Home » Archive

Articles in the ख़बर भी नज़र भी Category

ख़बर भी नज़र भी, मीडिया मंडी »

[4 Sep 2010 | No Comment | ]
आने वाला समय नकवी और उनकी टीम पर भारी है

नॉट कनफर्म ♦ शुक्रवार को वीडियोकान टावर की आठवीं मंजिल पर दो घंटे तक चली टाप मैनेजमेंट की मीटिंग में प्राइम टाइम में आजतक की गिरती साख को सबसे बड़ी चिंता का विषय माना गया। नकवी को सख्त निर्देश देते हुए कहा गया कि यदि आजतक अपने प्राइम टाइम बैंड में प्रतिद्वंदी चैनल से बीस प्रतिशत ज्यादा का टाइम स्पैंड अर्जित नहीं करता है, तो इसका सीधा प्रभाव विज्ञापन उगाही पर आयेगा जिसे प्रबंधन स्वीकार नहीं करेगा। माना जा रहा है कि जीके के साथ-साथ अरुण पुरी ने भी इसका संज्ञान लेते हुए चिंता जतायी है। कहा जा सकता है कि आने वाला समय नकवी और उनकी टीम पर भारी है।

ख़बर भी नज़र भी, मीडिया मंडी »

[2 Sep 2010 | 11 Comments | ]
कोई कम कोई ज्‍यादा, इस हमाम में सब नंगे हैं!

रुद्रप्रताप ♦ इस दौर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बाजार और विचार की दो नावों में चलना आखिर कैसे संभव हो सकता है? आपको या तो गजब का संतुलन साधना होगा या फिर इन सबसे दूर होकर मैदान छोड़ना होगा। अच्छा हुआ कि नागार्जुन जी ने मैदान छोड़ना श्रेयस्कर समझा किंतु उसी दिन कुंठाएं भी छोड़ देते तो बहोत अच्छा होता। कमअजकम आज आजतक के पतन का रोना नहीं रोते। कौन-सा आजतक पहले ही पत्रकारिता का भला करता फिर रहा था। इंडिया टीवी आने के पहले ही तो गू-लिपाई, गिरोहबंदी, सत्तासुख लूटने के सारे कुकर्म शुरू हो चुके थे। अच्छा होता कि आज किन्हीं निजों हितों को साधने के वशीभूत होकर आजतक की असफलताओं का ठीकरा नागार्जुन जी वहां के कर्ता-धर्ताओं पर नहीं फोड़ते बल्कि उन कुविचारों को कोसते जिसने लोकतंत्र के चौथे खंभे का भट्ठा बिठाकर रखा है।

ख़बर भी नज़र भी, मीडिया मंडी »

[2 Sep 2010 | 4 Comments | ]
एसपी के सींचे पत्रकारों ने ही दर्शकों से धोखा किया

अज्ञेय ♦ 2003 के आसपास से ही टीम के बांध में रिसाव शुरू होने लगा। इसके कई कारण हैं। अरुण पुरी की चौकसी में कमी। ख्याति को कैश कराने की मुहिम और टीम – वर्क की जगह व्यक्तिगत आकांक्षाओं का पनपना इत्यादि। दिबांग ने एनडीटीवी से डील की और प्रसून-नग्मा-सिक्ता जैसे चेहरों और सुनील सैनी जैसे सिपाही आजतक से अलग हो गये। आजतक का टायटेनिक किसी हिम खंड से टकराया सा प्रतीत हुआ लेकिन शोहरत के ग्राफ में कोई कमी नहीं आयी। मोहभंग का सिलसिला कई और लायक लोगों की विदाई में भी दिखाई दिया लेकिन चैनल के तेवर वही रहे। यहां तक कि उदय का भी फेयरवेल हो गया। इसी टूट के बीच आजतक ने चैनल का चोला उतारकर ब्रांड की पोशाक पहनने का फैसला कर लिया।

ख़बर भी नज़र भी »

[1 Sep 2010 | 13 Comments | ]
कुकर्मों का ठीकरा “इंडिया टीवी” के माथे मत फोड़‍िए!

रुद्रप्रताप ♦ पहले पहल टर्फ पर गू पोतने का काम आजतक ने किया, जब उसने बिना ड्राइवर वाली कार चलायी। किसी ने ‘यमराज से मिले गजराज’ तो किसी ने ‘धोनी दे दनादन’ चलाये। किसी ने कुंभ के दौरान ‘नंगी नहाती विदेशी लड़की’ का फुटेज चलाया। महोदय, आपने इन सबका जिक्र अपने आलेखों में किया ही है। क्या आपको याद है कि तब इंडिया टीवी की टीआरपी पांचवें-छठे नंबर की हुआ करती थी। क्या ये गू लिपाई इंडिया टीवी की थी? क्या नॉन न्यूज को न्यूज इंडिया टीवी ने बनाया? तब देहदर्शनाएं और बालाएं इंडिया टीवी की करतूत हुआ करती थीं? आज जब खबरों की दौड़ में भी इंडिया टीवी नंबर वन पर पहुंच गया तो उन वजुहात पर चर्चा की जानी चाहिए।

ख़बर भी नज़र भी, मीडिया मंडी »

[1 Sep 2010 | 4 Comments | ]
इस हफ्ते भी जारी है आज तक का पतन…

डेस्‍क ♦ इस हफ्ते की टीआरपी में एक बार फिर आजतक इंडिया टीवी से नीचे है और पिछले हफ्ते के मुकाबले वह प्‍वाइंट तीन फीसदी के नुकसान में है। लगातार आठवें हफ्ते आजतक के इस परिणाम से यह साफ है कि कभी नंबर वन रहा ये चैनल दम तोड़ रहा है। हमें लगता है कि उत्‍कर्ष के अवसान की पतन कथा को थोड़ा और बारीक घटनाओं-विश्‍लेषणों से हमें समझने की कोशिश करनी चाहिए। दूसरे चैनलों की अच्‍छी-बुरी चीजों पर वाकई बाद में चर्चा करते रहेंगे, जैसा कि नागार्जुन ने अपनी टिप्‍पणी में लिखा है और जिस टिप्‍पणी को हम यहां नीचे चिपका भी रहे हैं। बहरहाल, देखिए इस बार की टीआरपी और पिछले हफ्ते की टीआरपी से मिलान कीजिए।

ख़बर भी नज़र भी, मीडिया मंडी »

[1 Sep 2010 | 2 Comments | ]
एक जमाना था कि आजतक के तेवर देखते ही बनते थे!

अज्ञेय ♦ ऐसे कई उदाहरण हैं लेकिन जिन्हें यहां लिखकर बात को लंबा करना निरर्थक लग रहा है। आशय मात्र यह है कि टेलीवीजन टीम-वर्क का माध्‍यम है। यह टीम-वर्क 2004 तक भरपूर तरीके से और बाद में यदा कदा दिखाई देता रहा। अब ये इतिहास की बातें हो गयी हैं। अब तो आजतक बकौल नागार्जुन जी कुछ हाथों का खिलौना बनकर रह गया है। बाकी सारे लोग वेतन की मजबूरी ओढ़कर कुंठाओं का कंपकंपा देनेवाला मौसम झेल रहे हैं। अगर कोई रिपोर्टर गलती से कोई खबर ले भी आता है तो समाचार संपादक की तस्‍दीक करने की ऑपरेशन टेबल पर उसको मरना ही पड़ता है। आश्चर्य होता है कि एलियंस की तस्‍दीक वह कैसे करते हैं, प्रलय आ जाएगी, इसकी तस्‍दीक का थर्मामीटर उन्हें कैसे मिलता है?

ख़बर भी नज़र भी, मीडिया मंडी »

[31 Aug 2010 | 9 Comments | ]
अब तो नंबर वन इंडिया टीवी ही रहेगा या उसका क्‍लोन

नागार्जुन ♦ आजतक की पतन गाथा वास्तव में किसी एक संस्थान की पतन गाथा नहीं है। यह पूरे भारतीय टेलीविजन न्यूज इंडस्ट्री में आयी गिरावट का द्योतक है। कुछ कुछ भारत में हॉकी के खेल की बदहाली जैसा। घास के मैदान पर खेलने के अभ्‍यस्‍त खिलाड़ी दूसरे टर्फ पर कैसे खेलेंगे? आज सभी एक ही टर्फ पर न्यूज का धंधा कर रहे हैं। कई बार तो न्यूज रूम में सारे चैनलों को एक साथ देखने पर यह फर्क करना मुश्किल हो जाता है कि उनमें बुनियादी अंतर क्या है? और यह टर्फ इंडिया टीवी का टर्फ है। इसलिए इस खेल में आखिरकार जीत इंडिया टीवी की ही होगी। भले ही इंडिया टीवी नंबर वन रहे या नहीं रहे। जो नंबर वन होगा वो इंडिया टीवी का ही कोई क्लोन होगा।

ख़बर भी नज़र भी, मीडिया मंडी »

[30 Aug 2010 | 18 Comments | ]
झूठ के इस युद्ध में मात खा रही है नकवी की टीम

नागार्जुन ♦ अपने इंटरव्यू में जब नकवी कहते हैं कि खबरें से खबरें लड़ती हैं, तो वो असल में झूठ बोल रहे होते हैं। सच तो यह है कि इन बड़े खिलाड़ियों ने झूठ और तमाशों के बूते अनगिनत बार खबरों की हत्या की है। ऐसा करने के चक्कर में आजतक यह भूल गया कि उसकी यूएसपी खबर दिखाना है। उसका नतीजा अब दिख रहा है। आजतक के पास अब खबरों का आधार ही नहीं। टीम भी बिखर चुकी है। कभी इसके पास एक भरी पूरी एसआईटी (स्पेशल इनवेस्टिगेटिव टीम) हुआ करती थी। इनकम टैक्स ऑफिस से लेकर तिहाड़ जेल के भीतर फैले भ्रष्टाचार की स्टोरी दिखायी जाती थी। बीते चार साल में दाऊद बीट के मास्टर दीपक शर्मा की कुछ स्टोरी और चक दे क्रिकेट जैसा प्रोग्राम छोड़ दें, तो कोई ऐसी बड़ी स्टोरी याद नहीं आती, जिसका जिक्र किया जा सके।

ख़बर भी नज़र भी, मीडिया मंडी, मोहल्‍ला लाइव »

[30 Aug 2010 | 3 Comments | ]
आज तक में मोहल्‍ला लाइव को बैन किया गया

डेस्‍क ♦ आज तक में मोहल्‍ला लाइव को ब्‍लॉक कर दिया गया है। देश में कहीं भी लोकतंत्र की नींव हिलती देख हल्‍ला मचाने वाले मीडिया के पास आईने में खुद का चेहरा देखने का साहस नहीं है। आज तक की पतन कथा के जिन बिंदुओं को मोहल्‍ला लाइव में रेखांकित किया जा रहा है, वह कोई व्‍यक्तिगत हमला नहीं है। यह इस सदी में सर उठाने वाले टेलीविजन इंडस्‍ट्री के शीघ्र (नैतिक) पतन की कथा है। इस कथा को सुनने के लिए धीरज भी चाहिए और साहस भी। इस कथा से उबरने के लिए एक आत्‍मबल भी चाहिए – लेकिन यथास्थिति की मांद में छुप कर मलाई खाने वाले टीवी न्‍यूज के लीडरानों के पास यह नहीं है। वे आलोचना का वॉल्‍यूम म्‍यूट करके सब कुछ जैसे का तैसा रखना चाहते हैं।

ख़बर भी नज़र भी, मीडिया मंडी »

[28 Aug 2010 | 32 Comments | ]
“आजतक” को छड़ी लगाओ, उसने भरोसा तोड़ा है!

नागार्जुन ♦ अजय कुमार के आउटपुट हेड होते ही यह साफ हो गया कि दीपक चौरसिया को भी उनकी बात न केवल सुननी पड़ेगी बल्कि अमल भी करना होगा। दीपक को यह मंजूर नहीं हुआ। उन्होंने नकवी के इस फैसले के तुरंत बाद इस्तीफा दिया और स्टार न्यूज चले गये। बताया जाता है कि कमर वहीद नकवी को दीपक का ये तेवर पसंद नहीं आया। दीपक को औकात बताने के लिए नकवी ने अशोक सिंघल को उनकी जगह दी। यह संकेत दिया कि जो काम दीपक करते थे, वो अशोक सिंघल भी कर सकते हैं। इससे बेतुका फैसला भारतीय टेलीविजन न्यूज के इतिहास में शायद ही कभी लिया गया हो।