नहीं थे।

कमला जी ने लोकतांत्रिक संपादन की मिसाल कायम की 1

कमला जी ने लोकतांत्रिक संपादन की मिसाल कायम की

प्रलेस ♦ कमला प्रसाद जी ने पूरे देश के प्रगतिशील और जनपक्षधरता वाले रचनाकारों को उस वक्त देश में इकट्ठा करने का बीड़ा उठाया जब प्रतिक्रियावादी, अवसरवादी और दक्षिणपंथी ताकतें सत्ता, यश और पुरस्कारों का चारा डालकर लेखकों को बरगलाने का काम कर रहीं हैं। उनके इस काम को देश की विभिन्न भाषाओं और विभिन्न संगठनों के तरक्कीपसंद रचनाकारों का मुक्त सहयोग मिला और एक संगठन के तौर पर प्रगतिशील लेखक संघ देश में लेखकों का सबसे बड़ा संगठन बना। इसके पीछे दोस्तों, साथियो और वरिष्ठों द्वारा भी कमांडर कहे जाने वाले कमला प्रसाद जी के सांगठनिक प्रयास प्रमुख रहे।

विकास संवाद ने मीडिया फेलोशिप के लिए आवेदन मांगा

विकास संवाद ने मीडिया फेलोशिप के लिए आवेदन मांगा

भोपाल डेस्‍क ♦ वर्ष 2011 के लिए सातवीं विकास संवाद मीडिया लेखन और शोध फैलोशिप की घोषणा कर दी गयी है। इस साल प्रदेश के छह पत्रकारों को सामाजिक मुद्दों पर लेखन और शोध करने के लिए फैलोशिप दी जाएगी। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 05 फरवरी है। इस वर्ष बहिष्कार (विकास परियोजनाओं के संदर्भ में), पलायन और बाल अधिकार, बाल व्यापार, आदिवासी स्वास्थ्य, शहरी गरीबी और शिक्षा के मुद्दों पर फैलोशिप दी जाएगी। यह फैलोशिप छह माह की अवधि की होंगी। इस दौरान पत्रकारों को उनके विषयों पर लेखन और शोध कार्य करना होगा। इनमें से एक फैलोशिप अंग्रेजी और एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार को दी जाएगी।

माखनलाल में वेब पत्रकारों ने लेक्‍चर दिये, सम्‍मानित हुए 4

माखनलाल में वेब पत्रकारों ने लेक्‍चर दिये, सम्‍मानित हुए

डेस्‍क ♦ माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में आयोजित एक कार्यक्रम में देश के दो पत्रकारों ने विद्यार्थियों से अपने अनुभव बांटे। ये पत्रकार थे बंगला पत्रिका ‘लेट्स गो’ एवं ‘साइबर युग’ के प्रधान संपादक जयंतो खान एवं प्रवक्ता डॉट काम के संपादक संजीव सिन्हा। संजीव सिन्हा ने वेब पत्रकारिता के बारे में जानकारी दी। अपने अनुभव बांटते हुए उन्होंने कहा कि जो तेजी इस माध्यम में है, वह मीडिया की अभी अन्य किसी विधा में नहीं है। यही तेजी इस माध्यम के लिए वरदान है। उन्‍होंने कहा कि वेब मीडिया अपने आप में एक अनूठा माध्‍यम है, जिसमें मीडिया के तीनों प्रमुख माध्‍यम प्रिंट, रेडियो और टेलीविजन की विशेषताएं समाहित है।

रिपोर्टिंग में जनहित का खयाल रखें : ए संदीप 0

रिपोर्टिंग में जनहित का खयाल रखें : ए संदीप

डेस्‍क ♦ चौदह भाषाओं में प्रकाशित होने वाली समाचार पत्रिका द संडे इंडियन और माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय ने 18 सितंबर को भोपाल में “मध्य प्रदेश के विकास में मीडिया की भूमिका” पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया! इस सेमिनार में मध्‍यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, शिक्षामंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, द संडे इंडियन के समूह संपादक ए संदीप, वरिष्‍ठ पत्रकार राहुल देव, उदय सिन्हा, दीपक चौरसिया के अलावा मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित थे। इस मौके पर ए संदीप ने कहा कि खोजी पत्रकारिता हो या फिर आलोचनात्मक पत्रकारिता, उसमें किसी व्यक्ति एवं संस्था पर आक्षेप लगाने के बजाय जनहित का ख्याल रखना चाहिए।