Category: फेसबुक से

सोशल नेटवर्किंग की वर्चुअल दुनिया में फेसबुक सबसे क्रिएटिव जगह है। हम वहां से आपके लिए कुछ बेहतरीन टुकड़े चुनते हैं।

दिल्‍ली में क्‍यों बननी चाहिए आपकी सरकार?

➧ संजीव क्षितिज दिल्‍ली में चुनावी गर्मी अपने शवाब पर है। सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। लेकिन सर्वे बता रहे हैं कि आम आदमी पार्टी तमाम विरोधी पार्टियों पर भारी...

पता है, अरबपति [बिलेनियर्स] कैसे बनते हैं?

➧ शीतल प्रसाद सिंह प्रचलित और काफी हद तक सही अवधारणा यह है कि “अपराध” या सामाजिक नियमों को तोड़कर या मजलूमों की लाश पर एंपायर तैयार होते हैं, पर तकनीक के अस्वाभाविक विकास...

बुरे दिनों में चुटकुला भी एक हथियार है

➧ अरुण माहेश्‍वरी हिटलर के जमाने के व्हिस्‍पर जोक्स नाजी सैनिक और जासूस जानते थे, लेकिन इन्हें रोकते नहीं थे, क्योंकि यह उनके वश में नहीं था। आदमी बुरी से बुरी स्थिति में भी...

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अल्लाह, इन्हें समझ दो! ये पागल हैं!!

➧ नाज़िश अंसारी आज मैं खुद “अलिफ़” से “ये” तक खंगालना चाहती हूं। ढूढना चाहती हूं ऐसी कोई भी आयत, जो यूं धडाधड़ चलती गोलियों और धमाधम गिरती लाशों का समर्थन करती है। मैं...

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नये नये रंगों में ढलती चली गयी हिंदी

➧ अरविंद कुमार उन्‍नीसवीं सदी आधुनिक हिंदी की तैयारी की सदी थी। उस के पहले दशक में इंशा अल्‍लाह ख़ां ने रानी केतकी की कहानी (1803) लिखी (जिसमें हिंदवी छुट किसी और बोली का...

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हां, हम सब हरामजादे हैं! #MukeshKumar

पिछले महीने, दिल्ली में, केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति ने ‘रामजादे’ बनाम ‘हरामजादे’ वाला चर्चित घोर सांप्रदायिक वक्तव्य अपने एक भाषण में दिया था, उससे कितनों की ‘भावनाएं आहत हुईं’ इसका हिसाब कौन रखेगा? लेकिन...

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किस्‍मत में बिछड़ना था! [गाना कैसे सुनें 1]

हमने पिछले दिनों एक फेसबुक सीरीज का जिक्र किया था, फोटो कैसे देखें। उस सीरीज के र‍चयिता थे, कबाड़खाना वाले अशोक पांडे। अब उसी तर्ज पर सैयद मो इरफान साहब की यह पेशकश देखें,...

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वे सब हमारे थे, जो अब उनके हैं! ❝☺❞

हरि अनंत हरि कथा अनंता। इससे पहले एक पोस्‍ट में हमने विश्‍वगुरु जंबूद्वीप के कुछ अवशेष दिखाये थे।⇗ फेसबुक के पुरातत्‍व-विज्ञानियों ने जानकारी दी कि जंबूद्वीप की खुदाई में जिस पुरातत्‍वविद का सबसे अहम...

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#FB पर खुदाई में पुराना जंबूद्वीप मिला

इस गोले के लोग अपनी तरह से साम्राज्‍यों की बाल की खाल निकालते हैं। आमतौर पर सामाजिक रूप से इस विधा को तंज कहते हैं, साहित्‍य में व्‍यंग्‍य कहा जाता है। हिंदी साहित्‍य की...

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हंसी गरीब नहीं होती… [फोटो कैसे देखें?]

कबाड़खाना वाले अशोक पांडे अपनी तरह के अनोखे भारतीय सृजनधर्मी हैं। उनके जीने और उनके कहने का अंदाज उन्‍मुक्‍त और प्रतिबद्ध अभिव्‍यक्ति की प्रतिध्‍वनि है। पिछले दिनों उन्‍होंने फेसबुक पर लोगों को सिखाया-बताया कि...