Category: बात मुलाक़ात

छोटे शहरों से आये लेखक-निर्देशक सिनेमा बदल रहे हैं 1

छोटे शहरों से आये लेखक-निर्देशक सिनेमा बदल रहे हैं

पटकथा-संवाद लेखक संजय चौहान से पत्रकार अजय ब्रह्मात्‍मज की बातचीत संजय चौहान भोपाल से दिल्ली होते हुए मुंबई आये। दिल्ली में जेएनयू की पढ़ाई के दिनों में उनका संपर्क जन नाट्य मंच से हुआ।...

‘अफजल की फांसी एक सियासी कत्ल है’ 0

‘अफजल की फांसी एक सियासी कत्ल है’

संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरू की फांसी के बाद दिल्ली में नजरबंद हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी से तहलका के संवाददाता बृजेश सिंह की बातचीत अफजल गुरु की फांसी को आप...

“नया सिनेमा छोटे-छोटे गांव-मोहल्‍लों से आएगा” 6

“नया सिनेमा छोटे-छोटे गांव-मोहल्‍लों से आएगा”

फिल्‍मकार अनुराग कश्‍यप से अविनाश से बातचीत अनुराग कश्‍यप ऐसे फिल्‍मकार हैं, जो अपनी फिल्‍मों और अपने विचारों के चलते हमेशा उग्र समर्थन और उग्र विरोध के बीच खड़े मिलते हैं। हिंसा-अश्‍लीलता जैसे संदर्भों...

अजी लाज लागेला जी! का सोचिहें लालू, का कहिहें नीतीश…! 0

अजी लाज लागेला जी! का सोचिहें लालू, का कहिहें नीतीश…!

♦ निराला एक सौ पांच साल की उम्र में भी युवाओं जैसा जोश। उर्जा से लबरेज। किसी कार्यक्रम में सम्मानित होने के लिए बुलाये जाने और प्रस्तुति का मौका नहीं मिलने पर, ‘नाचने’ का...

जा रही हो, चली जाओगी, थोड़ी देर और बैठो ना…! 0

जा रही हो, चली जाओगी, थोड़ी देर और बैठो ना…!

♦ अनुपमा कल, जब से यह सूचना मिली है कि शिवकुमार ओझा नहीं रहे, तब से मन बेचैन, परेशान तो है ही, एक अपराधबोध से ग्रस्त भी। वे करीब 98 साल की उम्र में...

मुसलमान भाइयों से अपील है कि वे सिर्फ वोट बन कर न रहें 14

मुसलमान भाइयों से अपील है कि वे सिर्फ वोट बन कर न रहें

नरेंद्र मोदी ♦ मैं बुनियादी तौर पर संगठन का व्यक्ति हूं। कुछ खास परिस्थितियों में मैं मुख्यमंत्री बन गया। जिंदगी में मैं किसी स्कूल के मॉनिटर का भी चुनाव नहीं लड़ा था। मैं कभी किसी का एलेक्शन एजेंट भी नहीं बना। मैं तो इस दुनिया का इंसान ही नहीं हूं। न ही इस दुनिया से मेरा कुछ लेना देना रहा। आज मेरी मंजिल है छह करोड़ गुजराती। उनकी भलाई, उनका सुख। मैं अगर गुजरात में अच्छा काम करता हूं, तो यूपी और बिहार के दस लोगों की नौकरी लगती है। मैं हिंदुस्तान की सेवा गुजरात के विकास द्वारा करूंगा। गुजरात में अगर नमक अच्छा पैदा होगा, तो सारा देश गुजरात का नमक खाएगा। मैंने गुजरात का नमक खाया है और सारे देश को गुजरात का नमक खिलाता हूं।

मुंबई डराती थी, लेकिन मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं था 10

मुंबई डराती थी, लेकिन मेरे पास खोने के लिए कुछ नहीं था

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ♦ बीच में ‘पीपली लाइव’, ‘पान सिंह तोमर’ और ‘कहानी’ आ गयी। मैं दावे के साथ कहता हूं कि एक्टिंग के क्राफ्ट पर मेरी इतनी मेहनत कम एक्टरों ने की होगी। मैं मनोज बाजपेयी का लोहा मानता हूं। उनकी तरह मैं खुद को एक्सप्लोर करता हूं। एक्टिंग की एक्सरसाइज करता हूं। मैं मोटी बुद्धि का अभिनेता हूं। स्मार्ट एक्टर नहीं हूं। अभी तक स्टेज पर नहीं बोल पाता। भीड़ में कोने में घुसने की कोशिश करता हूं। फिर भी मेरे मन में कभी कोई बदगुमानी नहीं हुई। शुरू में कुछ एक आदर्श थे। अभी कोई नहीं है। मुझे अच्छे दोस्त मिले हैं। अनुराग कश्यप ने हमेशा कहा कि छोड़ के जाना मत। हम लड़ेंगे और जीतेंगे। वापस जाओगे तो वहां कौन सी जिंदगी अच्छी हो जाएगी। मैं डटा रहा।

लोगों को खुद के अपने ‘वासेपुर’ का पता नहीं है! 0

लोगों को खुद के अपने ‘वासेपुर’ का पता नहीं है!

अनुराग कश्‍यप ♦ ये कहानी वासेपुर की है। इस कहानी का ‘गॉड फादर’ से कुछ लेना देना नहीं है। लोग बिना पिक्चर देखे हुए बात करते हैं, तो लोगों के हिसाब से क्या जवाब दूं। कहानी है वासेपुर से। ‘गॉड फादर’ सबने पढ़ी है, लेकिन उनको अपना खुद का वासेपुर नहीं मालूम। पहले वासेपुर के बारे में रिसर्च करिए। पहले वासेपुर का जानिए फिर आप बोलिए ‘गॉड फादर’ से कितना प्रभावित है। किसी भी कहानी में बाप, बेटा और पोता है तो क्या वह ‘गॉड फादर’ से प्रभावित हो जाती है। फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं है, जो कहीं से उठाया हुआ है। इसमें जो कुछ भी उठाया गया है, वहां की हेड लाइंस से… वहां की न्यूज पेपर रिपोर्टिंग से। क्या ‘गॉड फादर’ देखने के बाद वासेपुर के लोग ऐसे हो गये थे? अगर हो गये थे तो डेफनेटली ‘गॉड फादर’ है।

मुखिया ने कहा था, हिंसा का उत्‍तर हिंसा ही हो सकता है 11

मुखिया ने कहा था, हिंसा का उत्‍तर हिंसा ही हो सकता है

ब्रह्मेश्‍वर मुखिया ♦ देखिए जब इंसान पर किसी तरह का आफत या विपत्ति आती है और विशेषकर जब संत प्रवृत्ति वाले इंसान के अंदर प्रतिशोध की भावना जगती है, वह बहुत कठोर होती है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम नरेश का आज बयान आया है कि नक्‍सलवाद को राजनीतिक प्रक्रियाओं के जरिये दूर किया जा सकता है, पूरी तरह बेबुनियाद है और बचपना भरा है। सरकार किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दे। किसान स्वत: ही मजदूरों को जायज मजदूरी देने लगेंगे। हिंसा का उत्तर हिंसा ही हो सकता है। यदि केपीएस गिल ने पंजाब में इस सिद्धांत को अपनाया होता, तो पंजाब में कभी अमन-चैन स्थापित नहीं हो पाता।

मेरी फिल्‍म का माफिया केवल गोली भरता हुआ नहीं दिखता 1

मेरी फिल्‍म का माफिया केवल गोली भरता हुआ नहीं दिखता

अनुराग कश्‍यप ♦ संगीत के लिए हमने तय किया था कि जमीन का म्यूजिक लेंगे। जमीन का म्यूजिक कई बार लोगों को बोरिंग भी लगता है। लोगों को लगता है कि आज कल के धिन चक धिन चक के जमाने में यह कौन सा म्यूजिक लेकर आ गये। हमने वहां की आवाजों, धुनों और संगीत को लेकर काम किया। ‘जियs हो बिहार के लाला’ का मुखड़ा ट्रेडिशनल है। अंतरे बाद में जोड़े गये। ‘तनि नाचि तनि घूमि सब के मन बहलावs रे भइया’ बाद में जोड़ा गया। हमने बहुत सारे गाने ऐसे ही उठाये हैं। उन्हें आज के संगीत और वाद्य से जोड़ा। उन्हें समकालीन बनाया।