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ब्रजेश कुमार झा ♦ चांदनी चौक के नजदीक तुर्कमान गेट से एक पतला रास्ता बुलबुली खान की तरफ जाता है। यही वह इलाका है जहां रजिया सुल्तान यानी इतिहास की पहली महिला सुल्तान को दफनाया गया था। आज इस कब्रगाह की हालत देखेंगे तो महिला दिवस का डंका बजाने वालों की हकीकत समझ में आएगी। देखिए, देश के सबसे बड़े ओहदे पर महिला है। सरकार के भी कान खींच-खींचकर फिलहाल उसे एक महिला ही चला रही है। उस पर से दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का रुतबा देख लें। इनके राज में इल्तुतमिश की बेटी और एक जमाने की क्रांतिकारी महिला की कब्र उपेक्षित है। वह एक गौरवशाली इतिहास लिये लेटी है। अपनी कब्र पर एक छत को तरसती हुई।
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शीबा असलम फहमी ♦ आधुनिकता क्या केवल वस्त्रों में दिखनी चाहिए, या फिर वह हमारे भीतर विचारों के स्तर पर उतरने का पर्याय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला दिवस का सौवां साल हमारे लिए महत्त्वपूर्ण होना चाहिए, लेकिन अगर दलित समाज की महिलाएं पच्चीस दिसंबर को अपना महिला दिवस अलग से मनाती हैं, तो क्या हमें उन तक नहीं पहुंचना चाहिए। बहुत आधुनिक हो चुके हमारे मीडिया में खासतौर पर अल्पसंख्यकों के मुद्दे को एक फैशन की तरह लिया जाता है।
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डेस्क ♦ अज्ञेय को उनकी आवाज़ में सुनना एक आह्लादकारी अनुभव था। सात मार्च, रविवार की शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के एनेक्सी सभागार में उनकी कविताओं को सुनने के लिए लगभग सौ बुद्धिजीवी, लेखक, कलाकार, संगीतकार, नाट्यकर्मी और पत्रकार जुटे थे। अज्ञेय के श्वेत-श्याम चित्रों एक एक करके पर्दे पर आ रहे थे और पार्श्व से उनकी विनम्र आवाज़ हॉल के अंधेरे में फैल रही थी। उनकी आवाज़ को रिकॉर्ड किया था ओम थानवी ने और चित्र भी उनके निजी अलबम के थे, जिसको मिला कर एक स्टिल वीडियो फिल्म तैयार की गयी थी। अज्ञेय की जन्मशती का यह पहला आयोजन था। इस तरह का आयोजन साल भर तक चलेगा।
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डेस्क ♦ मोहल्ला लाइव पर छपी कथाकार गौरीनाथ की एक प्रतिक्रिया के लिए उन्हें कानूनी नोटिस भेजी गयी है। यह प्रतिक्रिया गौरीनाथ ने खगेंद्र ठाकुर के उस आलेख पर दी थी, जिसमें उन्होंने गौरीनाथ को इशारों इशारों में अवसरवादी कहा था और इस अवसरवादिता के एक उदाहरण के तौर पर उन्होंने बताया था कि पटना पुस्तक मेले में मंच पर आकर गौरीनाथ ने आलोचक नामवर सिंह के पांव छूए। यह आलेख खगेंद्र ठाकुर ने रविवार डॉट कॉम के लिए लिखा था। इसकी प्रतिक्रिया गौरीनाथ ने मोहल्ला लाइव डॉट कॉम को दी। इस प्रतिक्रिया से तिलमिला कर खगेंद्र ठाकुर ने अपने वकील के जरिये गौरीनाथ को कानूनी नोटिस भेजी है और चरित्र हनन का आरोप लगाया है।
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मृणाल वल्लरी ♦ एक महिला होने के नाते यह खबर मेरे लिए बेहद अहम थी कि लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर पहुंचने वाली पहली स्त्री, यानी मीरा कुमार ने संसद भवन परिसर में महिलाओं के लिए अलग से प्रसाधन कक्ष का इंतजाम कराया है। संसद भवन में पुलिसकर्मी, पत्रकार या किसी भी रूप में काम कर रही महिलाओं को दिये गये इस तोहफे का जो प्रकार है, उसके बारे में अंदाजा लगाना भी थोड़ा मुश्किल होता कि देश की सर्वोच्च संस्था ‘तोहफे’ में मिली इस सुविधा से अब तक वंचित थी। यों अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की सौवीं वर्षगांठ का मौका करीब है और मीरा कुमार ने महिलाओं के लिए अलग से प्रसाधन कक्ष बनवाने जैसे काम को महिला दिवस से नहीं जोड़ा है। लेकिन मुझे कहीं न कहीं यह एक तोहफा जैसा ही लग रहा है।
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डेस्क ♦ हमार के चैनल हेड उदयचंद्र सिंह को कुछ लोगों ने पीट दिया। उन्हें उन लोगों ने पीटा, जिन्हें दो दिनों पहले ही चैनल से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। वे इस बात से क्षुब्ध थे कि चैनल के प्रति वेतन न मिलने के बावजूद कमिटमेंट के साथ काम करने पर भी उन्हें निकाल दिया गया। बकाया वेतन भी नहीं दिया गया। जिन दो लोगों ने उदयचंद्र सिंह की थप्पड़ों और घूंसों से पिटाई की, उनके बारे में कर्मचारी बता रहे हैं कि उनके साथ उदयचंद्र सिंह ने बदतमीजी की हद कर दी थी। उनके बर्ताव से आमतौर पर लोग दुखी हैं। घटना ऑफिस के बाहर सड़क पर हुई।
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डेस्क ♦ हमार और फोकस में होली से पहले कर्मचारियों में उबलते आक्रोश को ठंढा करने के लिए प्रबंधन ने एक महीने की सैलरी बांट दी है। यह सैलरी नवंबर माह की है। हम पाठकों को बता दें कि हमार और फोकस के कर्मचारियों की नवंबर, दिसंबर और जनवरी की सैलरी पेंडिंग थी। हताश कर्मचारियों का गुस्सा अपने अपने तरीके से फूट रहा था। इस बीच हमार पर होली की हुड़दंग कार्यक्रम शुरू हुआ, तो उनकी हताशा भी कुछ घटनाओं के जरिये जाहिर हुई। चैनल हेड और कर्मचारियों के बीच आपस में तू-तू मैं-मैं बढ़ गयी। इस बीच हुआ ये कि चैनल से 12 मीडियाकर्मियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।
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डेस्क ♦ अभी अभी खबर मिली है कि फोकस टीवी में एक टेक्नीशियन से चैनल हेड उदय चंद्र सिंह की बदतमीजी के बाद काम बंद कर दिया गया है। वहीं एक कर्मी ने फोन करके बताया कि एक बंदे को उदय चंद्र सिंह कॉलर पकड़ के बाहर निकाल रहे थे। इससे बाकी के लोग भड़क उठे। उन्होंने काम बंद कर दिया। अभी फोकस पर सब कुछ रिकॉर्डेड चलाया जा रहा है। जिन सज्जन ने सूचना दी, उन्होंने यह भी कहा कि हमार में भी लोग काम बंद करने जा रहे हैं। हमने पाठकों को सूचना दी थी कि हमार और फोकस के कर्मचारियों को पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है और लगातार आश्वासन पर आश्वासन मिल रहा है।
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गंगा सहाय मीणा ♦ पूना समझौते से पूर्व दोनों के मतभेद चरम पर थे। पूरे घटनाक्रम को नाटक दर्शकों के समक्ष जीवंत कर देता है। गांधी के अनशन ने अंबेडकर लिए द्वंद्व पैदा कर दिया। एक तरफ दलितों के लिए अधिकारों की लड़ाई का प्रश्न था, दूसरी तरफ गांधी का जीवन। यहां नाट्य-लेखक राजेश कुमार ने एक दिलचस्प प्रसंग सृजित किया है। अंबेडकर की गृहिणी पत्नी रमाबाई उन्हें इस द्वंद्व से मुक्ति दिलाने में मदद करती हैं। रमाबाई कहती हैं, ”सिद्धांत जान लेने के लिए नहीं, जान बचाने के लिए होते हैं… आज तक महात्मा लोगों की जान बचाते आए हैं, आप तो महात्मा की जान बचाने जा रहे हैं।” अंबेडकर का द्वंद्व समाप्त हो जाता है और वे गांधी से मिलने का फैसला करते हैं।
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डेस्क ♦ मतंग सिंह के फोकस टीवी में शायद कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। पीटीआई ने लाखों के बकाया की वजह से अपनी सर्विस फोकस से जुड़े चैनलों को देनी बंद कर दी है, वहीं राइटर की सर्विस भी काट दी गयी है। एक चैनल, जो पूरब की भाषाओं में समाचार और मनोरंजन के वादों के साथ शुरू हुआ, अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। लोगों को वेतन नहीं मिल रहे हैं। अभी हाल ही में एक वेबसाइट ने जब हमार में होली की हुड़दंग सीरीज़ को लेकर एक खबर छापी, तो वहां के कर्मियों ने टिप्पणियों के जरिये चैनल की हकीकत बताने की कोशिश की। टिप्पणियों का आशय ये था कि चैनल में तीन महीनों से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। ऐसे में पर्दे पर होली की हुड़दंग करना कितना नैतिक है? लेकिन बाद में वे सारी टिप्पणियां डिलीट कर दी गयीं।


